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कारोबारियों को बड़ी राहत: 1 अगस्त से लागू नहीं होंगे E-Way Bill के नए नियम, जानें GSTN ने क्यों लिया ये फैसला

E-Way Bill New Rules: भारत में जीएसटी के तहत ₹50,000 से अधिक मूल्य के सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए ऑनलाइन ई-वे बिल जनरेट करना अनिवार्य होता है

कारोबारियों को बड़ी राहत: 1 अगस्त से लागू नहीं होंगे E-Way Bill के नए नियम, जानें GSTN ने क्यों लिया ये फैसला
GST E-Way Bill News: जीएसटीएन ने कहा कि नियमों को आगे बढ़ाने के बजाय पूरी तरह होल्ड पर रखने से कारोबारियों और कंपनियों का काम बिना किसी रुकावट के पुराने ढर्रे पर चलता रहेगा.

जीएसटी नेटवर्क यानी GSTN ने ई-वे बिल (E-Way Bill) सिस्टम में 1 अगस्त 2026 से लागू होने वाले दो बड़े बदलाव फिलहाल रोक दिए हैं. इंडस्ट्री और कारोबारियों से मिले फीडबैक के बाद इन बदलावों को अगले आदेश तक लागू नहीं किया जाएगा. GSTN ने बताया कि 9 जून और 17 जून को जारी की गई एडवाइजरी में जिन बदलावों की जानकारी दी गई थी, उन्हें अभी होल्ड पर रखा गया है. फिलहाल इन बदलावों की नई तारीख का ऐलान नहीं किया गया है.

कौन से दो बड़े बदलाव लागू होने थे...

  • पहला बदलाव बिल टू शिप टू ट्रांजैक्शन से जुड़ा था. इसमें शिप टू जीएसटीआईएन भरना जरूरी किया जाना था. इसका मकसद सामान लेने वाले असली रिसीवर की सही पहचान करना और सामान की ट्रेसबिलिटी को बेहतर बनाना था.
  • दूसरा बदलाव वॉलंटरी क्लोजर फैसिलिटी का था. इसके तहत अगर किसी वजह से सामान की आवाजाही आखिर में नहीं होती, तो टैक्सपेयर एक्टिव ई वे बिल को खुद बंद कर सकते थे.

इन दोनों बदलावों के साथ ईआरपी और ई-इनवॉइस इंटीग्रेशन के लिए एपीआई में भी बदलाव किए जाने थे.

इंडस्ट्री ने क्यों जताई चिंता?

ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा कि टेस्टिंग के दौरान कई कंपनियों को इन नए नियमों को लागू करने में दिक्कत आई. खासकर उन सेक्टरों में जहां सप्लाई चेन काफी जटिल है. जैसे ऑटो कंपोनेंट, ईपीसी और ई-कॉमर्स. उन्होंने कहा कि जीएसटीएन ने सिर्फ तारीख आगे नहीं बढ़ाई, बल्कि एडवाइजरी और एफएक्यू भी वापस ले लिए. इससे लगता है कि सरकार सिर्फ देरी नहीं कर रही, बल्कि इंडस्ट्री से मिले सुझावों के आधार पर इन नियमों के डिजाइन पर दोबारा विचार कर रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों ने अब तक जो टेस्टिंग की है, उसे संभालकर रखना चाहिए. क्योंकि सामान की ट्रेसबिलिटी बढ़ाने का मकसद आगे भी किसी नए रूप में जारी रह सकता है.

कारोबार पर नहीं पड़ेगा असर, पुराना सिस्टम ही चलता रहेगा

एएमआरजी ग्लोबल के मैनेजिंग पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि जीएसटीएन ने यह साफ नहीं बताया कि बदलाव क्यों टाले गए. लेकिन माना जा सकता है कि सभी पक्षों को अभी और तैयारी के समय की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इससे पहले ट्रेड, ईआरपी वेंडर, जीएसपी और एएसपी ने सिस्टम में बदलाव, एपीआई इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और मास्टर डेटा अपडेट के लिए ज्यादा समय मांगा था. उनके मुताबिक, इन बदलावों को फिलहाल रोकने से कारोबार पर कोई रुकावट नहीं आएगी और मौजूदा ई वे बिल सिस्टम पहले की तरह चलता रहेगा. जब नया रोडमैप तैयार होगा, तब नई तारीख बताई जाएगी.

ई-वे बिल क्या है और इसकी जरूरत कब पड़ती है?

जीएसटी नियमों के मुताबिक, 50,000 रुपये से ज्यादा कीमत का सामान ले जाते समय ई-वे बिल होना जरूरी है. इसे सामान भेजने से पहले जीएसटी पोर्टल पर जीएसटी रजिस्टर्ड व्यक्ति या ट्रांसपोर्टर तैयार करता है. 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की सीमाओं पर बने फिजिकल चेक पोस्ट हटा दिए गए थे. इससे सामान की आवाजाही पहले से तेज हुई और रास्ते में होने वाली देरी कम हुई. ई-वे बिल सिस्टम उसी का डिजिटल विकल्प बनकर सामने आया. इससे बिना फिजिकल बैरियर लगाए सामान की ऑनलाइन ट्रैकिंग करना आसान हुआ और टैक्स सिस्टम को भी मदद मिली.

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