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IPL 2026: GT कोच आशीष नेहरा का बड़ा ऐलान, हम ऐसी टीम बनना चाहते हैं, जो किसी भी परिस्थिति में जीत सके

GT Coach Ashish Nehra on IPL 2026: हेड कोच आशीष नेहरा ने कहा, हम एक ऐसी टीम बनना चाहते हैं जो लगातार बड़े रन बनाए और उस विकेट के हिसाब से सही लक्ष्य हासिल करे. हम अलग-अलग परिस्थितियों में मैच जीतना चाहते हैं.

IPL 2026: GT कोच आशीष नेहरा का बड़ा ऐलान, हम ऐसी टीम बनना चाहते हैं, जो किसी भी परिस्थिति में जीत सके
GT Coach Ashish Nehra on IPL 2026: 

GT Coach Ashish Nehra on IPL 2026: हेड कोच आशीष नेहरा ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि गुजरात टाइटंस (GT) एक ऐसी टीम बनना चाहती है, जो किसी भी परिस्थिति में जीत सके. यह टीम पिछले साल की उपविजेता पंजाब किंग्स के खिलाफ 31 मार्च को मुल्लनपुर में मुकाबले के साथ अपना अभियान शुरू करेगी. टीम के कप्तान शुभमन गिल ने कहा है कि आगामी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) सीजन में उनकी टीम का फोकस लगातार बड़े स्कोर बनाने पर होगा. शुभमन गिल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा "आखिरकार, आपको दूसरी टीम से ज्यादा रन बनाने होते हैं. चाहे वह चार रन से हो या 150–200 रन से, लक्ष्य जीतना ही है. हम एक ही मैच में 300–350 रन बनाने की वाहवाही के पीछे नहीं भाग रहे हैं.

हम एक ऐसी टीम बनना चाहते हैं जो लगातार बड़े रन बनाए और उस विकेट के हिसाब से सही लक्ष्य हासिल करे. हम अलग-अलग परिस्थितियों में मैच जीतना चाहते हैं. हम ऐसी टीम नहीं बनना चाहते जो सिर्फ बेहतरीन विकेट्स पर ही अच्छा प्रदर्शन करे." हेड कोच आशीष नेहरा ने अपने कप्तान के इस नजरिए का समर्थन करते हुए कहा, "जैसा कि कप्तान ने अभी कहा, हम एक ऐसी टीम बनना चाहते हैं जो किसी भी परिस्थिति में, किसी भी स्थिति में, चाहे घर पर खेले या बाहर, जीत सके."

साल 2022 में अपने डेब्यू के बाद से, गुजरात टाइटंस चार में से तीन सीजन में प्लेऑफ तक पहुंची है. अपने पहले ही सीजन में उसने खिताब जीता और 2023 में उपविजेता रही. नेहरा ने गुजरात टाइटंस के मध्यक्रम पर हो रही उस आलोचना का भी बचाव किया, जिसमें कहा जा रहा था कि टीम बड़े रन बनाने के लिए गिल, साई सुदर्शन और जोस बटलर जैसे शीर्ष तीन बल्लेबाजों पर बहुत ज्यादा निर्भर है.

उन्होंने कहा, "सबसे पहली बात तो यह कि एक कोच के तौर पर मुझे ऐसा नहीं लगता कि हमारा मध्यक्रम बिखर रहा था. हां, शीर्ष तीन बल्लेबाजों ने काफी रन बनाए और अक्सर 17-18 ओवर तक बल्लेबाजी की, जो कि 13-14 मैचों के बाद टीम के इतनी मजबूत स्थिति में होने का एक मुख्य कारण था. इसमें कोई शक नहीं कि टूर्नामेंट का अंत निराशाजनक रहा, लेकिन जब आपके टॉप तीन बल्लेबाज इतने ज्यादा रन बना रहे हों, तो मिडिल ऑर्डर को स्वाभाविक रूप से बहुत कम गेंदें खेलने को मिलती हैं, और यह कोई आसान काम नहीं है. 14 मुकाबलों में शायद एक या दो मौके ऐसे आए होंगे जब नंबर 5 या 6 के बल्लेबाज मैच खत्म कर सकते थे, लेकिन नहीं कर पाए, लेकिन यह तो खेल का ही एक हिस्सा है.

हेड कोच ने कहा, "चाहे राहुल तेवतिया हों, शाहरुख खान हों, या शेरफेन रदरफोर्ड, उन्होंने अपना काम बखूबी किया, इसीलिए हम उस मुकाम तक पहुंच पाए. फिनिशर्स के बारे में बातें करना तो हमेशा आसान होता है, लेकिन जब कोई बल्लेबाज 18वें ओवर में क्रीज पर आए और उसे दो ओवरों में 35 रन बनाने हों, खासकर तब जब गेंदबाजी जसप्रीत बुमराह या जोफ्रा आर्चर कर रहे हों, तो यह बिल्कुल भी आसान नहीं होता."

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