भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की अगली मौद्रिक नीति बैठक से पहले आई दो बड़ी ग्लोबल रिपोर्ट्स ने लोन लेने वालों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. अगर आप भी होम लोन या कार लोन की ईएमआई भर रहे हैं, तो आने वाले कुछ महीनों में आपकी जेब ढीली हो सकती है. महंगाई पर काबू रखने के लिए रिजर्व बैंक अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में रेपो रेट 0.25% बढ़ा सकता है.
HSBC के एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अक्टूबर और दिसंबर, दोनों बैठकों में 0.25%-0.25% की बढ़ोतरी हो सकती है ऐसा हुआ तो रेपो रेट बढ़कर 5.75% पहुंच सकता है. इसका असर आपके लोन की EMI पर भी पड़ सकता है.
GDP ग्रोथ ने बढ़ाई चिंता
रेपो रेट बढ़ाने की चर्चा के पीछे मजबूत आर्थिक ग्रोथ भी बड़ी वजह है. जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही, जो RBI के 7% अनुमान से ज्यादा है. HSBC के मुताबिक, मजबूत मांग और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों ने ग्रोथ को सहारा दिया.
सरकार के GST और एक्साइज ड्यूटी में कटौती, ज्यादा सब्सिडी और सरकारी पूंजीगत खर्च में सालाना 40% बढ़ोतरी से भी अर्थव्यवस्था को मदद मिली.
महंगाई फिर बढ़ने का डर
HSBC का अनुमान है कि अगले नौ महीनों में महंगाई औसतन 5% से ऊपर रह सकती है. पहले वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में महंगाई RBI के 4% लक्ष्य के आसपास रह सकती है, लेकिन दूसरी छमाही में दबाव बढ़ सकता है.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और दिसंबर तिमाही में अल नीनो की स्थिति मजबूत होने से फूड इन्फ्लेशन बढ़ने का खतरा है. कंपनियों की बढ़ती लागत का असर ग्राहकों तक पहुंचा तो कोर महंगाई वित्त वर्ष के अंत तक करीब 5% तक जा सकती है.
HSBC ने ग्रोथ का अनुमान भी दिया
HSBC ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ 7.2% रहने का अनुमान लगाया है. हालांकि, आने वाली तिमाहियों में ग्रोथ की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है.रिपोर्ट के मुताबिक FY27 में चालू खाते का घाटा GDP के 1.3% तक पहुंच सकता है, जो FY26 में 0.6% था. महंगे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत दूसरी जरूरी चीजों के ज्यादा आयात से दबाव बढ़ सकता है.
Nomura का भी 5.75% तक का अनुमान
नोमुरा का कहना है कि मौजूदा दौर में RBI की दर बढ़ोतरी 25 से 50 बेसिस प्वाइंट तक रह सकती है. उसके मुताबिक बाजार अगले एक साल में करीब 125 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी मानकर चल रहा है, जो मौजूदा महंगाई के हिसाब से ज्यादा है.
नोमुरा ने अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई है. साथ ही एक ही बढ़ोतरी होने का जोखिम भी बताया है.
कब से मिलेगी राहत?
फरवरी 2027 के बाद दर बढ़ाने की गुंजाइश कम हो सकती है, क्योंकि इसके बाद कंजम्पशन थोड़ा धीमा हो सकता है और महंगाई दर में गिरावट आ सकती है. Nomura के मुताबिक FY27 में CPI महंगाई 5.2% और FY28 में 4% रह सकती है. FY27 की पहली छमाही में महंगाई करीब 5.3% और 2027 की दूसरी छमाही में 4% से नीचे जाने का अनुमान है.
RBI के सामने एक और चुनौती
HSBC के मुताबिक FCNR(B) जमा से सिस्टम में आई करीब ₹5-6 लाख करोड़ की अतिरिक्त लिक्विडिटी को बैलेंस करने के लिए RBI ओपन मार्केट ऑपरेशन यानी OMO बिक्री का इस्तेमाल किया जा सकता है.
वहीं, सरकार का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान से GDP के करीब 0.5% ज्यादा रह सकता है.
ये भी पढ़ें- यह भी पढ़ें : WEF के बाद S&P और Fitch ने भी माना भारतीय इकोनॉमी का 'लोहा', बढ़ाया GDP ग्रोथ का अनुमान
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं