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Petrol-Diesel Price: होर्मुज स्ट्रेट फिर बंद होने से कच्चा तेल हुआ महंगा, जानें आज 22 जून को पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today June 22: ईरान ने बंद किया दुनिया का सबसे मुख्य समुद्री रास्ता, आसमान पर पहुंचे कच्चे तेल के दाम. जानिए इस अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच आज 22 जून को भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ या मिली राहत...

Petrol-Diesel Price: होर्मुज स्ट्रेट फिर बंद होने से कच्चा तेल हुआ महंगा, जानें आज 22 जून को पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट
Petrol Diesel Rate Today In India: अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने से पहले पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमतों पर नजर रखना जरूरी है.

Petrol Diesel Price Today: ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. ईरान द्वारा दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद कर दिए जाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखा जा रहा है.हालांकि, इस वैश्विक तनाव के बीच भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं. आम आदमी  के लिए राहत की बात यह है कि देश की सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल  की कीमतों को पूरी तरह स्थिर रखा है.

आज यानी 22 जून 2026 को भी देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई खास बदलाव नहीं किया गया है. आइए जानते हैं कि देश के प्रमुख शहरों में आज पेट्रोल-डीजल का क्या भाव है और किन वजहों से कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है.

देश बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

देशभर में 22 जून को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल पुराने रेट ही बरकरार रखे हैं.

दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. वहीं मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111 रुपये के ऊपर बनी हुई है. हैदराबाद, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा पर बना हुआ है.

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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बदलाव 25 मई को हुआ था. उस समय सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए थे.इसके बाद से देशभर में पेट्रोल-डीजल  की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.

होर्मुज स्ट्रेट फिर बंद, कच्चे तेल में आई तेजी

ग्लोबल मार्केट  में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली.अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस ताजा तेजी की सबसे बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) का दोबारा बंद होना  ईरान ने आरोप लगाया कि इजरायल और अमेरिका ने अंतरिम शांति समझौते का उल्लंघन किया है, जिसके बाद उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया.शिपिंग डेटा के मुताबिक, इस फैसले के बाद रविवार को इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई.

दुनिया भर के कुल पेट्रोलियम और कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. ईरान द्वारा इस रूट पर ब्लॉकबस्टर पाबंदी लगाने से तेल टैंकरों की आवाजाही एक बार फिर  ठप हो गई है, जिससे दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित होने का डर पैदा हो गया है.यही वजह है कि तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया.

ब्रेंट और WTI क्रूड कितना महंगा हुआ?

सोमवार को ब्रेंट क्रूड 54 सेंट यानी 0.67 फीसदी बढ़कर 81.11 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कारोबार के दौरान यह 82.30 डॉलर प्रति बैरल तक गया.वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2.02 डॉलर यानी 2.64 फीसदी की तेजी के साथ 78.62 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. अगस्त डिलीवरी वाला कॉन्ट्रैक्ट 1.43 डॉलर बढ़कर 77.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

अमेरिका-ईरान में भी बढ़ी टेंशन

इस बीच अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच अंतरिम शांति समझौते के तहत पहली बैठक हुई, लेकिन बातचीत की शुरुआत आसान नहीं रही.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर फिर से हमले शुरू करने की चेतावनी दी है. वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका ने लेबनान में संघर्ष रोकने से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया.इन घटनाओं ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है.

पिछले हफ्ते क्यों गिरा था कच्चा तेल?

दिलचस्प बात यह है कि पिछले सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी.बाजार को उम्मीद थी कि खाड़ी क्षेत्र में फंसे तेल कार्गो की आपूर्ति फिर शुरू हो सकती है. इसके अलावा अमेरिका-ईरान समझौते के तहत ईरानी तेल पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत मिलने की संभावना भी जताई जा रही थी. इसी उम्मीद में तेल की कीमतों पर दबाव देखा गया था.

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कैसे तय होते हैं?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का पड़ता है, क्योंकि यही दोनों ईंधनों का मुख्य कच्चा माल है.इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए रुपये के कमजोर होने पर तेल आयात महंगा हो जाता है और इसका असर ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है.देश में हर रोज सुबह 6 बजे सरकारी तेल कंपनियां जैसे IOCL, BPCL, HPCL पिछले 15 दिनों के अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के औसत दाम और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को देखकर कीमतें तय करती हैं.

अलग-अलग शहरों में अलग क्यों होते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट?

देश के अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स हैं. केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जबकि हर राज्य सरकार इस पर अपने हिसाब से वैट (VAT) वसूलती है.यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और अन्य शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट में बड़ा अंतर देखने को मिलता है. रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक तेल पहुंचाने का खर्च  और पेट्रोल पंप मालिकों का कमीशन भी इसमें जोड़ा जाता है, जिसके बाद अंतिम कीमत आम जनता की जेब से वसूली जाती है.

लेखक के बारे में
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अनिशा कुमारी
सबएडिटर
मैं करीब 4 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में एनडीटीवी में सबएडिटर के रूप में कार्यरत हूं. मैंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, ट्र... और पढ़ें
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