- विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में जंग के बीच कहा कि ईरान में भारतीयों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है
- प्रवक्ता ने बताया कि ईरान में लगभग 9 हजार भारतीय छात्र हैं, जिन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है
- विदेश मंत्रालय ने खाड़ी में फंसे भारतीयों की मदद के लिए 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम भी बनाया है
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के बीच ईरान में मौजूद अपने नागरिकों खासकर छात्रों की सुरक्षा को लेकर बुधवार को बड़ा अपडेट दिया. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पेशल कंट्रोल रूम बनाए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय डायस्पोरा की सुरक्षा और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. प्रवक्ता ने युद्ध में अब तक मारे गए और घायल हुए भारतीयों को लेकर भी अपडेट दिया.
जायसवाल ने कहा कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं. इनकी संख्या करीब 1 करोड़ है. ईरान में ही लगभग 9 हजार स्टूडेंट्स हैं. हमने कई लोगों को असुरक्षित इलाकों से दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया है. हालात को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया है, जो 24 घंटे काम कर रहा है. यह प्रभावित देशों में मौजूद भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के साथ समन्वय कर रहा है. कल कंट्रोल रूम में 75 कॉल और 11 मेल आई थीं.
📡LIVE NOW📡
— PIB India (@PIB_India) March 11, 2026
Inter-Ministerial Briefing on Recent Developments in #WestAsia
📍National Media Centre, New Delhi
Watch on #PIB's📺
➡️Facebook: https://t.co/ykJcYlMTtL
➡️YouTube: https://t.co/WWr5l0L6Yihttps://t.co/9Cbp0aHF8C
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में अब तक दो भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है. एक भारतीय नागरिक लापता है. ये लोग उन व्यापारिक जहाजों पर सवार थे, जिन्हें समुद्र में निशाना बनाया गया. उन्होंने बताया कि गल्फ रीजन में कुछ और भारतीय घायल हुए हैं. इनमें से एक व्यक्ति इजरायल में और दूसरा दुबई में जख्मी हुआ है. विदेश मंत्रालय इन सभी के परिवारों के साथ निरंतर संपर्क में है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों की भी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और इजरायल के नेताओं से बातचीत की है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी ईरान सहित अन्य क्षेत्रीय देशों के अपने समकक्षों के साथ नियमित बातचीत कर रहे हैं. आज भी उन्होंने कई नेताओं से बातचीत की है.
ये भी देखें- पश्चिम एशिया युद्ध में आगे क्या होगा, 4 संभावनाओं से समझें; भारत पर कितना असर?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं