टाटा ग्रुप में लीडरशिप में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा 12 नवंबर को 70 साल के हो जाएंगे. इसी के साथ वो टाटा ग्रुप की 6 प्रमुख कंपनियों के बोर्ड से हट जाएंगे. इसके पीछे की वजह है- ग्रुप की रिटायरमेंट पॉलिसी, जिसके मुताबिक गैर-कार्यकारी और गैर-स्वतंत्र निदेशकों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 70 साल तय है.
हालांकि, इन कंपनियों के बोर्ड से हटने के बाद भी नोएल टाटा की टाटा ग्रुप के कामकाज और गवर्नेंस में अहम भूमिका बनी रहेगी. वो टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर बने रहेंगे. टाटा ट्रस्ट्स की टाटा सन्स में करीब 66% हिस्सेदारी है.
किन कंपनियों के बोर्ड से हटेंगे नोएल टाटा?
नोएल टाटा टाटा ग्रुप की कई कंपनियों में अहम पदों पर हैं.
वो ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा इंटरनेशनल जैसी कंपनियों में गैर-कार्यकारी चेयरमैन की भूमिका निभाते हैं.
इसके अलावा, वो टाटा स्टील और टाइटन कंपनी में वाइस-चेयरमैन भी हैं.
70 साल की उम्र पूरी होने पर इन कंपनियों के बोर्ड में उनकी भूमिका में बदलाव होगा. हालांकि, उनकी जगह कौन लेगा और संबंधित कंपनियों में नेतृत्व की जिम्मेदारी किसे मिलेगी, इस बारे में औपचारिक घोषणाएं अभी नहीं हुई हैं.
टाटा सन्स के बोर्ड में बने रहेंगे
ऑपरेटिंग कंपनियों के बोर्ड से हटने के बावजूद नोएल टाटा टाटा सन्स के बोर्ड में बने रहेंगे. वो यहां टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर अपनी भूमिका जारी रखेंगे.
टाटा सन्स, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है. टाटा ट्रस्ट्स की इसमें करीब 66% हिस्सेदारी है. ऐसे में टाटा सन्स के बोर्ड में नोएल टाटा की मौजूदगी ग्रुप के गवर्नेंस और अहम फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण बनी रहेगी.
नोएल टाटा ट्रेंट हाइपरमार्केट लिमिटेड में भी अपनी भूमिका जारी रखेंगे. ये ट्रेंट और ब्रिटेन की कंपनी टेस्को का ज्वाइंट वेंचर है, जो स्टार बाजार और स्टार डेली रिटेल चेन का संचालन करता है.
टाटा ग्रुप में क्यों अहम है ये बदलाव?
नोएल टाटा का छह कंपनियों के बोर्ड से हटना ऐसे समय हो रहा है, जब टाटा ग्रुप में गवर्नेंस, बोर्ड नियुक्तियों और टाटा सन्स के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं.
टाटा ग्रुप में निदेशकों की रिटायरमेंट की उम्र तय है. गैर-कार्यकारी और गैर-स्वतंत्र निदेशकों के लिए ये सीमा 70 साल है, जबकि कार्यकारी निदेशकों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 साल है.
कॉरपोरेट गवर्नेंस के जानकार आम तौर पर ऐसी नीतियों का पालन संस्थागत अनुशासन के तौर पर देखते हैं. बड़े कारोबारी समूहों में इन नियमों का महत्व और बढ़ जाता है, जहां बोर्ड में नियुक्तियां और नेतृत्व से जुड़े फैसले पूरे समूह की दिशा पर असर डाल सकते हैं.
अब किन पदों पर नए चेहरों की होगी नियुक्ति?
नोएल टाटा के हटने के बाद ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इंटरनेशनल और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों में नेतृत्व से जुड़े बदलाव की जरूरत होगी. वहीं, टाटा स्टील और टाइटन कंपनी में वाइस-चेयरमैन पदों पर भी आगे की नियुक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है.
फिलहाल, इन पदों के लिए उत्तराधिकार योजना या नए नामों की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है. इसलिए आने वाले दिनों में टाटा ग्रुप की कंपनियों के बोर्ड और नेतृत्व से जुड़े फैसलों पर बाजार और कारोबारी जगत की नजर रहेगी.
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