
परिवार और बेटी के साथ श्रीसंत
नई दिल्ली:
दिल्ली कोर्ट ने क्रिकेट खिलाड़ी श्रीसंत को बेगुनाह घोषित किया और श्रीसंत को मैदान पर उतरने में 24 घंटे का समय भी नहीं लगा। करीब दो साल तक क्रिकेट से दूर रहे एस श्रीसंत ने रविवार को अपने बचपन के कोच पी. शिवाकुमार के साथ गेंदबाजी का अभ्यास किया।
2013 में स्पॉट फिक्सिंग के मुद्दे पर गिरफ्तार होने के बाद श्रीसंत पहली बार मैदान पर उतरे थे और अपने स्कूल के मैदान पर उनके घरेलू खिलाड़ियों ने उनका ज़ोरदार स्वागत भी किया।
उनकी गेंदबाज़ी का आकलन करना ठीक नहीं होगा क्यों कि अभी उत्साह ज़्यादा और तकनीक पर कम ध्यान था, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या श्रीसंत की क्रिकेट में वापसी इतनी आसान होने वाली है...ऐसा लगता तो नहीं है।
भले ही केरल क्रिकेट संघ ने उनकी वापसी पर ज़ोर दिया है लेकिन श्रीसंत की आगे की राह अभी भी धुंधली ही है, उनके उपर से फिक्सर का दाग कोर्ट ने तो धो दिया लेकिन क्रिकेट के मैदान पर उतरने के लिए आगे की राह इतनी आसान नहीं होने वाली है। कोर्ट का फैसला आने के बाद भी बीसीसीआई है कि अपने स्टैंड से झुकने को तैयार नहीं है....
अनुराग ठाकुर ने कहा - हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन बीसीसीआई अभी भी अपने फैसले पर अडिग हैं और इन खिलाड़ियों पर से बैन नहीं हटेगा।

BCCI पर सवाल
बीसीसीआई के इस कड़े रवैया पर कुछ सवाल भी उठते हैं :
- जिन अधिकारियों को आपने बरी किया , उनको कोर्ट ने दोषी पाया
- जिनको कोर्ट ने बरी किया उनको बोर्ड अभी तक दोषी मान रहा है
- दिल्ली पुलिस के आधार पर खिलाड़ियों कौ बैन किया गया था फ़िर कोर्ट के फैसले से बैन क्यों नहीं हटा रहे...
- विवाद को थामने के लिए और अपनी साख़ बचाने के लिए क्या इन खिलाड़ियो को सिर्फ़ उस समय बलि का बकरा बनाया गया
चाहे मो. अज़हरुद्दी हों या फिर अजय जडेजा ही क्यों न हों, इन तमाम खिलाड़ियों ने फिक्सिंग के दाग को धोने के लिए सालों तक कोर्ट के चक्कर लगाए, उन्हें केस में कामयाबी भी हासिल हुई लेकिन जब तक अदालत का फैसला आया मैदान पर उतरने की इन खिलाड़ियों की खेलने की उम्र बीत चुकी थी।
हालांकि ये तीनों खिलाड़ी अभी भी बोर्ड के साथ समझौता चाहते हैं और आगे किसी कानूनी जंग के पक्ष में नहीं है, बोर्ड ने साफ कहा है कि कोर्ट ने इन तीनों खिलाड़ियों को सबूतों के अभाव में बरी किया लेकिन उनके और दिल्ली पुलिस के काम करने का तरीका अलग है।
इन तीनों खिलाड़ियों के लिए एक ही उम्मीद है, पूर्व कप्तान और इस वक्त बीसीसीआई में रसूख रखने वाले सौरव गांगुली ने इन खिलाड़ियों की वकालत की है। आगे क्या होगा ये कोई नहीं जानता पर ये ज़रुर कहा जा सकता है कि इन तीनों खिलाड़ियों के लिए आगे अभी एक लंबी लड़ाई लड़नी बाकी है।
2013 में स्पॉट फिक्सिंग के मुद्दे पर गिरफ्तार होने के बाद श्रीसंत पहली बार मैदान पर उतरे थे और अपने स्कूल के मैदान पर उनके घरेलू खिलाड़ियों ने उनका ज़ोरदार स्वागत भी किया।
उनकी गेंदबाज़ी का आकलन करना ठीक नहीं होगा क्यों कि अभी उत्साह ज़्यादा और तकनीक पर कम ध्यान था, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या श्रीसंत की क्रिकेट में वापसी इतनी आसान होने वाली है...ऐसा लगता तो नहीं है।
भले ही केरल क्रिकेट संघ ने उनकी वापसी पर ज़ोर दिया है लेकिन श्रीसंत की आगे की राह अभी भी धुंधली ही है, उनके उपर से फिक्सर का दाग कोर्ट ने तो धो दिया लेकिन क्रिकेट के मैदान पर उतरने के लिए आगे की राह इतनी आसान नहीं होने वाली है। कोर्ट का फैसला आने के बाद भी बीसीसीआई है कि अपने स्टैंड से झुकने को तैयार नहीं है....
अनुराग ठाकुर ने कहा - हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन बीसीसीआई अभी भी अपने फैसले पर अडिग हैं और इन खिलाड़ियों पर से बैन नहीं हटेगा।

BCCI पर सवाल
बीसीसीआई के इस कड़े रवैया पर कुछ सवाल भी उठते हैं :
- जिन अधिकारियों को आपने बरी किया , उनको कोर्ट ने दोषी पाया
- जिनको कोर्ट ने बरी किया उनको बोर्ड अभी तक दोषी मान रहा है
- दिल्ली पुलिस के आधार पर खिलाड़ियों कौ बैन किया गया था फ़िर कोर्ट के फैसले से बैन क्यों नहीं हटा रहे...
- विवाद को थामने के लिए और अपनी साख़ बचाने के लिए क्या इन खिलाड़ियो को सिर्फ़ उस समय बलि का बकरा बनाया गया
चाहे मो. अज़हरुद्दी हों या फिर अजय जडेजा ही क्यों न हों, इन तमाम खिलाड़ियों ने फिक्सिंग के दाग को धोने के लिए सालों तक कोर्ट के चक्कर लगाए, उन्हें केस में कामयाबी भी हासिल हुई लेकिन जब तक अदालत का फैसला आया मैदान पर उतरने की इन खिलाड़ियों की खेलने की उम्र बीत चुकी थी।
हालांकि ये तीनों खिलाड़ी अभी भी बोर्ड के साथ समझौता चाहते हैं और आगे किसी कानूनी जंग के पक्ष में नहीं है, बोर्ड ने साफ कहा है कि कोर्ट ने इन तीनों खिलाड़ियों को सबूतों के अभाव में बरी किया लेकिन उनके और दिल्ली पुलिस के काम करने का तरीका अलग है।
इन तीनों खिलाड़ियों के लिए एक ही उम्मीद है, पूर्व कप्तान और इस वक्त बीसीसीआई में रसूख रखने वाले सौरव गांगुली ने इन खिलाड़ियों की वकालत की है। आगे क्या होगा ये कोई नहीं जानता पर ये ज़रुर कहा जा सकता है कि इन तीनों खिलाड़ियों के लिए आगे अभी एक लंबी लड़ाई लड़नी बाकी है।