दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता का क्रिकेटप्रेम जगजाहिर था. नाना विराट कोहली के बहुत बड़े फैन थे और इस बात को उन्होंने सार्वनजिक रूप से कहा था कि विराट के आउट होने के बाद उनका खाने का भी मन नहीं करता था. पाटेकर को कई पूर्व दिग्गजों ने श्रद्धांजलि दी, तो पाकिस्तानी पूर्व कप्तान और विकेटकीपर राशिद लतीफ ने भी नाना के साथ अपनी यादों को साझा किया है. राशिद ने नाना को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी बातचीत 1994 में कोलंबो में सिंगर ट्रॉफी के दौरान शुरू हुई और कई सालों तक जारी रही. वहीं, और एक पाकिस्तानी पूर्व दिग्गज बासित अली ने खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने राशिद अली को पाटेकर के नाम के चलते ही 'नाना' का नाम दिया. और ड्रेसिंग रूम में साथी खिलाड़ी लतीफ को इसी निक नेम से पुकारते थे.
नाना ने भारतीय क्रिकेटरों के साथ साझा की थी बात
पाकिस्तान पूर्व कप्तान एक अग्रणी अखबार से बातचीत में बोले, 'मैं उनके साथ नियमित रूप से बात किया करता था और यह सिलसिला कई दिनों तक चला. जब हम साल 1994 में सिंगर ट्रॉफी के लिए कोलंबो में थे, तो अजहरुद्दीन और अजय जडेजा मेरी उनसे बात कराते थे.' लतीफ ने यह भी याद किया कि जब 1998 में पाटेकर को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला था, तो उन्होंने उन्हें बधाई दी थी. उस समय वह पाकिस्तान टीम के साथ दक्षिण अफ्रीका में थे और बाद में उन्हें पूर्व भारतीय क्रिकेटर अजय जडेजा से पता चला कि पाटेकर ने भारतीय खिलाड़ियों के साथ यह बात साझा की थी.
रशीद ने आगे कहा, 'जब उन्हें 1998 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला, तब मैं टीम के साथ दक्षिण अफ्रीका में था. मैंने उन्हें अपनी शुभकामनाएं भेजी थीं. फिर जब वह भारतीय टीम से मिलने गए, तो उन्होंने सभी को इसके बारे में बताया. अजय जडेजा ने मुझे बताया था. तब नाना ने जडेजा से कहा था कहा, 'देखो, रशीद लतीफ पाकिस्तानी हैं, उन्होंने मुझे बधाई दी, लेकिन तुम लोगों ने नहीं दी.'
बासित अली का नाम का खुलासा
वैसे राशिद की नाना से जुड़ी एक और कहानी है कि दिवंगत अभिनेता के नाम पर रशीद लतीफ का उपनाम भी साथियों ने "नाना" रख दिया गया था.इस रिश्ते को पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर बासित अली ने भी पाटेकर को श्रद्धांजलि देते हुए याद किया. बासित ने कहा, 'सुबह-सुबह मैंने एक दुखद खबर सुनी. हमारे बहुत ही प्यारे भाई, दोस्त और दिग्गज अब इस दुनिया में नहीं रहे. नाना पाटेकर साहब का निधन हो गया है. वह क्या शख्सियत थे. उन्होंने फिल्मों में बिल्कुल वैसे ही अभिनय किया जैसे वह वास्तविक जीवन में थे. हमने लतीफ का उपनाम नाना पाटेकर की वजह से 'नाना' रख दिया था हमारी पहली बार 1994 में बात हुई थी, और वहीं से इसकी शुरुआत हुई थी.
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