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NSE IPO की आज धमाकेदार एंट्री होगी या फीकी पड़ेगी चमक? जानिए कितने प्रीमियम पर लिस्ट हो सकते हैं NSE के शेयर

NSE IPO Listing: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE का इंतजार खत्म हो गया है और इसके ₹22,569 करोड़ के मेगा आईपीओ की आज बीएसई पर लिस्टिंग हो रही है. $46.2 अरब की मार्केट वैल्यू के साथ NSE दुनिया का 7वां सबसे बड़ा एक्सचेंज बनने जा रहा है.

NSE IPO की आज धमाकेदार एंट्री होगी या फीकी पड़ेगी चमक? जानिए कितने प्रीमियम पर लिस्ट हो सकते हैं NSE के शेयर
NSE IPO Listing: एक्सपर्ट्स इसके शेयरों की 2% से 3% के मामूली प्रीमियम पर शुरुआत का अनुमान लगा रहे हैं.

भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज NSE आज शेयर बाजार में कदम रखने जा रहा है. ऐसे में निवेशकों की नजरें आज देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की लिस्टिंग पर टिकी हुई हैं. ₹22,569 करोड़ का यह पब्लिक इश्यू हुंडई मोटर्स के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ है. बोली के आखिरी दिन इसे 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था. 

सेबी के नियमों के मुताबिक NSE अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता, इसलिए इसके शेयर BSE और मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (MSEI) पर ट्रेड करेंगे.

कितने रुपये पर होगी लिस्टिंग?

ग्रे मार्केट के कमजोर संकेतों (GMP) और एफएंडओ सेगमेंट में आई हालिया सुस्ती को देखते हुए बाजार के जानकारों का मानना है कि लिस्टिंग बहुत ज्यादा धमाकेदार नहीं होगी. एनालिस्ट का अनुमान है कि NSE का शेयर 2% से 3% के मामूली प्रीमियम के साथ बाजार में शुरुआत कर सकता है. निवेशक एक तरफ NSE की मजबूत पकड़ को देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ घटते ऑप्शंस वॉल्यूम से थोड़ी सतर्कता भी बरत रहे हैं.

दुनिया का 7वां सबसे बड़ा लिस्टेड एक्सचेंज

लिस्टिंग के समय NSE की कुल मार्केट वैल्यू लगभग $46.2 अरब (करीब 3.8 लाख करोड़ रुपये) आंकी गई है. इस वैल्यूएशन के साथ ही NSE दुनिया का सातवां सबसे बड़ा लिस्टेड एक्सचेंज बन जाएगा. इस रेस में अमेरिका का CME ग्रुप पहले और ICE दूसरे नंबर पर हैं, जबकि NSE हांगकांग, जर्मन और लंदन स्टॉक एक्सचेंज के ठीक पीछे खड़ा है.

ऑप्शंस ट्रेडिंग कमाई का  जरिया 

शेयरों की खरीद-बिक्री में 93% और फ्यूचर्स ट्रेडिंग में पूरी 100% हिस्सेदारी के साथ NSE का ही एकतरफा दबदबा है हालांकि, इसकी कुल कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 53% अकेले इंडेक्स ऑप्शंस ट्रेडिंग से आता है. ट्रांजैक्शन फीस से होने वाली कुल 13,057 करोड़ रुपये की कमाई में से 9,996 करोड़ रुपये सिर्फ ऑप्शंस से ही मिले हैं. यही वजह है कि नियम बदलने से अगर ट्रेडिंग घटती है, तो इसका असर NSE की कमाई पर पड़ता है.

नॉन-ट्रेडिंग बिजनेस से कमाई बढ़ाने की तैयारी

सिर्फ ऑप्शंस पर निर्भरता कम करने के लिए NSE नए-नए सेक्टर में कदम बढ़ा रहा है. एक्सचेंज को हाल ही में नेशनल कोल ट्रेडिंग एक्सचेंज बनाने की मंजूरी मिली है. इसके अलावा बिजली, नेचुरल गैस, ब्रेंट क्रूड ऑयल और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स जैसे नए सेगमेंट्स भी शुरू किए गए हैं, ताकि आने वाले दिनों में ट्रांजैक्शन फीस के अलावा दूसरे जरियों से भी अच्छी कमाई हो सके.

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