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नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के नाम पर नहीं होगा फर्जीवाड़े का खेल, यूपी सरकार लगा रही डिजिटल नकेल

सब-रजिस्ट्रार के पास यह अधिकार होगा कि यदि मालिकाना हक, पहचान, दाखिल-खारिज (Mutation) या ट्रांसफर राइट्स से जुड़े पुख्ता दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो वह रजिस्ट्री करने से मना कर सकता है.

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के नाम पर नहीं होगा फर्जीवाड़े का खेल, यूपी सरकार लगा रही डिजिटल नकेल
Property Registry Rules in Uttar Pradesh: यूपी में प्रॉपर्टी रजिस्‍ट्रेशन के नियम बदले

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे इलाकों में घर या जमीन खरीदने का सपना देखने वालों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक क्रांतिकारी बदलाव किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश में जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री की प्रक्रिया न केवल पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगी, बल्कि फर्जीवाड़े की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी.

आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर ये नए नियम क्या हैं और इनका आपकी जेब और सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा.

सॉफ्टवेयर पकड़ लेगा फ्रॉड, खतौनी से लिंक होगा सिस्टम

अब तक रजिस्ट्री के समय मुख्य रूप से खरीदार और विक्रेता के पहचान पत्र (आधार या वोटर आईडी) ही देखे जाते थे. लेकिन अब सिस्टम पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट होने जा रहा है.

  1. डिजिटल मिलान: अब निबंधन कार्यालय (रजिस्ट्री ऑफिस) का सॉफ्टवेयर सीधे राजस्व विभाग के 'भूलेख' पोर्टल से जुड़ जाएगा.
  2. ऑटो-चेक: जैसे ही कोई व्यक्ति जमीन बेचने पहुंचेगा, सॉफ्टवेयर खुद चेक करेगा कि विक्रेता का नाम सरकारी रिकॉर्ड यानी 'खतौनी' में दर्ज है या नहीं.
  3. नो एंट्री: अगर नाम मैच नहीं हुआ या मालिकाना हक को लेकर कोई संशय हुआ, तो सॉफ्टवेयर रजिस्ट्री की अनुमति ही नहीं देगा. यानी, अब कोई दूसरा व्यक्ति आपकी जमीन किसी और को नहीं बेच पाएगा.
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रजिस्ट्री रिफ्युजल: सब-रजिस्ट्रार के हाथ में नई पावर 

सरकार ने एक्ट में नई धाराएं 22-A, 22-B और 35-A जोड़ी हैं. स्टांप और पंजीयन राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल के अनुसार, अब सब-रजिस्ट्रार के पास यह अधिकार होगा कि यदि मालिकाना हक, पहचान, दाखिल-खारिज (Mutation) या ट्रांसफर राइट्स से जुड़े पुख्ता दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो वह रजिस्ट्री करने से मना कर सकता है. यह कदम उन मामलों को रोकने के लिए उठाया गया है जहां प्रतिबंधित, विवादित या सरकारी संपत्तियों को अवैध रूप से बेच दिया जाता था.

शहरी क्षेत्रों में घर खरीदना होगा थोड़ा महंगा

इस पारदर्शिता के साथ एक आर्थिक बदलाव भी आया है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसे विकास प्राधिकरण और नगर निगम क्षेत्रों में अब संपत्ति खरीदना महंगा हो जाएगा.अब सर्किल रेट के आधार पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त विकास शुल्क (स्टांप ड्यूटी के रूप में) देना होगा.

पहले यह राशि लंबी प्रक्रियाओं के बाद स्थानीय निकायों को मिलती थी, लेकिन अब इसे हर छह महीने के आधार पर जारी किया जाएगा. इससे स्थानीय निकायों के पास फंड की कमी नहीं होगी और शहरी विकास के काम तेजी से हो सकेंगे.

आम जनता को क्या होगा फायदा?

उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला 'आम आदमी की सुरक्षा' की दिशा में बड़ा कदम है.

  • मुकदमों से मुक्ति: जमीन के असली मालिक की पहचान पहले ही हो जाने से भविष्य में होने वाले कानूनी विवाद और कोर्ट-कचहरी के चक्कर खत्म होंगे.
  • सुरक्षित निवेश: अब खरीदार निश्चिंत हो सकेंगे कि वे जो संपत्ति खरीद रहे हैं, उसका 'लीगल स्टेटस' पूरी तरह स्पष्ट है.
  • सरकारी जमीन की सुरक्षा: भू-माफिया अब सरकारी या ग्राम समाज की जमीनों को धोखाधड़ी से नहीं बेच पाएंगे.

यूपी सरकार की यह 'डिजिटल नकेल' उन लोगों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है जो अपनी मेहनत की कमाई प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं. वहीं दूसरी ओर नगर निगम क्षेत्र में 2% अतिरिक्त शुल्क के फैसले से शुरुआती बोझ जरूर बढ़ेगा, लेकिन भविष्य की सुरक्षा और विवाद मुक्त संपत्ति के लिहाज से यह एक छोटा सौदा है.

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