भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों को राहत देने और साथ ही विदेशी निवेश बढ़ाने और के लिए बाजार नियामक SEBI ने सरकार को टैक्स बदलावों की सिफारिश की है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से बताया है कि SEBI ने विदेशी निवेशकों पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को हटाने की सिफारिश की है.
यही नहीं, SEBI ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी राहत का प्रस्ताव दिया है. प्रस्ताव ये है कि अगर निवेशक एक साल से ज्यादा समय से रखी अपनी म्यूचुअल फंड यूनिट बेचकर दूसरी स्कीम में निवेश करते हैं, तो इस स्विच को टैक्सेबल बिक्री नहीं माना जाए. यानी इन पर टैक्स माफ हो.
ये सिफारिशें फरवरी में पेश होने वाले केंद्रीय बजट से 3 महीने पहले की गई हैं. SEBI की इन सिफारिशों पर सरकार अंतिम फैसला लेगी.
अभी कितना टैक्स लगता है निवेशकों को?
मौजूदा नियमों के मुताबिक, एक साल से ज्यादा समय तक रखी गई सिक्योरिटीज पर फिलहाल 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है. एक साल या उससे कम अवधि में बेची गई सिक्योरिटीज पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स 20% है. इसके अलावा शेयरों की खरीद-बिक्री पर STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स और डिविडेंड पर विदहोल्डिंग टैक्स भी लागू होता है.
SEBI का कहना है कि इक्विटी निवेश से जुड़े ट्रांजैक्शन कॉस्ट दूसरे बाजारों के मुकाबले काफी ज्यादा हैं. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक, कैपिटल गेन्स टैक्स में कटौती से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार अधिक आकर्षक हो सकता है और पोर्टफोलियो निवेश बढ़ सकता है.
वहीं ब्रोकरेज फर्म IIFL का अनुमान है कि कैपिटल गेन्स टैक्स हटने से विदेशी निवेशकों का रिटर्न 2.3 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकता है.
घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी राहत का प्रस्ताव
SEBI ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी टैक्स राहत की सिफारिश की है. सूत्रों के मुताबिक, अगर निवेशक एक साल से ज्यादा समय तक रखी गई म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेचकर दूसरी स्कीम में निवेश करते हैं, तो इस बदलाव को टैक्सेबल बिक्री नहीं माना जाना चाहिए.
इसका मकसद निवेशकों को घरेलू म्यूचुअल फंड में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग के पास 82.6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है. इसमें हर महीने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए औसतन 30,000 करोड़ रुपये आते हैं.
विदेशी निवेशकों ने मार्केट से 31 बिलियन डॉलर निकाले
SEBI की सिफारिशें ऐसे समय आई हैं, जब कमजोर बाजार प्रदर्शन और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार में निवेश आकर्षित करने की चुनौती बढ़ी है.
पिछले दो साल में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा है. इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में रिकॉर्ड 31 बिलियन डॉलर की बिकवाली की है. वहीं, रिटर्न कमजोर रहने के बीच भारतीय रिटेल निवेशकों का विदेशी बाजारों में निवेश बढ़ा है.
सूत्रों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों से लगातार बातचीत के दौरान टैक्स व्यवस्था में बदलाव की मांग प्रमुखता से सामने आई. SEBI ने पिछले दो साल में विदेशी निवेशकों के साथ कई बैठकें की हैं. लगातार बिकवाली से रुपये पर भी दबाव पड़ा है. एक सूत्र ने कहा कि प्रस्तावों का मकसद विदेशी निवेशकों पर शुरुआती टैक्स बोझ कम करना है.
बता दें कि पिछले दो साल में निफ्टी 50 में 4.8% की गिरावट आई है, जबकि MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स 40% चढ़ा है. इसी अवधि में बड़े शेयरों में निवेश करने वाले घरेलू इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का औसत रिटर्न 1.6% गिरा है.
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