उत्तर प्रदेश में नौकरीपेशा लोगों और लेबर के लिए बड़ी खुशखबरी है. राज्य सरकार चार नए लेबर कोड को लागू करने की तैयारी कर चुकी है. मिली जानकारी के अनुसार, अगले एक से दो हफ्तों में राज्य कैबिनेट इस नए मैनुअल को अपनी आखिरी मंजूरी दे सकती है. इस फैसले से यूपी के करोड़ों फॉर्मल और इनफॉर्मल सेक्टर के कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा. यूपी सरकार इन कोड के जरिए स्टेट में इज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाना चाहती है. साथ ही श्रमिकों को कानूनी अधिकार देना चाहती है.
क्या हैं ये नए लेबर कोड?
केंद्र सरकार ने देश के पुराने 29 लेबर लॉ को समेटकर चार आसान कोड में बदला है. इनमें सैलरी, इंडस्ट्रियल, सामाजिक सेफ्टी और कमर्शियल सेफ्टी, हेल्थ और वर्किंग कंडीशन कोड शामिल हैं. इनके चारो कोड के जरिए लेबर जस्टिस को डिजिटल, क्लियर और आसान बनाना है.
कर्मचारियों को कैसे मिलेगा बंपर फायदा?
तमाम समस्या और इनके सामाधान के बाद, यूपी सरकार जो नियमावली ला रही है, वो कर्मचारियों के लिए सौगातों से भरी है:
- अब तक ग्रेच्युटी के लिए किसी कंपनी में लगातार 5 साल काम करना जरूरी था. लेकिन नए नियमों में फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को केवल 1 साल की सर्विस पर ही ग्रेच्युटी का हक मिलेगा
- अगर कर्मचारी तय 8 घंटे से ज्यादा काम करते हैं, तो कंपनी को उन्हें नॉर्मल के अलग दुगने रेट पर ओवरटाइम का पेमेंट करना होगा.
- जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर जैसी कंपनियों के डिलीवरी पार्टनर्स और फ्रीलांसरों को पहली बार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाकर बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएं दी मिलेंगी
- महिलाएं अब अपनी मर्जी से नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी, बशर्ते कंपनी उनकी सुफ्टी के इंतजाम करे. इसके अलावा, एक जैसे काम के लिए महिलाओं को पुरुषों के बराबर सेलरी मिलेगी.
- सैलरी स्ट्रक्चर के नए नियम में टोटल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक सैलरी होगा, जिससे पीएफ में ज्यादा पैसा जमा होगा, जिससे रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी आराम से कट सकेगी.
- इसके साथ ही एनुअल हेल्थ चेकअप के जरिए 40 साल से ज्यादा उम्र के श्रमिकों के लिए हर साल मुफ्त मेडिकल चेकअप जरूरी होगा.
- साथ ही वर्क प्लेस पर दुर्घटना या मृत्यु होने की स्थिति में कंपनियों पर लगे जुर्माने की मिनिमम 50% अमाउंट सीधे पीड़ित परिवार को दी जाएगी.
कितने घंटे से ज्यादा ओवरटाइम नहीं करा सकती कंपनी?
सरकार ने कर्मचारियों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ओवरटाइम की सीमा भी तय की है.
- किसी भी कर्मचारी से बिना ओवरटाइम के हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता.
- इसके अलावा ओवरटाइम मिलाकर भी एक दिन में कुल काम की अवधि 12 घंटे से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
- वहीं एक तिमाही यानी 3 महीने में अधिकतम 125 से 144 घंटे तक ही ओवरटाइम कराया जा सकेगा.
नौकरी छोड़ने पर जल्दी मिलेगा पैसा
नए लेबर कोड में कर्मचारियों को एक और बड़ी राहत दी गई है. अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, इस्तीफा देता है या उसे कंपनी निकालती है, तो कंपनी को उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (Full And Final Settlement Rule) 2 वर्किंग डेज के अंदर करना होगा. इसमें ओवरटाइम के बकाया पैसे भी शामिल होंगे.
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