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पश्चिम एशिया संकट: व्‍यापार और MSME पर असर की आशंका, CAIT की राहत उपाय करने और टास्क फोर्स बनाने की मांग

सांसद और CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आज एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्‍होंने कहा कि सरकार की ओर से उठाए कदमों ने देश में उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखा है, जिससे व्यापार जगत में विश्वास बना है. 

पश्चिम एशिया संकट: व्‍यापार और MSME पर असर की आशंका, CAIT की राहत उपाय करने और टास्क फोर्स बनाने की मांग
  • सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत के व्यापार और उद्योग पर प्रभाव को लेकर चिंता जताई है.
  • उन्होंने सरकार से छोटे व्यापारियों और MSME क्षेत्र के लिए समयबद्ध राहत और नीतिगत उपाय करने का आग्रह किया है.
  • CAIT अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि निर्यातकों को बढ़ी लागत और भुगतान अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है.

सांसद और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भारत के व्‍यापार और उद्योग पर संभावित प्रभाव के मद्देनजर चिंता जताई है. खासतौर पर छोटे व्यापारियों और एमएसएमई क्षेत्र के मद्देनजर उन्‍होंने सरकार से समय रहते आवश्यक राहत और नीतिगत उपाय करने का आग्रह किया है.

खंडेलवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आज एक पत्र भेजा है. जिसमें उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्रिय और निर्णायक नेतृत्व की सराहना की. साथ ही कहा कि उनकी सतत निगरानी और समयबद्ध हस्तक्षेप के कारण वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत और स्थिर बनी हुई है. उन्होंने कहा कि स्रोतों के विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स ढांचे के सुदृढ़ीकरण, संतुलित वित्तीय प्रबंधन और आवश्यक वस्तुओं की निरंतर निगरानी जैसे कदमों ने देश में उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखा है, जिससे व्यापार जगत में विश्वास बना है. 

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नकारात्‍मक असर की जताई आशंका 

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, आपूर्ति बाधाएं और लागत में बढ़ोतरी से कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इनमें प्रमुख रूप से पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, उर्वरक, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य ऊर्जा-आधारित उद्योग शामिल हैं.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि निर्यातकों को फ्रेट और बीमा लागत में वृद्धि, शिपमेंट में देरी, रूट परिवर्तन और भुगतान संबंधी अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी. 

भरतिया ने कहा कि व्यापार और उद्योग जगत में बढ़ती लागत, कार्यशील पूंजी पर दबाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, मुनाफे में कमी और ऋण भार में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता है, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र में. 

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टास्क फोर्स के गठन का सुझाव 

इन परिस्थितियों को देखते हुए दोनों ने सरकार से आग्रह किया है कि एमएसएमई और छोटे व्यापारियों को ऋण चुकाने में अतिरिक्त समय और राहत, प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी योजना, गंभीर रूप से प्रभावित उद्योगों के लिए ब्याज सब्सिडी, ईंधन और कच्चे माल की कीमतों की निरंतर निगरानी और स्थिरीकरण उपाय के साथ ही निर्यातकों के लिए फ्रेट, बीमा सहायता और शीघ्र रिफंड सुनिश्चित होना चाहिए, जिससे उनको व्यापार में असुविधा न हो. 

साथ ही उन्होंने एक 'वेस्ट एशिया इम्पैक्ट असेसमेंट एवं रिस्पॉन्स टास्क फोर्स' के गठन का भी सुझाव दिया, जिसमें संबंधित मंत्रालयों, आरबीआई, व्यापार संगठनों एवं विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, ताकि स्थिति का लगातार आकलन कर समय पर नीतिगत निर्णय लिए जा सकें. 

खंडेलवाल ने विश्वास जताया कि समय पर उठाए गए ठोस कदमों से भारत इस वैश्विक चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना करेगा और व्यापार एवं उद्योग की स्थिरता बनाए रखेगा. उन्होंने कहा कि समय पर उठाए गए कदम ही आर्थिक स्थिरता की गारंटी हैं. 

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