- पाकिस्तान में मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण पेट्रोल-डीजल के साथ खाद्य वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़े हैं
- पाकिस्तान के ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार महंगाई सूचकांक SPI में 6.44 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है
- खाद्य पदार्थों की बात करें तो प्याज 9.63 प्रतिशत, केला 1.44 प्रतिशत और गेहूं का आटा 1.28 प्रतिशत महंगा हुआ
Record Inflation in Pakistan: जंग हो रही है अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच और 'तेल' निकल गया है पाकिस्तान का. मिडिल ईस्ट जंग (Middle East Conflict) के चलते पाकिस्तान में केवल पेट्रोल-डीजल के ही रेट नहीं बढे, बल्कि ब्रेड, दूध से लेकर आटा-दाल-चावल तक, खाने-पीने की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़े हैं. सरकारी आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं. मौजूदा समय में पाकिस्तान के कराची शहर की बात करें तो वहां दूध का भाव 240 रुपये/लीटर पहुंच गया है, जबकि ब्रेड का दाम 160 रुपये के करीब हो गया है. सेब और नारंगी 316 रुपये और 280 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहे हैं.
महंगाई के आंकड़े दे रहे गवाही
पाकिस्तान के ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) के मुताबिक, 11 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में महंगाई का सूचकांक SPI 6.44% बढ़ गया है. सालाना आधार पर हुई इस बढ़ोतरी के पीछे पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स और जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी बताई जा रही है.
पाकिस्तान में अल्पकालिक महंगाई का प्रमुख सूचकांक सेंसिटिव प्राइस इंडिकेटर (SPI) 1.89% बढ़ गया है, जो घरेलू इस्तेमाल की प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल को दर्शाता है.

पेट्रोल-डीजल की कीमतें हफ्ते भर में 20% बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल की कीमतों में 20.60 प्रतिशत और डीजल में 19.54 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, एलपीजी की कीमतों में 12.13 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जिसने महंगाई को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई.
खाने-पीने की चीजों के दाम भी खूब बढ़े
खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. प्याज 9.63 प्रतिशत, केला 1.44 प्रतिशत और गेहूं का आटा 1.28 प्रतिशत महंगा हुआ. इसके अलावा चिकन 0.66 प्रतिशत, दाल माश 0.55 प्रतिशत, जलावन लकड़ी 0.38 प्रतिशत, चना दाल 0.10 प्रतिशत, ताजा दूध 0.08 प्रतिशत और पका हुआ बीफ 0.02 प्रतिशत महंगा हुआ.

अच्छा खाना चाहिए तो खर्च करने होंगे 1,000 रुपये
पाकिस्तान में एक व्यक्ति को 2400 कैलोरी वाला अच्छा और संतुलित भोजन पाने के लिए हर दिन कम से कम 1,073.04 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, यानी महीने का न्यूनतम सुझाया गया खर्च 33,264.29 रुपये बैठता है. Cost of Living पर नजर रखने वाले Numbeo के आंकड़ों के मुताबिक, इसमें दूध, डबलरोटी, चावल, अंडे, पनीर, चिकन, बीफ, फल और सब्ज़ियों जैसी चीजों की लागत शामिल है.
इन चीजों की लागत जोड़कर बताया गया है कि सिर्फ बुनियादी पौष्टिक भोजन के लिए ही हर व्यक्ति को 1,000 रुपये से ज्यादा रुपये चाहिए. इससे साफ दिखता है कि मौजूदा कीमतों पर साधारण परिवारों के लिए भी बेहतर डाइट अफॉर्ड करना यानी अच्छा भोजन करना, कितना मुश्किल होता जा रहा है.

रहम-ओ-करम पर पाकिस्तान की GDP!
एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अल्पकालिक रेमिटेंस और बाहरी मदद पर अत्यधिक निर्भरता के कारण एक खतरनाक आर्थिक जाल में फंसता जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की GDP में रेमिटेंस की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो निर्यात आय के बराबर हो गई है. इससे बंद पड़ी फैक्ट्रियों, उच्च बेरोजगारी और उत्पादन क्षमता के कम इस्तेमाल जैसी आर्थिक कमजोरियां छिप रही हैं.
IMF के कर्ज का बोझ बढ़ा सकता है गरीबी
रिपोर्ट में बताया गया है कि 1958 से अब तक पाकिस्तान 26 बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है, जो दुनिया में सबसे अधिक है. इन कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को अब तक 34 अरब डॉलर से अधिक की मदद मिली है. हालिया 7 अरब डॉलर का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी कार्यक्रम 2024 में शुरू हुआ, जिसे 2025-26 तक बढ़ाया गया है, जो देश की बढ़ती बाहरी मदद पर निर्भरता को दर्शाता है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2026 से 2031 के बीच पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर कर्ज, महंगाई और बढ़ती गरीबी का गहरा असर देखने को मिल सकता है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ेगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं