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GST कट का असर: 24% की तूफानी रफ्तार से दौड़ेगा ऑटो सेक्टर, Crisil की रिपोर्ट में बड़ी खुशखबरी!

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर 22 से 24% की शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज करने के लिए तैयार है.

GST कट का असर: 24% की तूफानी रफ्तार से दौड़ेगा ऑटो सेक्टर, Crisil की रिपोर्ट में बड़ी खुशखबरी!
क्रिसिल के अनुसार वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ऑटो सेक्टर में शानदार तेजी देखने को मिलेगी.
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भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए बहुत पॉजिटिव खबर आई है.  रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ऑटो सेक्टर 22 से 24 फीसदी की धमाकेदार रेवेन्यू ग्रोथ हासिल कर सकता है. इस शानदार परफॉर्मेंस के साथ ऑटो सेक्टर देश की ओवरऑल कॉर्पोरेट ग्रोथ को लीड करने वाले सबसे बड़े सेक्टर्स में से एक बना है.

कॉर्पोरेट रेवेन्यू में 2 साल की तेज ग्रोथ

क्रिसिल रिपोर्ट से पता चलता है कि 30 जून 2026 को खत्म हुए इस तिमाही में भारत का टोटल कॉर्पोरेट रेवेन्यू सालाना आधार पर 11 से 11.5% की दर से बढ़ा है. ये पिछले 2 सालों में सबसे तेज स्पीड है. खास बात ये है कि बढ़त तब देखने को मिली है जब दुनिया मिडिल ईस्ट के टेंशन और सप्लाई चेन की समस्याओं से जूझ रही है. इससे पहले की तिमाही में कॉर्पोरेट ग्रोथ 9.6% रही थी.

GST में मिली छूट ने डिमांड को बूस्ट

ऑटो सेक्टर की इस तेजी की वजह क्या है? क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि जीएसटी रेट में 8 से 13% की कटौती ने बाजार में जान फूंक दी है. टैक्स कम होने से गाड़ियों की डिमांड में जबरदस्त उछाल आया, जिसने वॉल्यूम-बेस्ड ग्रोथ को बढ़ा दिया. साथ ही पैसेंजर व्हीकल, टू-व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल की दमदार लोकल सेल, कम प्राइस हाइक और शानदार एक्सपोर्ट ने इस ग्रोथ को रफ्तार दी.

सप्लाई चेन और इनपुट कॉस्ट की चुनौती

हालांकि, ये सफर पूरी तरह आसान नहीं रहा. मिडिल ईस्ट में चल रहे टेंशन की वजह से इनपुट कॉस्ट बढ़ी है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर प्रेशर देखने को मिला. लेकिन राहत की बात ये रही कि कंपनियों के पास इन्वेंट्री बफर स्टॉक मौजूद है, जिसकी वजह से पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में इस झटके को संभाल लिया, इसलिए अभी की तिमाही में प्रोडक्शन पर बड़ा असर नहीं पड़ा. 

ऑटो के अलावा दूसरे सेक्टर्स में भी रही रौनक

क्रिसिल ने बताया, ऑटोमोबाइल के साथ व्हाइट गुड्स यानी एसी, फ्रीज को भी जीएसटी रेशनलाइजेशन का फायदा मिला. वहीं, गर्मी की वजह से पावर सेक्टर को बिजली की पीक डिमांड से सपोर्ट मिला, जबकि टेलीकॉम सेक्टर को प्रीमियम सर्विसेज और डेटा मोनेटाइजेशन की वजह से तगड़ा बूस्ट मिला है. यानी बोल सकते हैं कि चुनौतियों के बाद भी देश के ऑटो सेक्टर ने साबित कर दिया कि वो देश की अर्थव्यवस्था का असली पावरहाउस है.

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