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क्या D-Street पर हुआ बड़ा घोटाला? राजेश एक्सपोर्ट्स पर 15 लाख करोड़ रुपये की फर्जी कमाई दिखाने का आरोप

राजेश एक्सपोर्ट्स लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार में एक प्रमुख नाम रही है. कंपनी का दावा था कि वह दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी निर्यात कंपनियों में से एक है.

क्या D-Street पर हुआ बड़ा घोटाला? राजेश एक्सपोर्ट्स पर 15 लाख करोड़ रुपये की फर्जी कमाई दिखाने का आरोप
SEBI की कार्रवाई के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5 प्रतिशत की गिरावट, लगा लोअर सर्किट
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बेंगलुरु स्थित सालों तक राजेश एक्सपोर्ट्स भारत की सबसे सफल कंपनियों में गिनी जाती रही. कंपनी सोने और अन्य कीमती मेटल्स की रिफाइनिंग करती थी, दुनिया भर में जूलरी का निर्यात करती थी और उसकी सालाना आय अक्सर भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल होती थी. लेकिन अब कंपनी की इस सफलता की कहानी पर गंभीर सवाल उठ गए हैं. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ जांच में आरोप लगाया है कि कंपनी समूह स्तर पर जितनी आय दिखा रही थी, उसका बड़ा हिस्सा वास्तविक रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों से सत्यापित नहीं किया जा सका.

वहीं, अब सेबी द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और शेयर लोअर सर्किट पर पहुंच गया. सेबी ने कंपनी पर व्यापक वित्तीय अनियमितताओं, जांच में सहयोग नहीं करने और राजस्व को बढ़ाकर दिखाने के आरोप लगाए हैं.

कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर बीएसई पर अपने पिछले बंद 110.15 रुपए की तुलना में गुरुवार को 4.99 प्रतिशत गिरकर 104.65 रुपए पर खुला, और शेयरों में लोवर सर्किट लग गया. शेयरों का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 239 रुपए और न्यूनतम स्तर 80.11 रुपए है.

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सेबी ने 3 जून को जारी अंतरिम आदेश में प्रारंभिक तौर पर ऐसे साक्ष्य मिलने की बात कही है, जिनसे संकेत मिलता है कि कंपनी द्वारा दिखाए गए लगभग 97 से 99 प्रतिशत राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया हो सकता है.

आदेश में कहा गया है, 'मामले में पहली नजर में जो असामान्यताएं सामने आई हैं, जिनमें कंपनी के लगभग 97 प्रतिशत से 99 प्रतिशत राजस्व को बढ़ाकर दिखाया गया है, वे बेहद गंभीर और अभूतपूर्व हैं.'

प्रारंभिक निष्कर्षों को बेहद गंभीर और अभूतपूर्व बताते हुए सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय ने कहा कि निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तत्काल नियामकीय हस्तक्षेप आवश्यक था.

इसके अलावा, बाजार नियामक ने प्रमोटर राजेश मेहता को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों की खरीद, बिक्री या किसी भी प्रकार के लेन-देन से रोक दिया है.

हालांकि, सेबी ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह जांचकर्ताओं के साथ पूरी तरह सहयोग करे और अपने वित्तीय विवरणों तथा संबंधित पक्षों के लेन-देन की सही और निष्पक्ष जानकारी उपलब्ध कराए.

यह मामला मार्च 2024 में प्राप्त एक शेयरधारक की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें कंपनी की पुस्तकों में दिखाए गए बड़े व्यापारिक देयकों को लेकर चिंता जताई गई थी.

प्रारंभिक समीक्षा के बाद सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 की अवधि को कवर करते हुए जांच शुरू की और बीडीओ इंडिया सर्विसेज को फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया.

आदेश के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने जांच के दौरान कई बार प्रमुख लेखा प्रणालियों, वित्तीय रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेजों तक पहुंच उपलब्ध नहीं कराई, जिससे फॉरेंसिक ऑडिटर कई लेन-देन की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका.

केवल कुछ चुनिंदा लेन-देन के लिए ही आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, जबकि मूल लेखा आंकड़ों तक पहुंच नहीं मिलने के कारण कई वित्तीय आंकड़ों का सत्यापन प्रभावित हुआ.

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सेबी ने सिंगापुर और स्विट्जरलैंड सहित कई विदेशी सहायक और अप्रत्यक्ष सहायक कंपनियों की वित्तीय रिपोर्टिंग की भी समीक्षा की.

नियामक ने यह भी आरोप लगाया कि धनराशि को ऐसे ढांचों के माध्यम से भेजा गया हो सकता है, जिनसे उसके वास्तविक स्रोत और अंतिम गंतव्य को छिपाया गया. इससे कंपनी के वित्तीय खुलासों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं.

आदेश में फिर कहा गया, 'मामले में पहली नजर में सामने आई असामान्यताएं, जहां कंपनी के लगभग 97 प्रतिशत से 99 प्रतिशत राजस्व को बढ़ाकर दिखाया गया है, बेहद गंभीर और अभूतपूर्व हैं.'

बाजार नियामक ने राजेश एक्सपोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वह जांचकर्ताओं द्वारा मांगी गई सभी लंबित जानकारियां 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए. इसके साथ ही कंपनी के खातों और लेन-देन की अधिक व्यापक जांच के लिए एक नए फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति का भी आदेश दिया गया है.

इस नियामकीय कार्रवाई का असर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयरों पर भी पड़ा, और कारोबार के दौरान एलआईसी का शेयर करीब 1 प्रतिशत तक गिर गया, क्योंकि एलआईसी के पास राजेश एक्सपोर्ट्स में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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