HDFC Bank Crisis: गुरुवार एचडीएफसी बैंक की तरफ से ऐसी खबर निवेशकों को मिली, जिसके बाद स्टॉक मार्केट में धड़ाधड़ बैंक के शेयरों में बिकवाली का दौर शुरू हो गया. खबर थी एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का अचानक अपने पद से इस्तीफा देने की. उनके अनुसार बैंक के अंदर जो चीजें हो रही थीं, उससे वो सहमत नहीं थे. इसलिए उन्होंने ये पद छोड़ दिया.
उनके इस्तीफे के बाद बैंक के शेयरों में जबरदस्त गिरावट आई. बाजार बंद होने पर शेयर 5 फीसदी से ज्यादा गिर गया. स्थिति को संभालने के लिए आरबीआई को सामने आना पड़ा. रिजर्व बैंक ने केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बना दिया, जिससे बैंक में स्टेबिलिटी बनी रहे. चलिए इस खबर में आपको बताते हैं अतनु चक्रवर्ती कौन हैं, जिनके इस मामले ने एचडीएफसी बैंक की मार्केट वैल्यू करीब 61 हजार करोड़ रुपये कम कर दी.
कौन हैं अतनु चक्रवर्ती?
अतनु चक्रवर्ती ने एक एक्स बैंकर नहीं, बल्कि भारत के सबसे अनुभवी सरकारी अधिकारियों में से एक हैं. वो गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं और करीब 35 साल तक देश की आर्थिक नीतियों और बड़े सरकारी फैसलों को संभालते रहे हैं. अतनु चक्रवर्ती भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में अहम पदों पर रहे, जिसमें डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर और DIPAM के सचिव के तौर पर रहे. यहां उन्होंने देश की नीतियां बनाई. इसके अलावा यूनियन बजट तैयार करने में अहम भूमिका निभाई.
बीटेक के बाद यूके से एमबीए
एजुकेशन की बात करें तो गुजरात के रहने वाले अतनु चक्रवर्ती ने NIT कुरुक्षेत्र से बी.टेक इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में पूरी की. इसके बाद ICFAI, हैदराबाद से पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा बिजनेस फाइनेंस से किया. वहीं यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ हुल से एमबीए की पढ़ाई की.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व
उन्होंने विश्व बैंक के बोर्ड में भारत के अल्टरनेट गवर्नर के रूप में काम किया और आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के सदस्य भी रहे. वित्त मंत्रालय से पहले वे हाइड्रोकार्बन के डायरेक्टर जरनल रहे. साथ ही उन्होंने गुजरात राज्य की दो बड़ी संस्थाओं गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और और गुजरात समुद्री बोर्ड में सीईओ और एमडी के रूप में भी काम किया.
HDFC में योगदान
मई 2021 में जब चक्रवर्ती HDFC बैंक के चेयरमैन बने, तो उनकी लीडरशिप में बैंक ने HDFC Ltd. के साथ लगभग 40 अरब डॉलर का बड़ा मर्जर किया. उन्होंने अपने रेजिग्नेशन लेटर इस मर्जर को एक ऐतिहासिक कदम बताया, जिसके बाद बैंक भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन गया. अपने इस लेटर में उन्होंने जहां एक तरफ जूनियर और मिड-लेवल कर्मचारियों की तारीफ की, वहीं टॉप मैनेजमेंट की सोच पर सवाल उठाए हैं. यही वजह है कि उनके इस्तीफे के बाद बाजार में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं