हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिपोर्ट आई है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि अगस्त में Home Lone की EMI कम हो सकती है. SBI ने शनिवार को रिपोर्ट जारी की इसके मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अगस्त 2026 की MPC की बैठक में Repo रेट में कोई बदलाव नहीं होने की संभावना है. वहीं यह भी कहा गया है कि अगले दो तिमाही तक रिटेल महंगाई (CPI) 5 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है. जबकि फाइनेंसिल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि 7 प्रतिशत से अधिक रह सकती है. ऐसे में RBI के लिए ब्याज दरों को स्थिर रखना अधिक आसान होगा.
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई के दौरान 35 अरब डॉलर की कैपिटल इनफ्लो हुई, जिससे 24 जुलाई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.5 अरब डॉलर बढ़ गया. साथ ही, जून के अंत तक तीन महीने तक की अवधि वाले फॉरवर्ड पोजीशन में 13 अरब डॉलर की कमी आई, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव कम हुआ.
SBI रिसर्च का मानना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए RBI की MPC ब्याज दरों पर बदलाव नहीं कर सकती है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये पर दबाव और वैश्विक पूंजी प्रवाह को लेकर अनिश्चितता के कारण केंद्रीय बैंक की ओर से अत्यधिक नरम रुख अपनाने की संभावना कम है.
5 अगस्त को नीतिगत फैसलों की होगी घोषणा
RBI की अगली MPC की बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच होगी, जबकि 5 अगस्त को नीतिगत फैसलों की घोषणा की जाएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अब भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और विभिन्न देशों में आर्थिक रुझान अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं. इस बीच, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान अपेक्षा से अधिक सुस्ती दर्ज की गई.
GDP वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान
SBI रिसर्च ने बताया कि पिछली तीन मौद्रिक नीतियों में RBI ने पश्चिम एशिया युद्ध के प्रभाव को देखते हुए फाइनेंनसियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के GDP वृद्धि अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया था. लेकिन अब हालात में सुधार हुआ है और पहली तिमाही की वास्तविक वृद्धि दर पहले के अनुमान से काफी बेहतर, यानी 7 प्रतिशत से अधिक रह सकती है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक मुद्रा बाजार में अब भी असंतुलन बना हुआ है और मार्च के दौरान इसका सबसे अधिक असर भारतीय रुपये पर पड़ा. हालांकि, RBI ने फॉरवर्ड बाजार में अपनी रणनीति के जरिए अल्पकालिक दबाव को कम करने का प्रयास किया, जिससे निर्यातकों और आयातकों की हेजिंग गतिविधियों के कारण रुपये पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिली.
खरीफ फसलों की बुवाई 4.7 प्रतिशत कम
मानसून को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण देशभर में वर्षा की कमी घटकर 13 प्रतिशत रह गई है. जलाशयों का जलस्तर लगभग सामान्य है और खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में केवल 4.7 प्रतिशत कम है. इससे ग्रामीण मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है.
AI में बढ़ता निवेश जोखिम
SBI रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में AI को लेकर भी चिंता जताई है. रिपोर्ट के अनुसार, हर बड़ी तकनीकी क्रांति की तरह AI क्षेत्र में भी भारी निवेश, तेजी से बढ़ती उम्मीदें और सट्टा गतिविधियां देखने को मिल रही हैं. ऐसे में यह संभव है कि कई कंपनियां वर्तमान समय में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर जरूरत से ज्यादा निवेश कर रही हों, जिससे भविष्य में AI बबल बनने का जोखिम पैदा हो सकता है.
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