सोमवार की सुबह भारतीय रुपये के लिए एक बड़ा झटका लेकर आई है. दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल का असर अब हमारी करेंसी पर साफ दिखने लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फेल होने और कच्चे तेल की कीमतों में आई सुनामी के कारण रुपया शुरुआती कारोबार में ही 49 पैसे टूटकर 93.32 के स्तर पर पहुंच गया. पिछले दो हफ्तों से जो थोड़ी-बहुत राहत दिख रही थी, वह अब पूरी तरह गायब हो गई है.
क्यों टूटा रुपया? ये हैं बड़ी वजहें
बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ता तनाव रुपये की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह है. अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की उम्मीद टूटने के बाद निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है. जब विदेशी निवेशक (FIIs) अपना पैसा निकालते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है.
इससे पहले शुक्रवार को रुपया 92.83 पर बंद हुआ था, लेकिन आज यह सीधे 93.30 पर खुला और देखते ही देखते 93.32 के पार निकल गया.
कच्चे तेल में लगी आग और 'डॉलर' का दबदबा
रुपये पर इस वक्त दोहरी मार पड़ी है. एक तरफ ब्रेंट क्रूड 7% से ज्यादा उछलकर 102.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. अमेरिका ने सोमवार से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी (Blockade) करने का ऐलान किया है, जिससे तेल की सप्लाई रुकने का डर है. भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल बाहर से खरीदता है, ऐसे में तेल महंगा होने से भारत का खर्च बढ़ेगा. दूसरी तरफ, दुनिया की छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती बताने वाला डॉलर इंडेक्स भी 0.38% बढ़कर 98.81 पर पहुंच गया है.
शेयर बाजार में हाहाकार का भी दिखा असर
भारतीय रुपये की कमजोरी का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखा. सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 1600 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी करीब 2% नीचे लुढ़क गया. जब शेयर बाजार गिरता है, तो करेंसी मार्केट में भी घबराहट बढ़ जाती है. हालांकि, शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने ₹672 करोड़ की खरीदारी की थी, लेकिन आज के युद्ध जैसे हालात ने निवेशकों को डरा दिया है.
फॉरेक्स रिजर्व में उछाल, लेकिन चुनौतियां बरकरार
अच्छी खबर यह है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 3 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में 9.06 अरब डॉलर बढ़कर 697.12 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. इससे पहले इसमें भारी गिरावट आई थी. हालांकि, एशियाई विकास बैंक (ADB) ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा चला, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. तेल की बढ़ती कीमतें और व्यापार में रुकावट भारत की रफ्तार को धीमा कर सकती हैं.
क्या आगे और गिरेगा रुपया?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब तक रिजर्व बैंक (RBI) के कुछ अहम फैसलों की वजह से रुपये को सहारा मिल रहा था, लेकिन अब वो सपोर्ट खत्म हो गया है. आने वाले दिनों में रुपये की चाल पूरी तरह से कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी फंड्स के आने-जाने पर टिकी होगी. अगर कच्चा तेल 100 डॉलर के ऊपर बना रहता है, तो रुपये पर दबाव और बढ़ेगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं