Sanjay Mehrotra Success Story: ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में भारतीय मूल के दिग्गज अपनी ताकत दिखा रहे हैं. सुंदर पिचाई, सत्य नडेला जैसे नामों की लिस्ट में एक और ऐसा नाम है, जिसने वो सफलता हासिल की जहां पहुंचना किसी सपने जैसा ही है. हम बात कर रहे हैं सेमीकंडक्टर सेक्टर की बड़ी कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के प्रेसिडेंट और सीईओ संजय मेहरोत्रा की. हाल ही में माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने शेयर बाजार में 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैपिटलाइजेशन के आंकड़े को पार किया. लेकिन क्या आप जानते हैं संजय मेहरोत्रा ने 3 बार अमेरिकी वीजा के लिए अप्लाई किया, जिसे हर बार रिजेक्ट कर दिया जाता था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज वो सेमीकंडक्टर की बड़ी कंपनी के सीईओ पद पर बने हुए हैं.
अमेरिकी दूतावास ने वीजा देने से मना कर दिया था
ये बात साल 1976 की है. 18 साल के संजय मेहरोत्रा दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के अंदर खड़े थे. वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी जाना चाहते थे. लेकिन दूतावास ने उनका स्टूडेंट वीजा खारिज कर दिया. ये कोई पहली बार नहीं था, बल्कि लगातार तीसरी बार था जब संजय मेहरोत्रा को अमेरिकी वीजा देने से मना किया था. इसके बाद संजय दूतावास से बाहर निकले और उन्होंने भी मान लिया कि शायद वो अमेरिका नहीं जा पाएंगे. लेकिन उनके पिता कुछ और ही सोचकर आए थे.
पिता ने नही मानी हार
कंप्यूटर हिस्ट्री म्यूजियम को दिए इंटरव्यू में संजय मेहरोत्रा ने बताया कि जब वो निराश हो चुके थे, तब उनके पिता दूतावास के लॉबी में डटे रहे. अचानक उनके पिता की नजर अमेरिकी काउंसल पर पड़ी. उनके पिता पीछे-पीछे उनके केबिन में चले गए. वहां अगले 20 मिनट तक संजय के पिता ने अमेरिकी अधिकारियों से बात की. उन्होंने अपने बेटे को देश से बाहर जाकर पढ़ने की कई दलीलें पेश कीं. इसके बाद अधिकारियों ने संजय मेहरोत्रा की फाइल दोबारा देखी और आखिरकार उनके पासपोर्ट पर वीजा की मुहर लगा दी.
कानपुर से कैलिफोर्निया का सफर
संजय का जन्म यूपी के कानपुर शहर में हुआ था. यहां से उनका सफर कैलिफोर्निया तक शानदार रहा. वीजा मिलने के बाद संजय मेहरोत्रा अमेरिका पहुंचे और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस में बैचलर के साथ मास्टर की डिग्री हासिल की. साल 1988 में संजय मेहरोत्रा ने एली हरारी और जैक युआन के साथ मिलकर सैनडिस्क कंपनी की नींव रखी. ये वो दौर था जब डिजिटल स्टोरेज की दुनिया बदल रही थी. सैनडिस्क ने फ्लैश मेमोरी स्टोरेज में कमाल की ग्रोथ हासिल की. जो पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड आज हम इस्तेमाल करते हैं, उसे घर पहुंचाने में इस कंपनी का बड़ा हाथ था.
माइक्रोन टेक्नोलॉजी को मिला एआई का फायदा
सैनडिस्क के बाद साल 2017 में संजय मेहरोत्रा को माइक्रोन टेक्नोलॉजी का सीईओ बनाया गया. फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, जब वो सीईओ बने थे तब माइक्रोन के एक शेयर 30 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था. संजय मेहरोत्रा ने कंपनी में डेटा सेंटर्स और सेमीकंडक्टर का निवेश बढ़ाया. और फिर आती है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की लहर. इसने माइक्रोन की चांदी कर दी. ऐसा इसलिए क्योंकि एआई सर्वर्स और एडवांस कंप्यूटिंग सिस्टम के लिए हाई-परफॉर्मेंस वाले मेमोरी चिप्स की जरूरत होती है. ये सब माइक्रोन के पास पहले से मौजूद था. नतीजन कंपनी के शेयरों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल आया और कंपनी 1 ट्रिलियन डॉलर क्लब में शामिल हो गई.
मेहरोत्रा की टोटल नेटवर्थ में आया गजब का उछाल
ना केवल माइक्रोन बल्कि संजय मेहरोत्रा भी अरबपतियों की सूची में शामिल हो गए. मेहरोत्रा की टोटल नेटवर्थ की बात करें तो वो करीब 1.2 बिलियन डॉलर है. संजय मेहरोत्रा के सफर से एक बात तो साफ है कि अगर आपके पास हुनर है, तो दुनिया की कोई भी रुकावट आपका रास्ता नहीं रोक सकती.
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