मध्य पूर्व एशिया में पिछले 52 दिनों से जारी भीषण युद्ध और कूटनीतिक गतिरोध का सीधा प्रहार अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा यानी तेल बाजार पर पड़ रहा है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जारी बाधाओं के कारण दुनिया के ऊर्जा बाजारों में तबाही के संकेत मिल रहे हैं.
संयुक्त अरब अमीरात के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए हैं. उन्होंने बताया कि युद्ध के शुरुआती 50 दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली सप्लाई में 60 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही बाधित हुई है.
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डॉ अल जाबेर ने कहा, '50 दिनों से एलएनजी, जेट ईंधन और उर्वरक की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है. तेल का हर एक बैरल ब्लॉक होने का मतलब है आम आदमी की जेब पर बोझ. वैश्विक अर्थव्यवस्था अब और अधिक अनिश्चितता बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है.'
'प्रोटेक्शन रैकेट' जैसे हालात, UAE की सख्त टिप्पणी
यूएई ने अमेरिका और ईरान से मांग की है कि इस रणनीतिक जलमार्ग को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह खोला जाए. डॉ. सुल्तान ने कड़े शब्दों में कहा कि जहाजों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) देने के बदले भुगतान मांगना किसी 'प्रोटेक्शन रैकेट' जैसा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी दुनिया की संपत्ति है और इसे इसके पुराने स्वरूप में लौटाया जाना चाहिए.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल, $95 के पार तेल
सप्लाई में आ रही इस भारी रुकावट का असर कीमतों पर दिखना शुरू हो गया है. सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत 5% की छलांग लगाकर 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई. बता दें कि दुनिया के कुल तेल बाजार का करीब 20% हिस्सा इसी रूट से गुजरता है, जिस पर फिलहाल अमेरिका और ईरान का सख्त नियंत्रण है.
भारतीय जहाजों पर हमले और कूटनीतिक जीत
समुद्री सुरक्षा पर नजर रखने वाली संस्था UKMTO के मुताबिक, पिछले शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन जहाजों पर हमले हुए, जिनमें दो भारतीय ध्वज वाले जहाज शामिल थे. ईरानी सेना (IRGC) की गन बोट्स ने भारतीय तेल टैंकरों पर गोलीबारी की और प्रोजेक्टाइल से हमला किया.
हालांकि, इस तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर भी आई है. भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारतीय कच्चे तेल का टैंकर 'देश गरिमा' 31 नाविकों के साथ सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने में सफल रहा. यह जहाज 22 अप्रैल 2026 को मुंबई पहुंचेगा. जानकारों का मानना है कि इस टैंकर का सुरक्षित निकलना भारत की मजबूत कूटनीति का परिणाम है.
ट्रंप के फैसले से बढ़ी चिंता
वर्तमान में युद्धविराम की अवधि समाप्त हो रही है. सऊदी अरब जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों को डर है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने के फैसले से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है. फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें बुधवार को खत्म हो रहे युद्धविराम और उसके बाद होने वाली हलचल पर टिकी हैं.
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