Rajesh Exports: दिग्गज गोल्ड रिफाइनर और ज्वेलरी एक्सपोर्ट कंपनी 'राजेश एक्सपोर्ट्स' (Rajesh Exports) के फाउंडर और चेयरमैन राजेश मेहता ने कंपनी और उसके प्रमोटर्स पर लगे फंड हेरफेर (Fund Diversion) के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. मंगलवार को समाचार एजेंसी PTI से बातचीत करते हुए राजेश मेहता ने साफ कहा कि सेबी (SEBI) ने सिर्फ कुछ टिप्पणियां की हैं. फंड की कोई हेराफेरी नहीं हुई है. उन्होंने दावा किया कि मार्केट रेगुलेटर SEBI कंपनी की 'अकाउंटिंग एंट्रीज' को शायद ठीक से समझ नहीं पाया है.
उन्होंने दावा किया कि 'सबसे खराब स्थिति' जैसी कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा, 'SEBI का ये फाइल ऑर्डर नहीं, बल्कि अंतरिम आदेश है. मुझे SEBI की समझदारी पर पूरा भरोसा है. एक बार जब हम उन्हें स्पष्टीकरण दिखा देंगे, तो सब ठीक हो जाएगा. मुझे यकीन है कि वे समझदार लोग हैं. वे सही तरीके से आदेश पारित करेंगे.' इससे पहले NDTV Profit को सबसे पहले दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में राजेश मेहता ने ये भी कहा था कि कंपनी ने सेबी को 400 GB का डॉक्युमेंट भेजा है, जिसे पढ़ने-देखने में समय लग सकता है.
राजेश मेहता का ये बयान ऐसे समय में आया है जब कंपनी को प्रमोटर-कंट्रोल्ड यूनिट 'एलेस्ट लिमिटेड' (Elest Ltd) और सहायक कंपनी 'एसीसी एनर्जी' (ACC Energy) में कथित वित्तीय अनियमितताओं के चलते PLI स्कीम यानी 'प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव' योजना से बाहर किए जाने के खतरे का सामना करना पड़ रहा है.
सेबी चेयरमैन का बयान- कानूनी प्रक्रिया का पालन हो
इससे ठीक एक दिन पहले, सोमवार को SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने इसे अर्द्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) प्रक्रिया माना था. मुंबई में 'इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस' के इतर इस मामले पर सवाल पूछे जाने पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था. हालांकि उन्होंने कहा कि ये मामला एक अर्द्ध-न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए इस पर मीडिया में कोई बयान नहीं दिया जा सकता.
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा, 'सिद्धांत के तौर पर हम मीडिया में किसी व्यक्तिगत मामले पर टिप्पणी नहीं करते हैं. यह एक अर्द्ध-न्यायिक प्रक्रिया है जिसमें आदेश जारी किए जाते हैं, और या तो उनका पालन किया जाना चाहिए या फिर कानून द्वारा प्रदान की गई प्रक्रियाओं के माध्यम से उन्हें (अदालत में) चुनौती दी जानी चाहिए. इसलिए, मैं इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा.'
ये प्रतिक्रियाएं सेबी के उस अंतरिम आदेश के बाद आई है, जिसमें राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और CEO राजेश मेहता पर वित्तीय अनियमितताओं, फंड डायवर्जन और संबंधित पक्षों के लेन-देन (Related-Party Transactions) के पर्याप्त खुलासे न करने के आरोपों के तहत कंपनी की सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग करने पर रोक लगा दी गई थी.
सेबी से हुई बुनियादी अकाउंटिंग की गलती: राजेश मेहता
इससे पहले रविवार को भी राजेश मेहता ने एक इंटरव्यू में अपनी कंपनी का पक्ष मजबूती से रखा था. उन्होंने बताया कि कंपनी पहले ही सेबी को 300 से 400 गीगाबाइट (GB) के दस्तावेज सौंप चुकी है, जो लाखों पन्नों में हैं. मेहता ने कहा, 'मुझे लगता है कि वे सही दस्तावेज नहीं ढूंढ पाए हैं और सारा भ्रम वहीं से पैदा हुआ है.'
राजेश मेहता ने NDTV के साथ इंटरव्यू में कहा था कि 3 जून को जारी अपने अंतरिम आदेश में सेबी ने कंपनी के Ebitda (एबिटडा - यानी ग्रॉस प्रॉफिट) के आंकड़ों को रेवेन्यू (राजस्व/टर्नओवर) मान लिया.
