Railway Bonus: देशभर के लाखों रेलकर्मियों के लिए दिवाली बोनस पर कई अपडेट्स सामने आए हैं. पिछले 10 साल से रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन के PLB यानी प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस के तौर पर 17 हजार 951 रुपये दिए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार रेलकर्मी इतनी राशि पर मानने नहीं वाले. केंद्र सरकार ने अभी रेलवे बोनस का ऐलान नहीं किया है, पर रेलकर्मियों के अलग-अलग संगठनों ने 46,159 रुपये बोनस दिए जाने की मांग की है. वहीं दूसरी ओर वाम नेता और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने (John Brittas) ने रेलकर्मियों की इस मांग के साथ रेलमंत्री को पत्र भी लिखा है.
7,000 नहीं 18,000 पर हो बोनस का कैलकुलेशन
रेलवे कर्मचारियों को हर साल 78 दिनों के वेतन के बराबर PLB दिया जाता है, लेकिन इसका कैलकुलेशन 7,000 रुपये की मिनिमम बेसिक सैलरी यानी न्यूनतम वेतन के आधार पर किया जाता है. इसे ऐसे कैलकुलेट किया जाता है-
- एक दिन का वेतन = 7,000 ÷ 30.41 = 230.14 रुपये
- अब बोनस= 78 दिन का वेतन= 230.14 x 78 = 17,951 रुपये
ऑल इंडिया रेलवे ट्रैकमेंटेनर ग्रुप के मीडिया प्रभारी रमेश कुमार का तर्क है कि रेलकर्मियों को सैलरी, सातवें वेतन आयोग के आधार पर मिलती है तो बोनस के कैलकुलेशन के लिए छठे वेतन आयोग की मिनिमम सैलरी 7,000 रुपये को आधार क्यों बनाया जा रहा है.
IREF यानी इंडियन रेलवे एम्प्लॉईज फेडरेशन के महासचिव सर्वजीत सिंह का कहना है कि इसकी बजाय 7वें वेतन आयोग की मिनिमम बेसिक सैलरी 18,000 को आधार मानकर बोनस का कैलकुलेशन करना चाहिए. अगर ऐसे कैलकुलेट किया गया तो,
- एक दिन का वेतन = 18,000 ÷ 30.41 = 591.78 रुपये
- रेलवे बोनस= 78 दिन का वेतन= 591.78 x 78 = 46,159 रुपये
रेल यूनियनों का कहना है कि महंगाई और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच 7,000 रुपये की कैपिंग कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं करती. लगातार रेलवे यूनियन संगठनों की आपत्ति के बावजूद बोनस की राशि नहीं बढ़ रही है, ऐसे में रेलवे कर्मचारियों में काफी नाराजगी है.

राज्यसभा MP ने रेल मंत्री को लिखा पत्र
रेलवे बोनस के मुद्दे पर राज्यसभा सांसद और CPI(M) नेता जॉन ब्रिटास ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के बोनस के लिए भुगतान वाले दिनों की संख्या बढ़ाने और कैलकुलेशन की सीमा में संशोधन का आग्रह किया है.
पत्र के मुताबिक, रेलवे कर्मचारियों को फिलहाल 78 दिनों के वेतन के बराबर बोनस मिलता है, लेकिन इसके कैलकुलेशन के लिए मासिक वेतन की अधिकतम सीमा 2013-14 से 7,000 रुपये बनी हुई है.

जॉन ब्रिटास ने श्रमिक संगठन सीटू की मांग का हवाला देते हुए बोनस कैलकुलेशन की सीमा कम से कम 28,440 रुपये प्रति महीने करने की अपील की है. ये आंकड़ा न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते के आकलन पर आधारित बताया गया है.
उन्होंने कहा कि त्योहारों का समय देखते हुए सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए, ताकि कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिल सके.
कोल और सेल में 2 से 3 गुना हो गया बोनस, रेलवे में स्थिर क्यों?
रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि कोल इंडिया और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में भी प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस मिलता रहा है, लेकिन पिछले 10 साल में ये 2 से 3 गुना हो गया है, जबकि रेलवे का बोनस स्थिर है.
कोल और सेल के कर्मचारियों के बोनस में लगातार साल-दर-साल बढ़ोतरी हो रही है. पिछले साल कोल इंडिया के कर्मचारियों को 1.03 लाख रुपये और सेल कर्मचारियों को करीब 29,500 रुपये बोनस मिला था. इस साल कोल इंडिया कर्मियों को 1.10 लाख और सेल कर्मियों को 40 हजार रुपये बोनस मिलने की चर्चा है. ऐसे में रेलवे कर्मचारियों के बीच इस अंतर को लेकर असंतोष है.
भारतीय रेलवे मजदूर संघ के नेशनल प्रेसिडेंट पवन कुमार का कहना है कि रेलवे में सातवां वेतन पहले से लागू है, अब 8वां वेतन लागू होने वाला है. ऐसी परिस्थिति में छठे वेतन आयोग के बेसिक के आधार पर बोनस मिलना सरासर अन्याय जैसा है. उन्होंने कहा कि बोनस कैलकुलेशन में सीलिंग बढ़ाने के लिए संघ, लगातार रेल मंत्रालय और भारत सरकार पर दबाव बना रहा है.

जल्द ही बोनस का ऐलान कर सकती है सरकार
केंद्र सरकार अगले हफ्ते तक रेल कर्मचारियों के सालाना बोनस का ऐलान कर सकती है. ऐसी संभावना जताई जा रही है कि कैबिनेट मीटिंग में इस पर फैसला लिया जाएगा. इस बार भी रेल कर्मचारियों को 78 दिनों का बोनस मिलने की संभावना है, लेकिन सवाल यही है कि 7,000 रुपये की सीलिंग हटती है या नहीं.
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