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RBI की MPC मीटिंग शुरू, ब्‍याज दरों पर राहत या आफत, लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी, जानिए कब आएगा फैसला

RBI की तीन दिवसीय MPC बैठक आज 3 जून, बुधवार से शुरू हो गई है. वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इकोनॉमिस्‍ट्स अनुमान जता रहे हैं कि केंद्रीय बैंक इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा. हालांकि कुछेक की राय अलग है. डिटेल में जानिए, क्‍या हो सकता है.

RBI की MPC मीटिंग शुरू, ब्‍याज दरों पर राहत या आफत, लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी, जानिए कब आएगा फैसला
RBI MPC Meeting: गवर्नर संजय मल्‍होत्रा की अध्‍यक्षता में ये मीटिंग बुधवार से शुरू हो गई है.
(NDTV File Photo)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज बुधवार से शुरू हो गई है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव करेगा या नहीं, इसको लेकर सबकी नजरें केंद्रीय बैंक पर है. बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार, 5 जून को नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे. जून की मौद्रिक नीति समीक्षा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है. साथ ही वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इससे आर्थिक परिदृश्य और अधिक जटिल हो गया है.

आपके लोन की EMI बढ़ेगी या कम होगी? 

समाचार एजेंसी PTI के एक सर्वे के अनुसार इस बार आपके लोन की EMI पर राहत की उम्‍मीद नहीं है, न ही इसकी दरें बढ़ाए जाने की संभावना है. सर्वे में शामिल 11 इकोनॉमिस्‍ट्स का मानना है कि RBI इस बार रेपो रेट यानी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रख सकता है. वहीं 4 विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी भी कर सकता है. बता दें कि पिछले साल से लेकर अब तक रेपो रेट में कुल 1.25% (125 बेसिस पॉइंट) की कटौती की गई है, लेकिन अब बदले वैश्विक हालातों के बाद बैंक संभलकर कदम उठा रहा है. मुख्य महंगाई दर अभी भी आरबीआई के 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है. ऐसे में आरबीआई के पास ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के दूसरे दौर के असर को देखने और इंतजार करने का पूरा मौका है.

अर्थशास्त्रियों की राय क्या है?

एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी का कहना है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकता और उन्हें स्थिर रख सकता है. हालांकि, आगे चलकर आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार आरबीआई कुछ सख्त कदम उठा सकता है. उन्होंने बताया कि बाजार को उम्मीद है कि 2026 के आखिरी महीनों से आरबीआई ब्याज दरों में लगभग दो बार कटौती कर सकता है. फिलहाल बाजार को किसी बड़ी सख्ती की उम्मीद नहीं है.

भंडारी के अनुसार, लोगों की नजर आरबीआई के नए आर्थिक अनुमानों पर रहेगी. खास तौर पर यह देखा जाएगा कि आरबीआई ऊर्जा क्षेत्र में चल रही समस्याओं का कितना असर मानता है और क्या वह कच्चे तेल की औसत कीमत का अपना अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाता है या नहीं. अर्थशास्त्री का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान बढ़ता है, तो महंगाई भी बढ़ सकती है. पहले जहां महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान था, वह बढ़कर करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सामान्य से कम बारिश होने की आशंका और हाल में ईंधन की बढ़ी कीमतों के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह सामान की आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं हैं, न कि लोगों की मांग में बढ़ोतरी.

केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की औसत कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रह सकती है. लेकिन अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा चलता है और तेल 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाता है, तो आर्थिक वृद्धि घटकर करीब 6 प्रतिशत रह सकती है.

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी अनुमान लगाया है कि आरबीआई ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखेगा. कंपनी का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हाल की गिरावट और वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार से आरबीआई को कुछ राहत मिली है.

रिपोर्ट के अनुसार, अगर तेल की कीमतें और कम होती हैं और भू-राजनीतिक तनाव घटता है, तो रुपया मजबूत हो सकता है और आरबीआई लंबे समय तक ब्याज दरों को स्थिर रखने की स्थिति में रहेगा.

जीडीपी ग्रोथ रेट क्या रहेगी?

एसबीआई रिसर्च का भी मानना है कि महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए आरबीआई इस बार रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में GDP growth rate 6.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 7.5 प्रतिशत रह सकती है. साथ ही, ईंधन की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों के कारण महंगाई कई तिमाहियों तक 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है.

तो इसी तरह RBI की नीतियों पर सबकी नजर टिकी हुई है. बढ़ती महंगाई, तेल की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस बार केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. अब सभी की नजर 5 जून को होने वाली RBI की घोषणा पर है.

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