भारत के केंद्रीय बैंक RBI अगले 5 साल में अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा सकता है, जबकि फॉरेक्स रिजर्व में से डॉलर की हिस्सेदारी कम कर सकता है. और केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के 72 अन्य देशों का भी कुछ ऐसा ही प्लान है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने मंगलवार को सर्वे रिपोर्ट जारी करते हुए बताया है कि दुनिया के केंद्रीय बैंक अगले 5 साल में अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाएंगे, जबकि इस दौरान कुल रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी में कमी देखने को मिलेगी. WGC के सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व सर्वे में बताया गया कि 84% केंद्रीय बैंकों का यही मानना है.
अगले 5 साल में इन देशों के के कुल रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़ेगी. पिछले साल ये आंकड़ा 76% पर था. WGC के इस सर्वेक्षण में दुनिया के 73 केंद्रीय बैंक शामिल हैं, जिसमें से 17 विकसित अर्थव्यवस्थाओं और 56 विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से हैं.
अगले 5 साल में क्या है केंद्रीय बैंकों का प्लान?
WGC के सर्वेक्षण में 74% केंद्रीय बैंकों ने कहा कि अगले पांच वर्षों में डॉलर की हिस्सेदारी कुल रिजर्व में कम होगी. वहीं, 15% ने कहा कि इसमें कोई बदलाव होगा. वहीं, 11% ने कहा कि डॉलर की हिस्सेदारी रिजर्व में बढ़ेगी. हालांकि,उत्तदाताओं ने कहा कि डॉलर वैश्विक स्तर पर रिजर्व करेंसी बना रहेगा.
गोल्ड और डॉलर पर एक साल का प्लान क्या है?
सर्वेक्षण के मुताबिक, 89% देशों के केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले 12 महीनों में वैश्विक केंद्रीय बैंक गोल्ड की हिस्सेदारी अपने रिजर्व में बढ़ाएंगे. वहीं, 11% ने कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा.
सर्वेक्षण में जब पूछा गया कि क्या उनका केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में गोल्ड रिजर्व बढ़ाएगा तो 45% ने इसका समर्थन किया. वहीं, 54% ने कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा. एक फीसदी गिरावट के पक्ष में थे.
मई में केंद्रीय बैंकों ने खरीदा 20 टन सोना
इससे पहले WGC की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में बताया गया था कि मई में केंद्रीय बैंकों ने 20 टन सोना खरीदा है, जो कि अप्रैल के 16 टन से अधिक है. हालांकि, बीते 12 महीने के औसत 27 टन से कम है. WGC ने कहा कि सोने में खरीदारी की वजह वैश्विक स्तर पर अस्थिरता है. इसके चलते केंद्रीय लगातार अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं.
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