Diesel Price Hike Impact: ईरान-अमेरिका में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर देश में पेट्रोल-डीजल के दाम पर भी दिख रहा है. बीते 11 दिन में 4 बार पेट्रोल-डीजल और CNG के दाम बढ़ाए जा चुके हैं. इनमें डीजल की खपत करने वालों में ट्रांसपोर्टर्स एक बड़ा वर्ग है. डीजल के दाम बढ़ने से वे काफी प्रभाावित हुए हैं और राहत के लिए सरकार से टोल टैक्स माफ किए जाने की मांग कर रहे हैं. ट्रांसपोर्टर्स की मांग है कि जिस तरह कोविड के समय कुछ हफ्तों के लिए टोल टैक्स कलेक्शन पर ब्रेक लगा दिया गया था, उसी तरह की राहत दी जाए. NDTV से बातचीत में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने कहा है कि डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोत्तरी का देशभर में ट्रांसपोर्ट बिजनेस पर बुरा असर पड़ रहा है, और इससे ट्रांसपोर्टरों को राहत देने के लिए कुछ समय के लिए भारत सरकार को टोल टैक्स माफ करने पर विचार करना चाहिए.
NDTV से क्या बोले एसोसिएशन के अध्यक्ष?
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (All India Motor Transport Congress) के अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने NDTV से बातचीत में कहा, 'कोरोना संकट के दौरान केंद्र सरकार ने कुछ हफ्तों के लिए टोल कलेक्शन को रोक दिया था. अब जबकि मध्यपूर्व एशिया में गंभीर संकट जारी है और सरकार ने कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों को देखते हुए डीजल की कीमत 7.53 रुपये/लीटर से ज्यादा बढ़ चुकी है. इन परिस्थितियों में भाड़ा तो बढ़ा नहीं है. इसलिए सरकार को टोल टैक्स माफ कर देना चाहिए.'

डीजल महंगा हुआ, 8% महंगा हो गया ट्रांसपोर्ट कॉस्ट
बीते 11 दिन में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 प्रति लीटर से बढ़कर 102.12 प्रति लीटर पहुंच गई है. यानी 7.35 रुपये प्रति लीटर (7.75%) की बढ़ोतरी, जबकि इस दौरान दिल्ली में डीजल की कीमत 87.67 रुपये/लीटर से बढ़कर 95.20/लीटर हो गयी, यानि 7.53 रुपये/लीटर (8.58 %) की बढ़ोतरी.
- 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमत दिल्ली में 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी.
- इसके चार दिन बाद 19 मई को पेट्रोल की कीमत 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई गई.
- चार दिन बाद 23 मई को पेट्रोल की कीमत 87 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई गई और डीजल भी 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया.
- फिर दो दिन बाद ही 25 मई को पेट्रोल की कीमत 2.61 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई गई और डीजल भी 2.71 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया.
तेल कंपनियों को भी आड़े हाथों लिया
हरीश सभरवाल कहते हैं, 'पिछले चार साल के दौरान जब भी कच्चा तेल अंतररष्ट्रीय बाजार में सस्ता हुआ, सरकारी तेल कंपनियों ने देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं कम की, बल्कि मुनाफा कमाया. अब जब मध्यपूर्व एशिया में संकट की वजह से कच्चा तेल काफी महंगा हो गया, सरकारी तेल कंपनियों ने डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का काफी बोझ ट्रांसपोर्टरों पर डाल दिया है, जिसका उनके बिजनेस पर बुरा असर पड़ रहा है.
दरअसल पिछले 12 दिनों से सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार में कीमतों में हो रही बढ़ोत्तरी का कुछ बोझ आम उपभोक्ताओं पर सीधे डालने का फैसला किया है. इस फैसले को चरणबद्ध तरीके (Incremental increase) से लागू करने की रणनीति के तहत सोमवार को 11 दिनों में चौथी बार पेट्रोल, डीजल की कीमतें बढ़ाई गई हैं.
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