चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच इंडस्ट्री बॉडी ISMA का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. ISMA यानी इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के मुताबिक देश में पर्याप्त चीनी है. ISMA के प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर के मुताबिक, चीनी की कीमतें मुख्य रूप से 2 वजहों से बढ़ी हैं. उन्होंने पहली वजह- जमाखोरी के लिए स्टॉक करने और दूसरी वजह- मौसम की वजह से कम उत्पादन को बताया.
उन्होंने कहा, 'कीमत बढ़ने की उम्मीद में भंडारण करना और मौसम संबंधी कारणों से कम उत्पादन होने के चलते चीनी के दाम बढ़े हैं. इंडस्ट्री बॉडी ISMA का कहना है कि उसे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में चीनी की खुदरा कीमतें कम हो जाएंगी.
सरकार के कदम पर ISMA ने क्या कहा?
चीनी की बढ़ती कीमतों पर, इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर कहते हैं, 'सरकार ने पिछले 4 से 6 हफ़्तों में कुछ बहुत अच्छे कदम उठाए हैं. उन्होंने चीनी मिलों में स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन की है. उन्होंने ट्रेडिंग कम्युनिटी पर भी लिमिट लगाई है. उन्होंने इंस्टीट्यूशनल बायर्स और बल्क कंज्यूमर्स पर भी लिमिट लगाई है.'
#WATCH | Delhi: On the rise in sugar prices, Niraj Shirgaokar, President of the Indian Sugar Mills Association (ISMA), says, "The government has already taken some very good steps in the last 4 to 6 weeks. They have done physical verification of stocks in the sugar mills. They… pic.twitter.com/5eqJsrrXHD
— ANI (@ANI) August 24, 2026
उन्होंने कहा, 'हम कुछ और सख्ती वाले कदम भी देख रहे हैं. चीनी का इंपोर्ट एक और अहम कदम है जिसका ऐलान किया गया है. चीनी की कोई कमी नहीं है. चीनी उपलब्ध है, जैसा कि हमने अपने आंकड़ों में दिखाया है, और हमें यह पक्का करना है कि ये कदम निश्चित रूप से त्योहारों के मौसम और नए शुगर क्रशिंग सीज़न में आसानी से बदलाव लाने में मदद करेंगे.'

'होल्डिंग लिमिट 400 टन से घटाकर 200 टन की जाए'
वे यह भी कहते हैं, 'हमने सरकार से ट्रेडर्स के लिए होल्डिंग लिमिट को 400 टन से घटाकर 200 टन करने के लिए कहा है ताकि बाज़ार में ज़्यादा चीनी आए और फिर कंज्यूमर को त्योहारों के दौरान कीमतों में असल सुधार दिखे.' चीनी के इंपोर्ट पर वे कहते हैं, 'चीनी का इंपोर्ट सुरक्षा का एक उपाय है. हमारे पास 70-80 लाख टन का स्टॉक नहीं है. हमारे पास 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक है, जो नवंबर में जाने के लिए एक आरामदायक संख्या है. सरकार को लगता है कि 8 या 10 लाख टन का यह आंकड़ा कंज्यूमर के लिए स्थिति को पूरी तरह आरामदायक बना देगा.'
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