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8000 मीटर ऊंचाई, बर्फ की दुश्वारियां...सबसे ऊंची चोटी के 'डेथ जोन' में इन बेटियों ने ऐसे रचा इतिहास

आईटीबीपीFLAG HOISTING IN EVEREST: आईटीबीपी लंबे समय से पर्वतारोहण अभियानों में हिस्सा लेता रहा है. यह अब तक 232 पर्वतारोहण अभियान पूरे कर चुका है. आईटीबीपी ने माउंट एवरेस्ट पर पांच बार सफल चढ़ाई की है. इसके अलावा बल दुनिया की कई बड़ी चोटियों पर भी पहुंच चुका है.

8000 मीटर ऊंचाई, बर्फ की दुश्वारियां...सबसे ऊंची चोटी के 'डेथ जोन' में इन बेटियों ने ऐसे रचा इतिहास
आईटीबीपी की महिला पर्वतारोहियों के जज्बे को सलाम.
  • आईटीबीपी की पहली सर्व महिला एवरेस्ट टीम ने 21 मई 2026 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराया
  • टीम में कुल 14 सदस्य थे, जिनमें 11 महिला पर्वतारोही शामिल थीं और उन्होंने नेपाल के साउथ कोल रूट से चढ़ाई की
  • 8 हजार मीटर से ऊपर के डेथ जोन में कम ऑक्सीजन, तेज हवाएं और बर्फीली चुनौतियों के बावजूद टीम ने सफलता पाई
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भारत तिब्बत सीमा पुलिस यानि आईटीबीपी की महिला पर्वतारोहियों ने बड़ा इतिहास रच दिया है. आईटीबीपी की पहली सर्व महिला एवरेस्ट अभियान टीम ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया. यह अभियान आईटीबीपी के पर्वतारोहण इतिहास की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

एवरेस्ट की चोटी पर फहराया तिरंगा

माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 मीटर है, इसे दुनिया की सबसे कठिन चोटियों में गिना जाता है. यह अभियान 19 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली से शुरू हुआ था. टीम में कुल 14 सदस्य शामिल थे, इनमें 11 महिला पर्वतारोही थीं. इस टीम ने पहले भारत और नेपाल में प्रशिक्षण लिया. इसके बाद ऊंचाई वाले इलाकों में खुद को मौसम के मुताबिक ढालने की तैयारी की गई. सभी महिला पर्वतारोहियों ने नेपाल के साउथ कोल रूट से एवरेस्ट पर चढ़ाई की. यह रास्ता काफी मुश्किल माना जाता है. पहली टीम ने 21 मई 2026 को रात 12 बजकर 52 मिनट पर एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराया.

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कम ऑक्सीजन बर्फ की बनी चुनौती

वैसे एवरेस्ट पर चढ़ाई आसान नहीं होती. 8 हजार मीटर के ऊपर के हिस्से को डेथ जोन  कहा जाता है. यहां ऑक्सीजन बहुत कम होती है और तेज बर्फीली हवाएं चलती हैं. यहां मौसम कभी भी बदल सकता है. इसके अलावा रास्ते में बड़े हिमखंड और गहरी बर्फ भी चुनौती बनते हैं. इन कठिन हालात के बीच आईटीबीपी की महिला टीम ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने साहस, धैर्य और मजबूत टीमवर्क का परिचय दिया. आईटीबीपी के मुताबिक यह अभियान महिला सशक्तीकरण का बड़ा संदेश है. यह दिखाता है कि महिलाएं हर मुश्किल चुनौती को पार कर सकती हैं.

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ITBP की माउंट एवरेस्ट पर पांच बार सफल चढ़ाई

अभियान के दौरान पर्यावरण का भी खास ध्यान रखा गया. टीम ने स्वच्छ हिमालय- ग्लेशियर बचाओ अभियान भी चलाया.महिला पर्वतारोहियों ने पहाड़ों पर फैले गैर-जैविक कचरे को भी इकट्ठा किया. इसका मकसद हिमालय को साफ और सुरक्षित रखना था. आईटीबीपी लंबे समय से पर्वतारोहण अभियानों में हिस्सा लेता रहा है. यह अब तक 232 पर्वतारोहण अभियान पूरे कर चुका है.

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आईटीबीपी ने माउंट एवरेस्ट पर पांच बार सफल चढ़ाई की है. इसके अलावा बल दुनिया की कई बड़ी चोटियों पर भी पहुंच चुका है. इनमें कंचनजंघा, मकालू, ल्होत्से, धौलागिरी और मानस्लु जैसी चोटियां शामिल हैं. सच कहें तो यह अभियान सिर्फ एक पर्वतारोहण मिशन नहीं माना जा रहा, इसे महिलाओं के साहस, आत्मविश्वास और देशभक्ति की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है.

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