- वित्त वर्ष 2027 में RBI अपनी रेपो रेट को स्थिर रख सकता है, जिससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है.
- रेपो रेट स्थिर रहने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में कोई वृद्धि या कमी फिलहाल नहीं होगी.
- कच्चे तेल की कीमतों में कमी और जीएसटी कटौती से नॉन-फूड महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने की उम्मीद है.
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर बड़ा रुख अपना सकता है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में RBI अपनी ब्याज दरों यानी रेपो रेट (Repo Rate) को स्थिर रख सकता है. इसका मतलब है कि फिलहाल दरों में और कटौती की उम्मीद कम है. इसकी मुख्य वजह कन्ज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई में होने वाली हल्की बढ़ोतरी को माना जा रहा है.
बता दें कि फिलहाल रेपो रेट 5.5 प्रतिशत पर है, जिसमें इस साल अब तक 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है.
आम आदमी पर क्या होगा असर?
अगर RBI ब्याज दरों को स्थिर रखता है, तो इसका सीधा असर आपकी EMI पर पड़ेगा. इसका मतलब है कि होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की किस्तें फिलहाल न तो बढ़ेंगी और न ही कम होंगी. जिन लोगों ने पहले की गई 1.25% की कटौती का फायदा उठा लिया है, उनके लिए राहत बनी रहेगी. साथ ही, बैंक की एफडी (FD) पर मिलने वाला ब्याज भी एक स्तर पर बना रहेगा. यानी मिडिल क्लास के लिए बजट प्लान करना आसान होगा क्योंकि उनकी किस्तों में बार-बार बदलाव का डर खत्म हो जाएगा.
महंगाई और बजट का गणित
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों के दाम यानी फूड इन्फ्लेशन सामान्य होने से महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है. हालांकि, राहत की बात यह है कि कच्चे तेल की कम कीमतों और जीएसटी कटौती के फायदे से नॉन-फूड इन्फ्लेशन कंट्रोल में रहने की उम्मीद है. जनवरी में देश की रिटेल इन्फ्लेशन यानी खुदरा महंगाई दर 2.75 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो फिलहाल नियंत्रण में है.
देश की तरक्की और निवेश की रफ्तार
क्रिसिल का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ रेट 6.7 प्रतिशत रह सकती है. सरकार का कैपिटल एक्सपेंडीचर और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में सुधार के संकेत अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे. इसके अलावा, पहले की गई ब्याज दरों में कटौती से बैंक लोन ग्रोथ को भी अच्छा सपोर्ट मिल रहा है, जिससे लोग और कंपनियां ज्यादा लोन ले रहे हैं.
मजबूत होगा रुपया और मार्केट में आएगी रौनक
भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते का असर अब दिखने लगा है. इसकी वजह से डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति मजबूत हुई है. अनुमान है कि मार्च 2027 तक रुपया 89 प्रति डॉलर पर स्थिर हो जाएगा. विदेशी निवेशकों (FPI) ने भी फरवरी में अब तक करीब 2.8 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी बनी हुई है. RBI भी ओपन मार्केट ऑपरेशंस के जरिए सिस्टम में पैसों की सही मात्रा बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
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