सेबी का आरोप है कि वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच कंपनी ने अपने रेवेन्यू को 15.15 लाख करोड़ रुपये बढ़ा-चढ़ाकर (Inflate) दिखाया. मेहता ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या को देखकर रेगुलेटर ने बहुत बड़ी गलती की है.
ज्वलरी शॉप के उदाहरण से समझाया पूरा गणित
राजेश मेहता ने इस कथित गलती को एक आभूषण की दुकान के उदाहरण से समझाया. उन्होंने कहा कि राजेश एक्सपोर्ट्स जैसी हाई-वॉल्यूम और लो-मार्जिन वाली गोल्ड बुलियन कंपनी में गणित कुछ अलग होता है. वे बोले-
- यदि कोई ग्राहक शोरूम से 30,000 रुपये में 2 ग्राम सोना खरीदता है, तो बिल 30,000 रुपये का बनेगा, जो कंपनी का रेवेन्यू है.
- इस ट्रांजैक्शन पर ग्रॉस प्रॉफिट (Ebitda) 1,000 रुपये होगा और नेट प्रॉफिट 500 रुपये होगा.
- मेहता का आरोप है कि सेबी ने 30,000 रुपये के रेवेन्यू के बजाय 1,000 रुपये के ग्रॉस प्रॉफिट को ही रेवेन्यू मान लिया.
- उन्होंने कहा, 'सेबी को 500 के नेट प्रॉफिट पर कोई आपत्ति नहीं है, वे उसे स्वीकार करते हैं. लेकिन वे 1,000 रुपये के एबिटडा को रेवेन्यू कह रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से भ्रम का मामला है.'
- उन्होंने आगे कहा कि कंपनी 100 रुपये में सोना खरीदती है और 101 रुपये में बेचती है, जिससे 1 रुपये का ग्रॉस प्रॉफिट होता है. सेबी ने पूरे 101 रुपये के बजाय इस 1 रुपये को ही रेवेन्यू की तरह ट्रीट किया है.
'रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने का कोई फायदा नहीं'
चेयरमैन ने तर्क दिया कि कोई भी कंपनी अपना रेवेन्यू (Top-Line) क्यों बढ़ाएगी? अगर किसी को हेरफेर करनी ही होगी, तो वह अपना मुनाफा (Bottom-Line/Profit) बढ़ाएगा ताकि कोई फायदा मिल सके. रेवेन्यू बढ़ाने से किसी को कोई फायदा नहीं होता. उन्होंने कहा कि कानूनन पूरा रेवेन्यू दिखाना उनकी मजबूरी है, वरना अगर सेबी इजाजत दे तो वे पूरी टॉप-लाइन को हटा दें.
उन्होंने जोर देकर कहा कि कंपनी और उसके प्रमोटर्स 100% कर्ज-मुक्त (Debt-Free) हैं और पिछले 40 सालों में उन्होंने दुनिया में कहीं भी अपने शेयर गिरवी (Pledge) नहीं रखे हैं.
15 दिनों में दोबारा सौंपेंगे दस्तावेज, शेयरहोल्डर्स को भरोसा
अपने ऊपर लगे ट्रेडिंग बैन पर मेहता ने कहा कि उन्होंने जीवन में कभी ट्रेडिंग नहीं की है, इसलिए वे इस बैन से परेशान नहीं हैं. शेयरों में लोअर सर्किट लगने को उन्होंने 'अस्थायी' बताया और उम्मीद जताई कि मामला सुलझते ही शेयर अपनी पुरानी स्थिति में लौट आएंगे.
कंपनी इस मामले को सुलझाने के लिए अगले 15 दिनों के भीतर सेबी के पास सभी जरूरी दस्तावेज दोबारा जमा करने जा रही है.
मेहता ने कहा कि वे किसी भी नई फोरेंसिक ऑडिट या जांच के लिए तैयार हैं और उनके दफ्तर और अकाउंट बुक्स किसी भी समय निरीक्षण के लिए खुले हैं. उन्होंने सेबी की बुद्धिमत्ता पर भरोसा जताते हुए कहा कि स्पष्टीकरण देखने के बाद नियामक सही आदेश पारित करेगा. शेयरधारकों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी ने कुछ गलत नहीं किया है और उसके खाते पूरी तरह साफ-सुथरे हैं.
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