Share Market Today: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने भारतीय शेयर बाजार का मूड बिगाड़ दिया है. ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी के बीच आज यानी 23 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली. हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर चले गए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स (BSE Sensex) करीब 393 अंक (0.51%) गिरकर 76,361.59 के स्तर पर आ गया.
वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) में भी 108 अंकों (0.45%) की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,887.30 के स्तर पर आ गया, जो कि 23,900 के अहम सपोर्ट लेवल से नीचे है.
शुरुआती कारोबार में बाजार के लगभग सभी प्रमुख इंडेक्स दबाव में कारोबार करते दिखे, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. केवल बड़े शेयरों में ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी बिकवाली का दबाव देखा गया. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.25 प्रतिशत गिरकर 62,142 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,097 पर आ गया.
फार्मा और आईटी शेयरों में ज्यादा बिकवाली
सेक्टर के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा नुकसान फार्मा शेयरों में देखने को मिला. निफ्टी फार्मा इंडेक्स 0.81 प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था, जिसकी मुख्य वजह अमेरिका की तरफ से टैरिफ को लेकर की गई हालिया घोषणाएं मानी जा रही हैं. इसके अलावा रियल्टी, आईटी, ऑयल एंड गैस, प्राइवेट बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में भी बिकवाली हावी रही. हालांकि, दूसरी तरफ ऑटो, मेटल, मीडिया, एफएमसीजी और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में हल्की खरीदारी देखने को मिली.
बाजार में गिरावट के बावजूद इन दिग्गज शेयरों ने दिखाया दम
सेंसेक्स के दिग्गज शेयरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला. ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), आईसीआईसीआई बैंक और पावर ग्रिड जैसे शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे. इसके विपरीत इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, एसबीआई, टाटा स्टील, सन फार्मा, भारती एयरटेल और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे बड़े शेयरों में बिकवाली का दौर जारी रहा और ये लाल निशान में कारोबार करते दिखे.
शेयर बाजार में गिरावट की वजह
शेयर बाजार में गिरावट की कई वजहें हैं. अमेरिका द्वारा ईरान पर नए हमलों और लाल सागर (Red Sea) में हूती विद्रोहियों द्वारा तेल टैंकरों को निशाना बनाने से ब्रेंट क्रूड ऑयल $95 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. क्रूड महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ने और कंपनियों का मुनाफा घटने का डर रहता है.
वहीं, विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों (FIIs/DIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने भी निवेशकों के सेंटिमेंट को कमजोर किया है.
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