Sugar Imports to India: त्योहारों से पहले महंगी चीनी को लेकर परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है.देश में चीनी के बढ़ते दामों पर ब्रेक लगाने के लिए सरकार ने बीते दिन 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी दी है. इस फैसले के बाद विदेशी चीनी की पहली खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती है. को-ऑपरेटिव शुगर मिलों की संस्था NFCSF के प्रमुख प्रकाश नाइकनवारे ने कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि इस तारीख तक कुल कितनी चीनी देश में पहुंचेगी.
त्योहारों से पहले चीनी आयात की क्यों पड़ी जरूरत?
बीते एक महीने में देश के भीतर चीनी के दाम करीब 24% तक उछल चुके हैं. खुदरा दुकानों पर जो चीनी 40-45 रुपये बिकती थी, उसके भाव 56 से 60 रुपये और कई शहरों में तो 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए. इसी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए और एक्स्ट्रा स्टॉक जमा करने के लिए खरीदारों ने फटाफट ऑर्डर देने शुरू कर दिए,ताकि त्योहारों में मांग बढ़ने से पहले भारत में चीनी का एक्स्ट्रा स्टॉक पहुंच सके.
ब्राजील से आएगी चीनी, पहुंचने में लगेंगे 40 से 45 दिन
नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनवारे के मुताबिक भारत के लिए ब्राजील ही चीनी आयात का सबसे बेहतर जरिया है. थाईलैंड भी पहले भारत को चीनी सप्लाई करने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है, लेकिन वहां फिलहाल खुद चीनी का संकट है. उन्होंने बताया कि ब्राजील से भारत तक चीनी की खेप पहुंचने में आमतौर पर 40 से 45 दिन लग जाते हैं. इसके बाद पोर्ट्स से चीनी को शुगर मिलों तक पहुंचाने में भी कुछ समय लगता है.
ऐसे में 15 अक्टूबर तक कितनी चीनी भारत पहुंचेगी, इसका अभी सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है. हालांकि, भले ही पूरी 10 लाख टन चीनी न आ पाए, लेकिन कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले जरूर पहुंच जाएगी.
इन राज्यों में पहले पहुंच सकती है चीनी
पोर्ट्स के पास होने की वजह से समुद्र किनारे बसे राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश में इंपोर्टेड चीनी सबसे पहले पहुंचेगी. इसके बाद सड़क और ट्रेन के जरिए उत्तर भारत के बाकी राज्यों में सप्लाई भेजी जाएगी
क्या देश में सचमुच चीनी की कमी है?
NFCSF का साफ कहना है कि देश में चीनी की कोई किल्लत नहीं है और पैनिक करने की जरूरत बिल्कुल नहीं है. नए पेराई सीजन की शुरुआत तक देश में करीब 35 लाख टन का सरप्लस स्टॉक मौजूद रहेगा, जो हमारी हर महीने की 22 लाख टन की खपत से काफी ज्यादा है. यह कदम सिर्फ कीमतों में आए उछाल को काबू में करने के लिए उठाया गया है.
कालाबाजारी और जमाखोरी पर पर सख्ती
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच एक तरफ विदेश से चीनी आ रही है, तो दूसरी तरफ सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी पर भी सख्ती दिखाई है. कारोबारियों के लिए 200 टन की स्टॉक लिमिट तय की गई है, जबकि बड़े खरीदारों के लिए अलग लिमिट रखी गई है. इसके साथ ही ट्रेडर्स और मिलों के गोदामों की मॉनिटरिंग के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं. NFCSF का कहना है कि को-ऑपरेटिव शुगर मिलों ने बड़े पैमाने पर अपने तय कोटे के भीतर काम किया है और सट्टेबाजी से दूरी बनाई है.
भारत के ऑर्डर के बाद भी सस्ती हुई चीनी
दिलचस्प बात यह है कि भारत के 10 लाख टन चीनी मंगवाने के फैसले के बाद भी इंटरनेशनल मार्केट में कच्ची चीनी महंगी होने के बजाय और सस्ती हो गई.पहले कीमतें थोड़ी देर के लिए उछलकर 18 सेंट प्रति पाउंड पर गईं, लेकिन फिर गिरकर 17.50 सेंट पर आ गईं. यानी पहले चीनी जिस रेट पर बिक रही थी, यह दाम उससे भी नीचे चला गया
नाइकनवारे का कहना है कि दुनिया भर के बाजार में चीनी की कोई कमी नहीं है, इसलिए इसके दाम बहुत ज्यादा नहीं बढ़े. भारत में आयात की गई चीनी दुकानदारों तक किस रेट में पहुंचेगी, यह इस बात पर तय होगा कि इंटरनेशनल मार्केट में इसका भाव क्या है, जहाज का भाड़ा कितना लगा है और पोर्ट से दुकानों तक पहुंचाने में कितना ट्रांसपोर्ट खर्च आया है.
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