भारतीय परिवारों के बीच सोने से जुड़ी पॉपुलर स्कीम्स में से एक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) में बड़ा बदलाव हुआ है. बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर मिलने वाली टैक्स छूट को सीमित करने का ऐलान किया है. यानी अब हर स्थिति में गोल्ड बॉन्ड के निवेशकों को कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gain Tax) से छूट नहीं मिलेगी. बजट 2026 डॉक्युमेंट के अनुसार, अब ये टैक्स छूट केवल उन्हें ही मिलेगी निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने बॉन्ड सीधे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्राइमरी इश्यू के दौरान खरीदे हों और उन्हें मैच्योरिटी तक होल्ड किया हो. इस फैसले से सबसे बड़ा झटका उन निवेशकों को लगा है, जो स्टॉक एक्सचेंज जैसे सेकेंडरी मार्केट के जरिए गोल्ड बॉन्ड में निवेश करते हैं.
तो क्या टैक्स छूट खत्म कर दी गई?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव तो किया गया है, लेकिन कई निवेशक इस बात से परेशान हैं कि क्या अब SGB पर मिलने वाली टैक्स छूट खत्म हो गई है? जवाब है- पूरी तरह नहीं. टैक्स छूट अभी भी मिलेगी, लेकिन ये एक तरह से लॉक इन पीरियड के बाद मिलेगी. इसे आगे और विस्तार से समझेंगे, लेकिन उससे पहले ये
पहले क्या था SGB पर टैक्स छूट का नियम?
पहले, यदि कोई व्यक्ति गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी (8 साल) तक अपने पास रखता था, तो उसे होने वाले मुनाफे (Capital Gains) पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था. व्यवहार में, यह लाभ उन लोगों को भी मिल रहा था जिन्होंने बॉन्ड को सीधे RBI से न खरीदकर शेयर बाजार (Secondary Market) से खरीदा था.
बजट 2026 के बाद क्या बदल गया?
वित्त मंत्री के नए प्रस्ताव के अनुसार, अब कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट केवल तभी मिलेगी जब ये दो शर्तें पूरी होंगी:
- निवेशक ने बॉन्ड को तब खरीदा हो जब RBI ने इसे पहली बार जारी (Original Issue) किया था.
- निवेशक ने उस बॉन्ड को जारी होने की तारीख से मैच्योरिटी तक लगातार अपने पास रखा हो.
अगर आपने शेयर बाजार (जैसे NSE या BSE) से किसी दूसरे निवेशक से पुराना गोल्ड बॉन्ड खरीदा है, तो अब मैच्योरिटी पर होने वाले मुनाफे पर आपको टैक्स देना होगा. अब सिर्फ मैच्योरिटी तक बॉन्ड को होल्ड करना काफी नहीं है, यह भी मायने रखेगा कि आपने उसे कब और कहां से खरीदा था.
10 लाख के मुनाफे पर देना होगा 1.25 लाख टैक्स
बजट में किए गए प्रावधान के अनुसार जो बदलाव 1 अप्रैल से लागू होने वाले हैं, उसे एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए आपने वर्षों पहले RBI से गोल्ड बॉन्ड ले रखा हो और आपके पड़ोसी ने सेकेंडरी मार्केट से गोल्ड बॉन्ड ले रखा हो. फिर मान लीजिए कि अब तक के वर्षों में सोने की कीमतें दोगुनी बढ़ जाती हैं कि आपको और आपके पड़ोसी को गोल्ड बॉन्ड पर 10 लाख रुपये का मुनाफा होता है.
आपको कितना टैक्स देना होगा: आपने चूंकि बॉन्ड सीधे RBI से (इश्यू के समय) खरीदा और उसे मैच्योरिटी तक अपने पास रखा तो इस पर आपको 0% टैक्स देना होगा. यानी पूरा का पूरा मुनाफा आपको जाएगा.
आपके पड़ोसी को कितना टैक्स देना होगा: आपके पड़ोसी ने वही बॉन्ड शेयर बाजार से खरीदा था और मैच्योरिटी तक रखा तो बजट 2026 से पहले के प्रावधान तक को उन्हें टैक्स नहीं देना पड़ता था, लेकिन अब देना पड़ेगा. उन्हें भी 10 लाख रुपये का मुनाफा (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) हुआ है तो इस पर 12.5% की दर से 1.25 लाख रुपये टैक्स देना होगा .
तो फिर आपके लिए क्या नहीं बदला?
जो लोग शुरुआत से बॉन्ड खरीदकर मैच्योरिटी तक रुकते हैं, उनके लिए कुछ नहीं बदला. उनका मुनाफा पहले की तरह टैक्स-फ्री रहेगा. हालांकि बॉन्ड पर मिलने वाले 2.5% सालाना ब्याज पर पहले की तरह आपकी इनकम स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता रहेगा.
जानकारों का कहना है कि सरकार का ये कदम सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को 'ट्रेडिंग एसेट' यानी मुनाफे के लिए बार-बार खरीदने-बेचने वाली संपत्ति नहीं बनने देगा. इसकी बजाय 'लॉन्ग टर्म सेविंग' यानी लंबी अवधि की बचत योजना के रूप में इसे बढ़ावा मिलेगा. राजस्व सचिव ने बताया है कि ये नियम अब सभी पुराने और नए बॉन्ड सीरीज पर समान रूप से लागू होगा.
कुल मिलाकर मूल बात ये है कि अगर आप गोल्ड बॉन्ड सीधे RBI से खरीदते हैं और उसे मैच्योरिटी तक रखते हैं तो आपको डरने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आप बाजार से सस्ते बॉन्ड खरीदकर टैक्स बचाने की योजना बना रहे थे, तो अब आपको अपनी रिटर्न कैलकुलेशन में टैक्स को भी जोड़ना होगा.
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