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पेट्रोल पर टैक्‍स घटा, आज से डीजल पर 8.5 रुपये बढ़ गई एक्‍सपोर्ट ड्यूटी, जानिए आप पर क्‍या असर होगा

Petrol-Diesel पर बड़ी खबर: सरकार ने पेट्रोल-डीजल और जेट फ्यूल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्‍स में संशोधन किया है. डीजल पर टैक्‍स बढ़ाया गया है, जबकि पेट्रोल पर घटाया गया है. सवाल है कि क्‍या इस कटौती या बढ़ोतरी का असर आम लोगों पर भी होगा. जवाब जान लें.

पेट्रोल पर टैक्‍स घटा, आज से डीजल पर 8.5 रुपये बढ़ गई एक्‍सपोर्ट ड्यूटी, जानिए आप पर क्‍या असर होगा
Petrol-Diesel पर टैक्‍स में संशोधन किया गया है.
NDTV File Photo

Petrol Diesel Windfall Tax: क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बीच एक बार फिर सरकार ने डीजल और जेट फ्यूल के एक्‍सपोर्ट पर लगने वाला विंडफॉल टैक्‍स बढ़ा दिया है. हालांकि पेट्रोल के एक्‍सपोर्ट पर लगने वाला टैक्‍स कम कर दिया है. वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के मुताबिक, डीजल के एक्‍सपोर्ट पर 8.50 रुपये/लीटर टैक्‍स बढ़ाया गया है, जबकि जेट फ्यूल के एक्‍सपोर्ट पर 7.50 रुपये प्रति लीटर टैक्‍स बढ़ाया गया है.  वहीं पेट्रोल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्‍स में 1.50 रुपये की कटौती की गई है. नई दरें आज 16 जुलाई, गुरुवार से लागू हो गई हैं. 

पेट्रोल-डीजल पर अब कितना लगेगा विंडफॉल टैक्‍स? 

सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को केंद्र ने 8.5 रुपये/लीटर से बढ़ाकर 15.5 रुपये/लीटर कर दिया है. 
जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स को 7.5 रुपये/लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये/लीटर कर दिया गया है.
वहीं, पेट्रोल पर लगने वाली एक्‍सपोर्ट ड्यूटी को सरकार ने 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. यानी इसे डेढ़ रुपये कम किया है. 

सरकार को ये टैक्‍स देती हैं सरकारी कंपनियां 

सरकार, तेल कंपनियों पर ये विंडफॉल टैक्‍स लगाती है. पेट्रोल, डीजल या जेट फ्यूल एक्‍सपोर्ट करने पर तेल कंपनियों को ये टैक्‍स सरकार को देना होता है. केंद्र सरकार ने मार्च में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के एक्‍सपोर्ट पर ये विशेष टैक्‍स लगाया था और तब से हर पखवाड़े इसकी समीक्षा की जा रही है. शुरुआत में डीजल और एटीएफ पर शुल्क लगाया गया था, जबकि मई में पेट्रोल पर भी ये लागू किया गया.

 15 दिन पहले भी किया गया था बदलाव 

केंद्र ने 1 जुलाई को भी पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल पर विंडफॉल टैक्‍स में बदलाव किया था. केंद्र ने डीजल के एक्सपोर्ट पर SAED यानी विशेष अतिरिक्त एक्‍सोर्ट ड्यूटी घटाकर 8.5 रुपये/लीटर कर दिया था, जो कि 1 जुलाई से पहले 14 रुपये/लीटर था. वहीं, एटीएफ यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर शुल्क 12.5 रुपये/लीटर से घटाकर 7.5 रुपये/लीटर कर दिया गया है. दूसरी ओर पेट्रोल के एक्‍सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्‍स को 1.5 रुपये/लीटर से बढ़ाकर 4 रुपये/लीटर कर दिया गया था. अब फिर से डेढ़ रुपये/लीटर टैक्‍स रेट बढ़ाने पर दरें 1 जुलाई के पहले वाले स्‍तर पर आ गई हैं.

क्‍या टैक्‍स बढ़ाने का असर आप पर भी पड़ेगा? 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्‍या विंडफॉल टैक्‍स में किए गए इस बदलाव का असर आप पर भी पड़ेगा, क्‍या पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें भी बढ़ेंगी या घटेंगी. इसका सीधा-सा जवाब है- प्रत्‍यक्ष तौर पर नहीं. जैसा कि हमने ऊपर इशारा किया, इंडियन ऑयल, एचपी या भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियां, जो विदेशों में तेल निर्यात करती हैं, उनपर ये टैक्‍स लगेगा. ये कंपनियां जो तेल विदेशों में एक्‍सपोर्ट करेंगी, ये टैक्‍स उनके लिए हैं. तेल के इंपोर्ट यानी आयात पर टैक्‍स में बढ़ोतरी नहीं की गई है.  

सरकार, विंडफॉल टैक्‍स इसलिए बढ़ाती है, ताकि देश में तेल की कमी न हो और यहां से कम तेल एक्‍सपोर्ट हो. डीजल पर टैक्‍स बढ़ाने का मतलब है कि सरकार चाहती हैं कि देश में डीजल की उपलब्‍धता बनी रहे. वहीं पेट्रोल का स्‍टॉक ज्‍यादा होने या स्थिति सामान्‍य होने के चलते इसमें थोड़ी ढील दी गई है. सरकार के मुताबिक, ये टैक्‍स घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल और जेट फ्यूल की उपलब्धता बैलेंस करने के लिए लगाया जाता है.  

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