रूस से सस्ता तेल मिलना कम हुआ तो क्या पेट्रोल-डीजल के दाम फिर आग लगाएंगे? इस सवाल का जवाब हर भारतीय के दिमाग में है. अमेरिका और रुस के मामले के बीच भारत ने वेनेजुएला और ब्राजील जैसे नए ऑप्शन ढूंढ लिए हैं. इन सभी बातों का असर देश में कच्चे तेल पर क्या रह सकता है, इस खबर में यह जानने की कोशिश करेंगे.
अमेरिका से डील और रूस से दूरी
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में एक बड़ी ट्रेड डील हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है, लेकिन इसके बदले एक शर्त रखी है रूस से तेल का आयात कम करना. इसका असर दिखने भी लगा है. दिसंबर 2025 में जहां भारत रूस से रोजाना 22 लाख बैरल तेल ले रहा था, वहीं जनवरी 2026 में यह घटकर सिर्फ 10 लाख बैरल रह गया.
वेनेजुएला और ब्राजील के रुप में नए ऑप्शन
भारत के पास विकल्पों की कमी नहीं है. पहले बात करते हैं वेनेजुएला की. दरअसल यहां दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. यहां का हैवी क्रूड सस्ता मिलता है और भारत की रिफाइनरियां इसे प्रोसेस करने में माहिर हैं. दूसरी तरफ भारत अब ब्राजील से भी दोस्ती बढ़ा रहा है और वहां से तेल का आयात शुरू हो चुका है. इन दोनों के अलावा सऊदी अरब और कुवैत हमेशा की तरह भारत के साथ खड़े हैं.
क्या महंगा होगा पेट्रोल?
एक्सपर्ट का मानना है कि रूस से सस्ता तेल बंद होने पर भारत का इंपोर्ट बिल $9-12 बिलियन बढ़ सकता है. इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 5 से 6 रुपये की बढ़ोतरी का डर है. लेकिन राहत की बात यह है कि सरकार एक्साइज ड्यूटी कम करके कीमतों को काबू में रख सकती है. इसके साथ ही पुरानी डील के जरिए मार्च 2026 तक रूस से सस्ता तेल आता रहेगा, इसलिए फिलहाल परेशान होने की जरूरत नहीं है.
भारत के लिए स्थिति बहुत अच्छी है. एक तरफ अमेरिका से ट्रेड में फायदा हो रहा है, तो दूसरी तरफ वेनेजुएला जैसे नए रास्ते खुल रहे हैं. कहा जा सकता है कि सरकार की कोशिश यही है ग्लोबल राजनीति का बोझ आम आदमी की जेब पर न पड़े.
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