- आरबीआई इस साल केंद्र सरकार को रिकॉर्ड डिविडेंड दे सकता है और फैसला इसी महीने बोर्ड बैठक में हो सकता है.
- सरकारी बैंकों के रिकॉर्ड मुनाफे व मजबूत बैलेंस शीट के कारण सरकार को बजट अनुमान से अधिक रकम मिलने की उम्मीद है.
- मिडिल ईस्ट संकट और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच यह डिविडेंड सरकार के लिए बड़ा वित्तीय सहारा बन सकता है.
Reserve Bank केंद्र सरकार को एक ऐसा रिकॉर्ड भुगतान करने जा रहा है जो मिडिल ईस्ट संकट की वजह से अर्थव्यवस्था और तेल बाजार में अनिश्चितता के बीच बहुत बड़ी वित्तीय सहारा मानी जा रही है. दरअसल, रिजर्व बैंक इस साल केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड दे सकता है. पिछले साल आरबीआई ने केंद्र सरकार को 2024-25 के लिए 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दिया था. यह रकम उससे पिछले साल दिए गए 2.11 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 27 प्रतिशत ज्यादा थी. अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है.
मीडिया सूत्रों के अनुसार, आरबीआई बोर्ड की इस महीने होने वाली बैठक में डिविडेंड की अंतिम राशि पर फैसला लिया जा सकता है. रिजर्व बैंक का ट्रांसफरेबल सरप्लस यानी सरकार को दी जाने वाली अतिरिक्त रकम संशोधित इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क के आधार पर तय होती है. इस फ्रेमवर्क को आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने मंजूरी दी थी.
इस व्यवस्था के तहत कंटीजेंट रिस्क बफर यानी सीआरबी को आरबीआई की बैलेंस शीट के 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के बीच बनाए रखना जरूरी होता है. इसी के आधार पर यह तय किया जाता है कि रिजर्व बैंक कितना सरप्लस सरकार को ट्रांसफर कर सकता है.
सरकार के बजट दस्तावेजों के मुताबिक, केंद्र को 2026-27 में आरबीआई, सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 3.16 लाख करोड़ रुपये डिविडेंड और सरप्लस के रूप में मिलने की उम्मीद है. यह मौजूदा वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 3.75 प्रतिशत ज्यादा है.
हालांकि सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इस बार अनुमान काफी सावधानी से लगाए हैं और असली रकम बजट अनुमान से ज्यादा हो सकती है. इसकी बड़ी वजह सरकारी बैंकों का रिकॉर्ड मुनाफा है.
सरकारी बैंकों ने 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है. बेहतर एसेट क्वालिटी, तेजी से बढ़ते कर्ज वितरण और ज्यादा आमदनी की वजह से पब्लिक सेक्टर बैंकों का मुनाफा लगातार बढ़ा है. इन बैंकों का कुल ऑपरेटिंग प्रॉफिट 3.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि नेट प्रॉफिट 11.1 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गया. यह लगातार चौथा साल है जब सरकारी बैंकों ने सामूहिक रूप से मुनाफा दर्ज किया है.
बजट दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य निवेशों से सरकार को 75 हजार करोड़ रुपये डिविडेंड मिलने की उम्मीद है. मौजूदा वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 71 हजार करोड़ रुपये था.
डिविडेंड और आरबीआई का सरप्लस ट्रांसफर सरकार की नॉन टैक्स रेवेन्यू कैटेगरी में आता है. केंद्र सरकार को अगले वित्त वर्ष में कुल 6.66 लाख करोड़ रुपये नॉन टैक्स रेवेन्यू मिलने का अनुमान है. हालांकि यह आंकड़ा 2025-26 के 6.67 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम है.
वहीं टैक्स से होने वाली कमाई का अनुमान 28.66 लाख करोड़ रुपये लगाया गया है, जो मौजूदा वित्त वर्ष के 26.74 लाख करोड़ रुपये से 7.18 प्रतिशत ज्यादा है.
जानकारों का मानना है कि अगर आरबीआई इस बार रिकॉर्ड डिविडेंड देता है तो सरकार को वित्तीय घाटा नियंत्रित रखने, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ाने और वैश्विक संकट से पैदा होने वाले आर्थिक दबाव को संभालने में बड़ी राहत मिल सकती है.
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