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अब रेल दुर्घटना के बाद हर राज से उठेगा पर्दा, ट्रेनों में भी विमान जैसे लगेगा 'ब्लैक बॉक्स'

भारतीय रेल अब ट्रेन एक्सीडेंट के बाद उठने वालों सवालों पर विराम लगाने के लिए कमर कस लिया है. इसी के तहत रेलवे ने अब प्लेन की तरह ट्रेनों में भी ब्लैक बॉक्स लगाने का फैसला लिया है. हालांकि, फिलहाल ट्रायल के तौर पर मात्र 26 ट्रेनो के इंजनों में हाई रिजोल्यूशन कैमरे और ऑडियो रिकॉर्डर लगाने का फैसला किया है.

अब रेल दुर्घटना के बाद हर राज से उठेगा पर्दा, ट्रेनों में भी विमान जैसे लगेगा 'ब्लैक बॉक्स'
भारतीय रेल ने रेल दुर्घटना के बाद उठने वाले सवालों पर विराम लगाने और रेल हादसे की असली सच्चाई जानने के लिए ट्रेनों के इंजन में प्लेन की तरह ब्लैक बॉक्स लगाने का फैसला लिया है.
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देश में बढ़ रेल दुर्घटना के बीच लगातार उठ रही साजिश की आशंका के मद्देनजर रेलवे ने रेल हादसे के बाद उठने वाले सवालों पर लगाम लगाने के लिए 'ब्लैक बॉक्स' लगाने का फैसला किया है. इसकी मदद से पटरी पर दौड़ रही ट्रेनों और चालक दल की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी. इसके साथ ही अब रेल हादसे के बाद अटकलबाजियाों पर विराम लग जाएगा.

दरअसल,  उत्तर मध्य रेलवे ने ट्रेन हादसों की सच्चाई जानने के लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली की शुरुआत की है. इसके तहत इसके तहत ट्रेनों के इंजन में छह हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे और वॉइस रिकॉर्डर लगाए गए हैं. रेलवे बोर्ड के निर्देश पर इंजन के आगे और पीछे एक-एक कैमरा और चालक केबिन के भीतर चार कैमरे लगाए गए हैं. इसके अलावा वॉयस रिकॉर्डर लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की बातचीत भी रिकॉर्ड करेगा. बाहरी कैमरे रेलवे ट्रैक और सामने की गतिविधियों को कैद करेगा, जबकि केबिन के अंदर लगे कैमरे चालक दल की गतिविधियों को रिकॉर्ड करेगा. रेलवे के अफसरों के मुताबिक, किसी दुर्घटना या असामान्य स्थिति में इन रिकॉर्डिंग के आधार पर बड़े ही आसानी के साथ कारणों की सटीक जांच संभव हो पाएगी.

26 ट्रेनों में इस नई तकनीक का होगा परीक्षण

सूत्रों के अनुसार, यह प्रणाली विमान के ब्लैक बॉक्स की तर्ज पर काम करेगी और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी. इस योजना की खास बात ये है कि इस बार विदेशी तकनीक की जगह अधिक सुरक्षित सुरक्षित स्वदेशी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा. इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए एनसीआर के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि रेलवे बोर्ड के आदेश के मुताबिक फिलहाल 26 ट्रेनों में इस नई तकनीक का परीक्षण शुरू किया जाएगा.

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दरअसल, कुछ माह पहले गाजियाबाद में एक स्लीपर मॉड्यूल के खुलासे के बाद सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास गुप्त कैमरे बरामद किए गए थे. तब जांच में रेलवे ट्रैक पर लगे सीसीटीवी कैमरों की डेटा फीड पाकिस्तान तक पहुंचने की आशंका जताई गई थी. इसी के बाद रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी. इस समीक्षा बैठक के बाद विदेशी, खासकर चीनी उपकरणों के स्थान पर स्वदेशी तकनीक वाले सुरक्षित कैमरे और रिकॉर्डिंग सिस्टम लगाने का फैसला लिया गया. इन उपकरणों का एक्सेस सिर्फ रेलवे के अधिकृत सिस्टम तक ही सीमित रहेगा. 

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