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UPI की रिकॉर्ड तोड़ पारी, फिर भी बाजार में 'कैश है किंग': जानें क्या कहते हैं ताज़ा आंकड़े

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत 'Cashless' नहीं बल्कि 'Less Cash' अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ सकता है, जहां डिजिटल और नकदी दोनों साथ-साथ इस्तेमाल होंगे.

UPI की रिकॉर्ड तोड़ पारी, फिर भी बाजार में 'कैश है किंग': जानें क्या कहते हैं ताज़ा आंकड़े
डिजिटल पेमेंट बढ़े, लेकिन कैश की मांग भी बढ़ती रही

भारत में डिजिटल पेमेंट सिस्टम लगातार तेजी से बढ़ रहा है. FY26 के दौरान देश में UPI ट्रांजैक्शन में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके साथ ही RBI का Digital Payments Index भी और ऊपर पहुंच गया. इसका मतलब है कि लोग पहले के मुकाबले ज्यादा डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं और QR Code बेस्ड भुगतान अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद लोगों के पास कैश रखने की आदत कम नहीं हुई. RBI की रिपोर्ट के अनुसार देश का Currency-to-GDP Ratio भी बढ़ा है. आसान भाषा में समझें तो अर्थव्यवस्था में कैश का इस्तेमाल और लोगों के पास रखी नकदी दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली है.

इससे साफ होता है कि भारत में डिजिटल पेमेंट और कैश दोनों साथ-साथ चल रहे हैं. लोग ऑनलाइन पेमेंट जरूर कर रहे हैं, लेकिन नकदी को पूरी तरह छोड़ने के लिए अभी तैयार नहीं हैं.

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पिछले कुछ वर्षों में भारत में QR Code आधारित पेमेंट सिस्टम ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की है. अब छोटी दुकानों, सब्जी विक्रेताओं, मेडिकल स्टोर, रेस्तरां और यहां तक कि गांवों में भी लोग UPI और QR Code से भुगतान कर रहे हैं.

मोबाइल फोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के कारण डिजिटल ट्रांजैक्शन पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गए हैं. यही वजह है कि RBI का Digital Payments Index लगातार मजबूत हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है.

हालांकि इसके बावजूद लोग अपने पास नकदी रखना जरूरी समझते हैं. खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में कैश अभी भी भरोसेमंद भुगतान माध्यम माना जाता है.

डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद लोग कैश क्यों रख रहे हैं?

RBI का कहना है कि डिजिटल पेमेंट का बढ़ना जरूरी नहीं कि लोग नकदी रखना बंद कर दें. दोनों का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जा रहा है.

कई परिवारों के लिए कैश आज भी बचत, घरेलू खर्च और स्थानीय लेनदेन का अहम हिस्सा है. ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार लोग सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली रकम नकद निकालकर अपने पास रखते हैं. इसके अलावा छोटे व्यापार और स्थानीय बाजारों में नकद भुगतान अभी भी काफी आम है.

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भारत में कई लोग डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल सिर्फ सुविधा के लिए करते हैं, लेकिन सुरक्षा और बचत के नजरिए से कैश को बेहतर मानते हैं. यही वजह है कि बैंक से नकदी निकासी का स्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है.

सोने की बढ़ती कीमतों ने भी बढ़ाई कैश की मांग

RBI ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों ने नकदी की मांग बढ़ाने में भूमिका निभाई हो सकती है. FY26 के दौरान Gold Prices लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहीं और इसका असर घरेलू खर्च पर भी पड़ा.

केंद्रीय बैंक के अनुसार साल के दूसरे हिस्से में Core Inflation का लगभग आधा हिस्सा सोने और चांदी की कीमतों से प्रभावित था. यानी Precious Metals की महंगाई ने अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाला.

भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि पारंपरिक बचत का भी बड़ा माध्यम माना जाता है. शादी, त्योहार और भविष्य की सुरक्षा के लिए लोग बड़ी मात्रा में Gold खरीदते हैं. यही वजह है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद लोगों ने सोना खरीदना जारी रखा.

कम मात्रा में आयात, लेकिन ज्यादा कीमत

RBI की रिपोर्ट के अनुसार भारत में Gold Import की मात्रा थोड़ी कम हुई, लेकिन कुल आयात मूल्य बढ़ गया. इसका कारण सोने की ऊंची कीमतें थीं. यानी लोग पहले की तुलना में कम सोना खरीद रहे थे, लेकिन कीमत इतनी ज्यादा थी कि कुल खर्च बढ़ गया.

इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय परिवारों ने महंगे होने के बावजूद Gold में निवेश जारी रखा. विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चित आर्थिक माहौल में लोग सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, इसलिए उसकी मांग बनी रहती है.

भारत में कैश और डिजिटल दोनों का दौर जारी

इन आंकड़ों से साफ है कि भारत में डिजिटल पेमेंट का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन कैश की अहमियत अभी खत्म नहीं हुई है. QR Codes और UPI ने भुगतान को आसान जरूर बना दिया है, लेकिन नकदी आज भी लोगों की आर्थिक आदतों का बड़ा हिस्सा बनी हुई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत 'Cashless' नहीं बल्कि 'Less Cash' अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ सकता है, जहां डिजिटल और नकदी दोनों साथ-साथ इस्तेमाल होंगे.

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