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यह मानवीय गरिमा की जीत है... इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़

पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति देने के फैसले को मानवीय गरिमा की जीत बताया है. उन्होंने कहा कि यह पीड़ित परिवार के दर्द को खत्म करने वाला एक संवेदनशील कदम है.

यह मानवीय गरिमा की जीत है... इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़
  • पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु पर हालिया संवेदनशील फैसले का स्वागत किया है
  • जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस फैसले को संविधान की शक्ति और पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने वाला बताया है
  • उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बुजुर्ग माता-पिता के लिए अंतिम राहत की तरह है
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पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए हालिया संवेदनशील फैसले का पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने स्वागत किया है. NDTV के साथ बातचीत में जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस फैसले को भारतीय न्यायपालिका के मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण बताया.

संविधान की शक्ति और 'पूर्ण न्याय'

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यह फैसला संविधान के उस प्रावधान का सटीक उपयोग है जिसके जरिए अदालत पूर्ण न्याय सुनिश्चित होता है. चंद्रचूड़ भी 2018 में इच्छामृत्यु पर ऐतिहासिक दिशानिर्देश देने वाली संविधान पीठ का हिस्सा रहे थे. उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संवेदनशील और करुणामय तरीके से संवैधानिक शक्ति का उपयोग है. यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप मानवीय गरिमा के अर्थ को और अधिक विस्तार देता है.'

बुजुर्ग माता-पिता को बड़ी राहत

पूर्व CJI ने उस विशेष मामले का जिक्र किया जिसमें एक 32 साल के शख्स दशकों से स्थायी वेजिटेटिव स्टेट (PVS) में है. उन्होंने कहा कि उसके बुजुर्ग माता-पिता, जो वर्षों से उसकी देखभाल कर रहे हैं, उनके लिए यह निर्णय किसी अंतिम राहत से कम नहीं है. यह आदेश न केवल मरीज बल्कि उस परिवार के दर्द को भी समझता है जो लंबे समय से इस त्रासदी को झेल रहा है.

'भारत के लोगों की अदालत'

जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के 'कॉमन कॉज' फैसले की पुष्टि करके यह फिर से स्थापित कर दिया है कि यह वास्तव में भारत के लोगों की अदालत है.

बता दें कि पूर्व सीजेआई का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद आया है, जिसमें कोर्ट ने हरीश राणा नाम के शख्स को इच्छामृत्यु की अनुमति दी है. हरीश राणा 2013 में एक दुर्घटना का शिकार हुए थे, जिसके बाद वे स्थायी वेजिटेटिव स्टेट (PVS) में चले गए. पिछले कई सालों से वे कृत्रिम सहायता जैसे फीडिंग ट्यूब पर निर्भर थे. उनके माता-पिता ने उनके लगातार कष्ट को देखते हुए और इलाज के भारी खर्च के कारण अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी. कोर्ट ने डॉक्टरों की रिपोर्ट और कानूनी दिशानिर्देशों के आधार पर पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी.

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