TV-Fridge-AC Prices Hike: अगर आप इस गर्मी अपने घर के लिए नया टीवी, फ्रिज या एसी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी जेब थोड़ी और ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए. भारतीय बाजार में एंट्री-लेवल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतें उस स्तर पर पहुंच गई हैं, जो पिछले 6-8 सालों में नहीं देखी गई थीं. GST सुधारों के बाद लोगों को काफी हद तक राहत मिली थी, लेकिन सामान सस्ता होने का दौर अब उल्टा घूम चुका है. कंपनियों की लागत बढ़ने का बोझ हम ग्राहकों पर पड़ता दिख रहा है. कंपनियों का कहना है कि अब तक वे बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठा रही थीं, लेकिन अब इसे उपभोक्ताओं पर डालना उनकी मजबूरी बन गई है.
8,500 वाला टीवी अब 10 हजार का!
टेलीविजन के बाजार में कीमतों में 5% से 10% तक का उछाल आया है. जो 32-इंच का स्मार्ट टीवी पिछले साल तक 6,500 से 7,000 रुपये में मिल जाता था, उसकी कीमत अब 7,200 से 8,500 रुपये तक हो गई हैं. जानकारों का मानना है कि मई महीने तक कीमतें और बढ़ सकती हैं और इसी रेंज के टीवी की कीमत 10,000 रुपये तक भी पहुंच सकती है. ये कीमत ठीक वैसी ही है जैसी ग्राहक साल 2017-18 में इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के सस्ते होने से पहले तक चुकाते थे.
फ्रिज और अन्य अप्लायंसेज पर भी महंगाई की मार
केवल टीवी ही नहीं, रेफ्रिजरेटर की कीमतों में भी 3% से 8% की वृद्धि हुई है. गोदरेज एंटरप्राइजेज के अप्लायंसेज बिजनेस हेड कमल नंदी के अनुसार, कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं. चिंता इस बात की है कि अगर भीषण गर्मी ने बिक्री को सहारा नहीं दिया, तो एंट्री-सेगमेंट (सस्ते मॉडलों) की मांग काफी कमजोर पड़ सकती है.
पहले ही बढ़ चकी हैं AC की कीमतें
गर्मी शुरू होने से पहले ही दिग्गज कंपनियों जैसे Daikin, Voltas, Blue Star, LG, और Haier ने अपनी कीमतों में 5% से 15% तक की बढ़ोतरी का फैसला किया है. डायकिन इंडिया (Daikin India) ने अप्रैल से ही AC की कीमतें 12% तक बढ़ाने के फैसले के बारे में बताया था. वहीं इससे पहले ब्लू स्टार (Blue Star) 8-10% बढ़ोतरी शुरू कर चुकी थी, जबकि Voltas (TATA) ने भी मॉडलों के आधार पर कीमतें 5-15% बढ़ाने का फैसला लिया था.
कीमतें बढ़ने के 4 बड़े कारण
- पश्चिम एशिया में तनाव: खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण माल ढुलाई (Freight) और तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर अंतिम उत्पाद की कीमत पर पड़ रहा है.
- ऊर्जा दक्षता मानक (BEE Ratings): ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) ने स्टार रेटिंग के नियम कड़े कर दिए हैं. अब पिछले साल का '5-स्टार' मॉडल केवल '4-स्टार' माना जा रहा है. नए 5-स्टार उत्पाद बनाने के लिए कंपनियों को महंगे और अधिक कुशल कंपोनेंट्स का उपयोग करना पड़ रहा है.
- इनपुट लागत में वृद्धि: मेमोरी चिप्स, तांबा (Copper), स्टील और एल्युमीनियम जैसी कच्ची सामग्रियों की वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है. टीवी की लागत विशेष रूप से 'मेमोरी कॉस्ट इन्फ्लेशन' की वजह से बढ़ी है.
- रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरने से विदेशों से मंगाए जाने वाले कंप्रेसर और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) जैसे पार्ट्स काफी महंगे हो गए हैं.
कंपनियों का कहना है कि अब तक वे बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल रही थीं, लेकिन अब ऐसा करना उनकी मजबूरी बन गई है. भीषण गर्मी के पूर्वानुमान को देखते हुए कंपनियों को उम्मीद है कि कीमतों में वृद्धि के बावजूद इस साल बिक्री में 15% की ग्रोथ देखी जाएगी.
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