भारत अब केवल दुनिया का सॉफ्टवेयर हब नहीं रहेगा, बल्कि हार्डवेयर की दुनिया में भी अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार है. 28 फरवरी, 2026 की तारीख भारतीय इतिहास के सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रही है. पीएम मोदी गुजरात के साणंद में अमेरिकी कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron Technology) के सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग प्लांट का उद्घाटन करेंगे. यह केवल एक फैक्ट्री की शुरुआत नहीं है बल्कि भारत की पहली कमर्शियल स्केल की सेमीकंडक्टर यूनिट है, जो ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत की तस्वीर बदल देगी.
आइए, इस खबर में जानते हैं कि क्यों यह प्रोजेक्ट खास है. कितनी नौकरियां इस प्रोजेक्ट से देश को मिलने की उम्मीद है. साथ ही कैसे यह प्लांट काम करेगा.
india first semiconductor plant micron sanand gujarat
क्यों है यह खास?
इस सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग प्लांट प्रोजेक्ट की नींव तब रखी गई थी जब जून 2023 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान माइक्रोन के साथ करार हुआ था. सिर्फ 2.5 साल के अंदर ही यह प्लांट बनकर तैयार हो गया और प्रोडक्शन के लिए तैयार है.
- इसमें कुल निवेश लगभग 22,516 करोड़ रुपये यानी 2.75 बिलियन डॉलर का किया गया है.
- तकनीक की बात करें तो इसे एटीएमपी यानी एसेंबली, टेस्टिंग, मेकिंग और पैकेजिंग प्लांट कहा जाता है. यहां सेमीकंडक्टर वेफर्स को तैयार चिप्स में बदला जाएगा.
- इस प्लांट में डीआरएम और एनएएनडी जैसे मेमोरी प्रोडक्ट्स बनाए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल स्मार्टफोन्स, लैपटॉप्स, डेटा सेंटर्स के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मशीनों में होगा.
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हजारों युवाओं को मिलेगा काम
माइक्रोन का यह प्लांट गुजरात और देश के युवाओं के लिए नौकरियों के मोर्चे पर खुशियों की सौगात लेकर आया है. इस प्लांट के जरिए लगभग 5 हजार डायरेक्ट नौकरियां पैदा होने का अनुमान है. वहीं, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टर्स में करीब 15 हजार इनडायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी. खास बात यह है कि इस प्लांट में दिव्यांगों को भी बड़ी संख्या में ऑपरेटर और तकनीशियन के रूप में मौका दिया गया है.
कैसे काम करता है ATMP प्लांट?
कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या यहां चिप बनाई जाएंगी? दरअसल सेमीकंडक्टर बनाना एक बड़ा प्रोसेस है. माइक्रोन के साणंद प्लांट में सिलिकॉन वेफर्स, जो माइक्रोन की ग्लोबल फैसिलिटीज से आएंगे, उन्हें यहां लाया जाएगा. फिर उनकेन पार्टस को जोड़कर चिप का ढांचा तैयार किया जाएगा. इसके बाद चिप की स्पीड और कैपेसिटी की जांच करने काम होगा. इसके बाद चिप पर ब्रांडिंग करना और उसे लास्ट प्रोडक्ट के रूप में पैक करना, जिससे वो मार्केट में बिकने के लिए तैयार हो सके.
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एआई की रेस में भारत
आज पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पीछे भाग रही है. देश ने हाल ही में एआई समिट का सफल आयोजन कराया. जैसा आप जानते हैं कि एआई को चलाने के लिए बहुत हाई-स्पीड मेमोरी की जरूरत होती है. ऐसे में साणंद में बनने वाली चिप्स एआई क्रांति के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होंगी. इससे भारत ना केवल अपनी जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि यहां बनी चिप्स मेड इन इंडिया टैग के साथ दुनिया भर में एक्सपोर्ट की जाएंगी.
भारत का नया सिलिकॉन वैली
साणंद कभी ऑटोमोबाइल हब के रूप में जाना जाता था. लेकिन अब यह सेमीकंडक्टर हब बन चुका है. दुनिया भर में चिप की कमी को देखते हुए भारत का यह कदम मास्टरस्ट्रोक माना जा सकता है. अब भारत को चिप्स के लिए चीन या ताइवान पर निर्भर नहीं रहना होगा. यह प्लांट भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की पहली बड़ी जीत है.
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