विज्ञापन

भारत सरकार ने क्यों बढ़ाया सोना-चांदी के आयात पर सीमा शुल्क, जानिए क्या है बड़ी वजह!

मोदी सरकार ने आर्थिक स्थिरता और विदेशी मुद्रा संरक्षण के लिए सोना, चांदी व प्लैटिनम आयात शुल्क बढ़ाकर 15 फीसदी किया है. यह गैर-आवश्यक आयात को नियंत्रित करने का कदम है.

भारत सरकार ने क्यों बढ़ाया सोना-चांदी के आयात पर सीमा शुल्क, जानिए क्या है बड़ी वजह!
नई दिल्‍ली:

Gold Silver Import Duty: सोना और चांदी के दाम आज रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहे हैं. ये उछाल मोदी सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद आया है. मोदी सरकार ने बुधवार से सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% और प्लैटिनम पर आयात शुल्क 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दिया गया है. भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में संकट की वजह से बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता की वजह से देश में आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने, विदेशी मुद्रा को संरक्षित करने और गैर-आवश्यक आयात को नियंत्रित करने के लिए सोना, सोना डोर (dore), चांदी, चांदी डोर (silver dore), प्लैटिनम सहित कीमती धातुओं के आयात पर सीमा शुल्क को बढ़ाने का फैसला किया है.

क्‍यों बढ़ाई गई सोना-चांदी पर इंर्पोट ड्यूटी?

वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया है, "वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति ने वैश्विक कच्चे तेल बाजारों और अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग मार्गों में काफी अस्थिरता पैदा कर दी है. भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है. ऐसे में बढ़ी हुई ऊर्जा उत्पादों की कीमतों से आयात बिल बढ़ सकता है, मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) पर दबाव और बढ़ सकता है. ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में देश के बाह्य क्षेत्र (external sector) का समझदारी से प्रबंधन करना बेहद ज़रूरी हो गया है. इतिहास में सीमा शुल्क में बदलाव आर्थिक स्थिरता बनाये रखने और वैश्विक अस्थिरता की अवधि के दौरान चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) से जुड़े दबावों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए किया जाता रहा है".

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम

मौजूदा परिस्थिति में मध्यपूर्व एशिया में संकट को देखते हुए भारत के पास मौजूद विदेशी मुद्रा संसाधनों (foreign exchange resources) का इस्तेमाल कच्चे तेल, उर्वरक, औद्योगिक कच्चा माल, रक्षा आवश्यकताओं, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और कैपिटल गुड्स जैसे आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए प्राथमिकता के तौर पर करना बेहद जरूरी है. क्योंकि ये आयात सीधे तौर पर देश में आर्थिक गतिविधि, खाद्य सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, निर्यात और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं. इसके विपरीत, सोना-चांदी, प्लैटिनम जैसे कीमती धातुओं का मुख्य रूप से उपयोग कंज़म्प्शन और इन्वेस्टमेंट के लिया किया जाता है. इनका आयात करने पर काफी ज़्यादा फॉरेन एक्सचेंज खर्च होता है.  

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, "कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क में वृद्धि का उद्देश्य देश में गैर-आवश्यक वस्तुओं के आयात की मांग को कम करना और एक्सटर्नल अकाउंट पर दबाव कम करना है. यह उपाय न तो निषेधात्मक (prohibitory) है और न ही उपभोक्ता विरोधी है. यह एक सावधानीपूर्वक लिया गया एक कैलिब्रेटेड हस्तक्षेप है जिसे ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में गैर-आवश्यक आयात में मॉडरेशन को प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है."

ये भी पढ़ें :- रॉकेट की रफ्तार से भागे सोना-चांदी, 19 हजार बढ़कर 3 लाख के करीब पहुंचा सिल्‍वर, जानिए गोल्‍ड कितना चढ़ा

दरअसल, ये फैसला प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल में दिए गए व्यापक राष्ट्रीय आर्थिक अनुशासन (national economic discipline) के सुझाव से सीधे जुड़ा हुआ है. पीएम मोदी ने दो दिन पहले ही नागरिकों से अपील किया था की वो गैर-जरूरी विदेशी व्यय को कम करने और ईंधन का संरक्षण करने में सक्रिय योगदान दें. सूत्रों के मुताबिक, कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क में अंतराष्ट्रीय हालात के अनुसार, बढ़ाया और घटाया जाता रहा है. इसका एक उदाहरण केंद्रीय बजट 2024-25 है, जिसमें सोने और चांदी पर सीमा शुल्क 15% से घटाकर 6% और प्लैटिनम पर 15.4% से घटाकर 6.4% करने का ऐलान किया गया था.

ये भी पढ़ें :- शेयर बाजार, सेंसेक्‍स-निफ्टी, क्रूड ऑयल और रुपया-डॉलर रेट... एक खबर में हर अपडेट

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com