छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने प्रदेश में यूसीसी का खाका (UCC Draft) तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का औपचारिक गठन कर दिया है. सरकार के इस फैसले से साफ है कि छत्तीसगढ़ अब देश का अगला ऐसा राज्य बनने की राह पर अग्रसर है, जहां कथित रूप से सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा.
इस नवगठित उच्चस्तरीय समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति (Retired Justice) रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इससे पहले उत्तराखंड में भी यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति की अध्यक्षता कर चुकी हैं. ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके लंबे कानूनी अनुभव पर एक बार फिर बड़ा भरोसा जताया है.
नौकरशाहों और कानूनी दिग्गजों को टीम में मिली जगह
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली इस पांच सदस्यीय समिति में प्रशासनिक और कानूनी क्षेत्र के कई बड़े और अनुभवी चेहरों को जगह दी गई है. समिति के दूसरे सदस्यों में सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी श्यामधर सिंह, राज्य के वरिष्ठ और सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी एम.के. राउत, कानून व्यवस्था और न्यायिक मामलों के विशेषज्ञ व वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सामाजिक और कानूनी विषयों की गहरी समझ रखने वाली वरिष्ठ सदस्य ज्योति रानी सिंह को शामिल किया गया है. यह पूरी टीम छत्तीसगढ़ की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नए कानून का मसौदा तैयार करेगी.
इन 5 मुख्य विषयों पर केंद्रित होगी जांच
यह उच्चस्तरीय समिति केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका कार्यक्षेत्र बेहद व्यापक और संवेदनशील है. देसाई समिति मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ में रह रहे विभिन्न समुदायों के पर्सनल लॉ और वर्तमान कानूनी व्यवस्थाओं का गहराई से अध्ययन करेगी. समिति के एजेंडे में मुख्य रूप से ये विषय शामिल रहेंगे.
- 1. विवाह : सभी धर्मों और वर्गों के लिए शादी की उम्र और पंजीकरण के नियम.
- 2. तलाक: अलग होने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया को सरल और एक समान बनाना.
- 3. भरण पोषण : तलाक या अलगाव के बाद पत्नी और बच्चों के गुजारा भत्ते का अधिकार.
- 4. उत्तराधिकार : पैतृक और अर्जित संपत्ति में सभी को समान हक दिलाना.
- 5. दत्तक ग्रहण : बच्चे को गोद लेने की कानूनी प्रक्रियाओं का सरलीकरण.
इन सभी मुद्दों पर आम जनता और सामाजिक संगठनों से सुझाव लिए जाएंगे. इस दौरान उत्तराखंड मॉडल का भी अध्ययन किया जाएगा. इसके बाद यूसीसी का जो ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, इस दौरान इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि नया कानूनी पूरी तरह से समावेशी हो, इसके लिए समिति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करेगी. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की टीम राज्य के आम नागरिकों, विभिन्न जनजातीय व सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और विधि विशेषज्ञों से खुलकर चर्चा करेगी और उनके महत्वपूर्ण सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित करेगी.
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इसके साथ ही, यह समिति उत्तराखंड समेत उन अन्य राज्यों की प्रणालियों और कानूनी व्यवस्थाओं का भी बारीकी से अध्ययन करेगी, जहां यूसीसी को लेकर पहले काम हो चुका है या कानून लागू किया जा चुका है. सभी पक्षों के विचारों और कानूनी पहलुओं को समाहित करने के बाद समिति समान नागरिक संहिता का अंतिम प्रारूप तैयार कर अपनी विस्तृत अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके बाद इसे विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश करने का रास्ता साफ होगा.
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