भारतीय शेयर मार्केट की शुरुआत हफ्ते के चौथे दिन बड़ी गिरावट के साथ हुई है. मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से टेँशन का माहौल बन गया है, जिसके चलते निवेशकों ने बिकवाली पर जोर दिया. अमेरिका की ईरान पर एक्शन के बाद भारती बाजार सहम गया. दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की तेजी आई, जिससे निवेशक अलर्ट मोड में आ गए हैं.
कैसी रही सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत?
सेंसेक्स की बात करें तो 350 अंक की गिरावट के साथ 73,614 अंक पर खुला, हालांकि कुछ देर बाद इसमें रिकवरी के संकेत मिले हैं. गिरावट कम होकर 268 अंक पर आ गई. वहीं निफ्टी की कहानी भी सेंसेक्स से अलग नहीं रही. 110 अंक की कमी के साथ ये 23,104 के लेवल पर खुला.
आईटी शेयर पर बना दबाव
बैंकिग, एमसीजी के साथ आईटी शेयर आज प्रेशर में नजर आए. आईटी इंडेक्स 28,279 के मुकाबले 27,888 पर खुला. शेयरों की बात करें तो टेक महिंद्रा, इंफोसिस, एचसीएल टेक और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयरों में निवेशक लगातार बिकबाली करते नजर आए. कहानी ये रही कि लगभग सभी बड़ी कंपनियों के शेयर्स लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए. वजह की बात करें तो अमेरिकी बाजार में टेक शेयरों की भारी बिकवाली रही. एनवीडिया, एएमडी, ब्रॉडकॉम, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजॉन, मेटा, अल्फाबेट और टेस्ला जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे.
एशिआई बजारों के हाल भी ठीक नहीं
इससे पहले एशियाई मार्केट में भी गिरावट का दौर देखा गया. जापान का निक्की 225 लगभग 2.3 फीसदी तक गिर गया. दूसरी तरफ Topix में कुछ खास कमाल नहीं देखा गया. इसमें 1.9% की गिरावट आई. साउथ कोरिया के Kospi की हालात भी इन सभी से अलग नहीं रही. ये करीब 4.1% तक टूट गया. वहीं हांगकांग के मार्केट में भी बिकवाली का दौर लगातार जारी रहा.
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में आग लग गई है. ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड दोने में ही 2 फीसदी से ज्यादा का तगड़ा उछाल आया है. मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि मिडिल ईस्ट में अगर हालात ऐसे ही रहे तो कच्चा तेल बहुत जल्द 100 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर जा सकता है.
अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों को किया अलर्ट
मिडिल ईस्ट की टेंशन के साथ-साथ भारतीय बाजार को अमेरिका में बढ़ती महंगाई ने भी झटका दिया है. मई महीने की बात करें तो अमेरिका में महंगाई दर 4.2% रही. ये पिछले 3 सालों में सबसे ज्यादा बताई जा रही है. अगर अप्रैल का डेटा देखें तो ये दर 3.8% थी. महंगाई ने निवेशकों को अलर्ट मोड पर ला दिया है, क्योंकि इससे ब्याज की दरें कम होने की उम्मीद कतई नहीं है.
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