RBI Forex Policy New Rules: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने और रुपये को स्पीड देने के लिए मास्टरस्ट्रोक चला है. रिजर्व बैंक ने रुपये की सेफ्टी के लिए कुछ नियमों में ढील देने के साथ फॉरेक्स ट्रेड पर लगे प्रतिबंधों को वापस लेने का फैसला लिया है. ऐसा करने से बाजार में रुपये की लिक्विडिटी बढ़ेगी. साथ ही विदेशी निवेशक का भरोसा रुपये के लिए बढ़ेगा.
क्या है आरबीआई का मास्टरस्ट्रोक?
दरअसल मिडिल ईस्ट में चल रही जंग और डॉलर की मजबूती की वजह से रुपया गिर रहा था. इसे रोकने के लिए रिजर्व बैंक ने कई नियम लागू किए थे, जिन्हें अब वापस ले लिया है. आरबीआई ने बताया कि कुछ डीलरों, जिसमें बैंक और वित्तीय संस्थाएं शामिल हैं, उन्हें फॉरेन करेंसी मैनेजमेंट करने में ज्यादा छूट दी जा रही हैं. यानी मार्केट के हिसाब से वो अब लेन-देन कर सकते हैं.

RBI Forex Policy New Rules
क्यों दी जा रही नियमों में ढील?
मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार जब ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में इजाफा होता है, साथ में अमेरिकी फेडरल बैंक अपनी पॉलिसी में कोई बदलाव करता है तो इसका सीधा असर विकासशील देशों की करेंसी पर पड़ता है, जिसमें भारत शामिल है. इसलिए रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव ना हो, इसके लिए रिजर्व बैंक ने सट्टेबाजी को रोकने के लिए नियम बनाए थे. अब जब देश के पास मजबूत फॉरेक्स रिजर्व मौजूद है, इसके अलावा देश की अर्थव्यवस्था स्टेबल है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इन नियमों में कुछ छूट दे रहा है.
फैसले का मार्केट पर असर
सबसे बड़ा फायदा होगा कि मार्केट में अब विदेशी करेंसी का फ्लो बढ़ेगा. नियमों में ढ़ील की वजब से ट्रांजैक्शन कॉस्ट घटेगी. एक्सपोर्ट और इंपोर्ट के लिए ये खबर किसी खुशखबरी से कम नहीं है, क्योंकि अब वो फॉरेन करेंसी के रिस्क को अपने हिसाब से मैनेज कर पाएंगे. इसके अलावा विदेशी निवेशक भी आसानी ने भारत में निवेश कर पाएंगे, साथ ही उनके लिए भी रिस्क को कम करना पहले के मुकाबले और आसान हो जाएगा.
RBI के इस कदम पर क्या बोले एक्सपर्ट?
मार्केट एक्सपर्ट ने इस फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि आरबीआई का ये फैसला समय से लिया हुआ है. मार्केट खुलेगा, जिससे करेंसी का फ्लो एक बार फिर पुरानी स्पीड से बढ़ेगा. हां, अगर जरूरत पड़ी तो फिर से रिजर्व बैंक नियमों को टाइट कर सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार RBI के इस कैलिब्रेटेड अप्रोच पक्का करता है कि देश में आर्थिक विकास की स्पीड भी ना स्लो हो और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी भी बनी रहे.
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