Success Story: बिहार के नवादा जिले में रोह प्रखंड की भीखमपुर पंचायत स्थित जैला गांव निवासी किसान ईश्वरी यादव के बेटों ने गर्दा उड़ा दिया. कामयाबी की ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर किसी के लिए प्रेरणादायी है. खुद ईश्वरी यादव और उनकी पत्नी मंजू देवी कम पढ़े-लिखे हैं, लेकिन उन्होंने अपने चार बेटों की पढ़ाई के कदम कभी थमने नहीं दिए. इसका परिणाम यह है कि आज उनके चारों बेटे सरकारी नौकरियों में हैं. इस परिवार में चौथी सरकारी नौकरी इसी साल जून में आई है.
उनकी पत्नी मंजू देवी, जो औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकीं, उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां बखूबी संभालते हुए बच्चों को अनुशासन, मेहनत और अच्छे संस्कार दिए. आज उसी तपस्या का परिणाम है कि परिवार के चारों बेटे अलग-अलग सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं, वहीं दोनों बेटियां भी शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रही हैं.
ईश्वरी यादव बताते हैं कि खेती से होने वाली आमदनी बेहद सीमित थी. कभी फसल अच्छी होती, तो कभी मौसम मेहनत पर पानी फेर देता था. इसके बावजूद उन्होंने बच्चों को कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि संसाधनों की कमी उनके सपनों की राह में बाधा बन सकती है. वे कहते हैं, "जमीन कम थी, लेकिन बच्चों के सपने बड़े थे. मैंने हमेशा यही सोचा कि खेत एक पीढ़ी का सहारा बन सकता है, लेकिन शिक्षा कई पीढ़ियों का भविष्य बदल देती है."
चारों बेटों की सफलता का सफर
1. पंचायत सचिव बने बड़े बेटे राजीव कुमार: परिवार के सबसे बड़े बेटे राजीव कुमार (34 वर्ष) का चयन वर्ष 2022 में बिहार सरकार में पंचायत सचिव के पद पर हुआ. वर्तमान में वे डेहरी में कार्यरत हैं. स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की लगन से तैयारी की. उनकी इस सफलता ने परिवार के इस विश्वास को और मजबूत कर दिया कि ईमानदारी से की गई मेहनत का फल जरूर मिलता है. आज वे पंचायत प्रशासन और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन कर रहे हैं.
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परिवार के सबसे बड़े बेटे राजीव कुमार (34 वर्ष) का चयन वर्ष 2022 में बिहार सरकार में पंचायत सचिव के पद पर हुआ
2. दूसरे बेटे भारतीय रेलवे में सेवारत हैं दूसरे बेटे: दूसरे बेटे सतीश कुमार (30 वर्ष) ने वर्ष 2014 में भारतीय रेलवे में तकनीशियन के पद पर सफलता हासिल की. वर्तमान में वे भुसावल रेल मंडल में कार्यरत हैं. सरकारी नौकरी मिलने के बाद उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी बड़े सपने देखने चाहिए, क्योंकि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता.

दूसरे बेटे सतीश कुमार (30 वर्ष) ने वर्ष 2014 में भारतीय रेलवे में तकनीशियन के पद पर सफलता हासिल की
3. तीसरे बेटे बीएसएफ में जूनियर इंजीनियर: तीसरे बेटे रविंदर कुमार (28 वर्ष) ने पॉलिटेक्निक और स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2024 में सीमा सुरक्षा बल में जूनियर इंजीनियर के पद पर सफलता हासिल की. वर्तमान में उनकी तैनाती जबलपुर में है. रविंदर का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण होती है. उनका चयन गांव के उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बना है, जो तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं.

तीसरे बेटे रविंदर कुमार ने सीमा सुरक्षा बल में जूनियर इंजीनियर के पद पर सफलता हासिल की
4. चौथे बेटे पेट्रोलियम मंत्रालय में डिप्टी मैनेजर: परिवार के सबसे छोटे बेटे सिंटू कुमार (24 वर्ष) ने भी अपने बड़े भाइयों के पदचिह्न पर चलते हुए कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. वे 7 जून 2026 को पेट्रोलियम मंत्रालय में डिप्टी मैनेजर के पद पर चयनित हुए, जिससे परिवार की सफलता को एक नई ऊंचाई मिली. सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक करने वाले सिंटू की इस उपलब्धि से न केवल परिवार, बल्कि पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल है.

रिवार के सबसे छोटे बेटे सिंटू कुमार पेट्रोलियम मंत्रालय में डिप्टी मैनेजर.
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