मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से युद्ध शुरू होते ही कच्चा तेल फिर महंगा होने लगा है. सोमवार को ट्रेडिंग के दौरान कच्चे तेल की कीमत बढ़कर एक समय 3% से ज्यादा बढ़कर 79.80 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 10 जुलाई को भारतीय बास्केट वाले कच्चे तेल की कीमत 73.23 डॉलर प्रति बैरल थी. ऐसे में कच्चे तेल की कीमत 78-79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचना भारत के लिए बुरी खबर है, क्योंकि वो अपनी ज़रुरत का करीब 88% कच्चा तेल अंतराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है, जिसका करीब 40% से 45% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है.
'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति तय करेंगी चाल'
जाने-माने तेल अर्थशास्त्री किरीट एस. पारिख मानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव और टकराव लंबा चलता है, तो इससे भारत का तेल और गैस आयात बिल काफी बढ़ सकता है. ईंधन की आपूर्ति में बाधा आ सकती है और दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग मार्गों में से एक पर काम करने वाले भारतीय नाविकों के लिए जोखिम फिर बढ़ सकता है.
एनडीटीवी से बातचीत में किरीट पारेख ने कहा, "अगर मध्य पूर्व एशिया में युद्ध और गहरा जाता है, तो इससे तेल और गैस के आयात पर भारत का खर्च बढ़ जाएगा. ईरान ने कई खाड़ी देशों पर हमला किया है. इससे इन देशों में तेल और गैस का प्रोडक्शन बाधित होने का खतरा है".
एलपीजी के लिए भी समस्या
चुनौती एलपीजी आयात के मोर्चे पर भी बढ़ने की आशंका है. भारत अपनी ज़रुरत का 60% एलपीजी आयात करता है, जिसका करीब 90% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के जरिये भारत पहुंचता है. कच्चा तेल और गैस की कीमत ऐसे समय पर बढ़ने लगी है. जब पेट्रोल-डीजल और एलपीजी पर सरकारी तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी पहले से ही काफी ज्यादा है.
सवाल, भारतीय नाविकों की सेफ्टी का भी
सवाल इस क्षेत्र में काम करने वाले हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा का भी है. किरीट पारिख के अनुसार, "कच्चे तेल और गैस के स्टॉक को लेकर भारत आ रहे टैंकर्स की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और उन्हें सेफ रास्ता दिलाने के लिए भारत को पहल तेज करनी होगी. 11 भारतीय नविको को लेकर जा रहे कार्गो जहाज पर हुआ हमला बेहद चिंताजनक है. इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं. सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि आगे इस तरह के हमले ना हो".
हालांकि, भारत ने मिडिल ईस्ट के टेशन को बहुत ही शानदार तरीके से संभाला. देश के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि, " 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट में जब दुनिया आशंकाओं से घिरी थी, तब भारत ने तैयारी, नीति और नेतृत्व की ताकत दिखाई. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हुआ. भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती घरेलू LPG की उपलब्धता सुनिश्चित करने की थी, क्योंकि करोड़ों परिवारों की रसोई इसी पर निर्भर है."
यह नया भारत है, जो संकट से विचलित नहीं होता; बल्कि अपनी तैयारी, कूटनीति, अटूट इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व के दम पर हर चुनौती को अवसर में बदल देता है।
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) July 13, 2026
21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट में जब दुनिया आशंकाओं से घिरी थी, तब भारत ने तैयारी, नीति और नेतृत्व की ताकत दिखाई।
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मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव फिर बढ़ने से भारत के सामने तेल और गैस के मोर्चे पर चुनौतियां फिर बड़ी हो रही हैं और सरकार को इसके असर से निपटने के लिए जल्द ही पहल तेज करनी होगी.
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