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ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध से आपके 'सपनों के घर' का क्या है कनेक्शन? सुस्ती का पूरा गणित समझ लीजिए

Dream Home amid Middle East Conflict: देश का रियल एस्टेट सेक्टर फिलहाल एक 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है. जहां दिल्ली-NCR अपनी सालाना 15% की ग्रोथ के साथ अभी भी चमक रहा है, वहीं बाकी शहरों के लिए पश्चिम एशिया का संकट एक चुनौती बनकर उभरा है. 

ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध से आपके 'सपनों के घर' का क्या है कनेक्शन? सुस्ती का पूरा गणित समझ लीजिए
Housing Prices and Sale in Jan-March 2026: घरों की कीमतें अपेक्षा से काफी कम बढ़ी हैं, लेकिन क्‍या ये घर खरीदने का सही समय है?

अगर आप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो रियल एस्टेट मार्केट से एक ऐसी खबर आई है जो आपको चौंका सकती है. पश्चिम एशिया (West Asia) यानी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की तपिश अब भारत के प्रॉपर्टी बाजार तक पहुंच गई है. एनारॉक (Anarock) की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में दिल्‍ली, मुंबई, बेंगलुरु समेत देश के टॉप 7 शहरों में घरों की कीमतों में औसतन 2% का मामूली ग्रोथ हुई है. 

ये उन लोगों के लिए राहत की बात हो सकती है जो आसमान छूती कीमतों से परेशान थे. हालांकि एक्‍पर्ट्स के मुताबिक, ऐसा भी नहीं है कि तुरंत घर खरीद लेने में ही समझदारी है. ये निर्भर करता है कि आपको अपनी जरूरत यानी किराये के मकान से मुक्ति पाने के लिए घर खरीदना है या फिर निवेश के लिहाज से. कीमतें उम्‍मीद या अपेक्षा से कम बढ़ने के पीछे की वजह वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों का डर हो सकता है.

युद्ध की परछाई: जानिए क्यों 'सुस्त' पड़ा रियल एस्टेट?

आमतौर पर भारतीय रियल एस्टेट को ग्लोबल झटकों से सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इस बार मामला अलग है. एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि ईरान युद्ध के अल्पकालिक झटके पहली तिमाही में साफ दिखाई दिए. इसके दो बड़े कारण सामने आए हैं. 

  • कन्ज्यूमर सेंटीमेंट: युद्ध की खबरों के बीच घरेलू खरीदार थोड़े सतर्क हो गए हैं. मार्च के महीने में अनिश्चितता इतनी बढ़ी कि लोगों ने बड़े निवेश के फैसले टाल दिए.
  • NRIs का 'पॉज' बटन: भारतीय रियल एस्टेट में मिडिल ईस्ट में रहने वाले भारतीयों (NRIs) का बड़ा निवेश होता है. युद्ध के बाद वहां रहने वाले खरीदारों ने फिलहाल अपनी खरीदारी रोक दी है, जिसका सीधा असर सेल्स वॉल्यूम पर पड़ा है.
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कहां ज्‍यादा बढ़ी कीमतें, कहां कम? 

दिल्ली-NCR और कोलकाता में फिर भी 3% की वृद्धि देखी गई है, जबकि मुंबई और चेन्नई जैसे महंगे बाजारों में कीमतें लगभग स्थिर (1%) बनी हुई हैं.

  • मुंबई (MMR): देश का सबसे महंगा बाजार ₹17,600 प्रति वर्ग फुट पर पहुंचा, मगर बढ़त महज 1% रही.
  • दिल्ली-NCR: यहां सालाना 15% की सबसे ऊंची छलांग लगी, मौजूदा औसत कीमत ₹9,620 प्रति वर्ग फुट है.
  • बेंगलुरु: टेक सिटी में 2% की तिमाही ग्रोथ दर्ज की गई, अब यहां दाम ₹9,310 प्रति वर्ग फुट तक पहुंचे.
  • पुणे: मिडिल क्लास के पसंदीदा बाजार में 2% की मामूली तेजी रही, औसत रेट ₹8,220 प्रति वर्ग फुट है.
  • हैदराबाद: यहां कीमतें ₹7,990 प्रति वर्ग फुट पर टिकी हैं, पिछली तिमाही के मुकाबले केवल 2% का इजाफा हुआ.
  • चेन्नई: सबसे शांत बाजार रहा, जहां मात्र 1% की बढ़त के साथ दाम ₹7,165 प्रति वर्ग फुट पर पहुंचे.
  • कोलकाता: यहां 3% की तिमाही ग्रोथ के साथ अच्छी रिकवरी दिखी, औसत भाव ₹6,290 प्रति वर्ग फुट रहा.

तो क्या यह 'बायर्स मार्केट' की वापसी है?

आंकड़े बताते हैं कि पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के मुकाबले जनवरी-मार्च 2026 में घरों की बिक्री में 7% की गिरावट आई है. बिक्री 1,08,970 यूनिट से गिरकर 1,01,675 यूनिट रह गई. कीमत यानी वैल्‍यू के आधार पर देखें तो कुल बिक्री मूल्य में भी 6% की कमी आई है.

2022 से 2024 के बीच हमने देखा कि कोरोना के बाद घर खरीदने की जो होड़ मची थी, उसने कीमतों को रॉकेट बना दिया था. लेकिन 2025 की शुरुआत से मांग सामान्य होने लगी और अब युद्ध जैसे बाहरी कारणों ने इस पर ब्रेक लगा दिया है.

यक्ष प्रश्‍न: क्या आपको अभी घर खरीदना चाहिए?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में यह सुस्ती एक 'करेक्शन फेज' नहीं, बल्कि 'कंसोलिडेशन' है. यानी कीमतें गिर नहीं रही हैं, बल्कि उनकी बढ़ने की रफ्तार धीमी हुई है. निवेशकों के लिए शॉर्ट-टर्म में अस्थिरता रह सकती है, इसलिए फूंक-फूंक कर कदम रखना सही होगा. 

वहीं दूसरी ओर एंड-यूजर यानी जिन्‍हें खुद के रहने के लिए घर लेना है तो उनके लिए फैक्‍ट ये है कि  इन्वेंट्री बढ़ रही है और बिल्डर्स पर बिक्री का दबाव है, ऐसे में अगर आपको मोलभाव (Negotiation) करना है, तो यह सही समय हो सकता है.    

फिलहाल देश का रियल एस्टेट सेक्टर फिलहाल एक 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है. जहां दिल्ली-NCR अपनी सालाना 15% की ग्रोथ के साथ अभी भी चमक रहा है, वहीं बाकी शहरों के लिए पश्चिम एशिया का संकट एक चुनौती बनकर उभरा है. 

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