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Mutual Fund से हुआ है मोटा मुनाफा? जानें रिटर्न पर कितना देना होगा टैक्स? वरना बढ़ सकती है परेशानी

Mutual Funds Tax Rules 2026: म्यूचुअल फंड में कमाई के साथ टैक्स की जिम्मेदारी भी आती है. सही जानकारी और प्लानिंग से आप ज्यादा फायदा उठा सकते हैं और भविष्य में किसी तरह की परेशानी से बच सकते हैं.

Mutual Fund से हुआ है मोटा मुनाफा? जानें रिटर्न पर कितना देना होगा टैक्स? वरना बढ़ सकती है परेशानी
Tax on Mutual Fund Returns: म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न पर ध्यान देना सही नहीं है. टैक्स की पूरी जानकारी होना भी जरूरी है.
नई दिल्ली:

Tax on Mutual Funds: आजकल ज्यादातर नौकरी करने वाले लोग पैसा बढ़ाने के लिए म्यूचुअल फंड  में निवेश करते हैं. SIP और लंपसम के जरिए लोग अच्छा रिटर्न भी कमा रहे हैं. लेकिन कई बार लोग सिर्फ मुनाफा देखते हैं और टैक्स को नजरअंदाज कर देते हैं. यही गलती आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकती है. अगर आपने म्यूचुअल फंड से अच्छा मुनाफा कमाया है, तो यह समझना बहुत जरूरी है कि उस पर कितना टैक्स देना होगा. सही जानकारी होने से आप पहले से प्लान कर सकते हैं और अचानक टैक्स का बोझ नहीं पड़ेगा.

म्यूचुअल फंड में टैक्स कैलकुलेशन आसान नहीं

म्यूचुअल फंड में टैक्स का हिसाब थोड़ा जटिल होता है. फिक्स्ड डिपॉजिट या प्रॉपर्टी की तरह यहां टैक्स सिर्फ कमाई पर ही नहीं लगता, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने कितने समय तक निवेश रखा है. यानी निवेश की अवधि और फंड का प्रकार दोनों बहुत अहम होते हैं. इसलिए कई निवेशकों को टैक्स समझने में दिक्कत होती है.

इक्विटी म्यूचुअल फंड पर कितना देना होगा टैक्स

अगर आपने इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया है, तो टैक्स निवेश की अवधि के अनुसार तय होता है. अगर आपने फंड को 12 महीने से ज्यादा रखा है, तो इसे लॉन्ग टर्म गेन माना जाएगा. ऐसे में करीब 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होता है. वहीं अगर 12 महीने के भीतर पैसा निकालते हैं, तो शॉर्ट टर्म गेन माना जाएगा और करीब 20 प्रतिशत टैक्स देना पड़ सकता है. इसलिए निवेश से पहले समय तय करना जरूरी है.

डेट और अन्य फंड पर अलग नियम

डेट और अन्य म्यूचुअल फंड स्कीम में टैक्स आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार लगता है. यानी आपकी सालाना आय जितनी ज्यादा होगी, टैक्स भी उतना ज्यादा देना होगा. वित्त वर्ष 2025-26 के नियमों के अनुसार डेट फंड पर अलग से लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म का फायदा नहीं मिलता. यह सीधे आपकी टैक्सेबल आय में जुड़ जाता है.

डिविडेंड पर भी देना होगा टैक्स

पहले म्यूचुअल फंड कंपनियां डिविडेंड देने से पहले ही टैक्स काट लेती थीं, जिसे डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स कहा जाता था. लेकिन 1 अप्रैल 2020 से यह सिस्टम खत्म हो गया. अब डिविडेंड को आपकी आम आय माना जाता है. इसका मतलब है कि जो भी डिविडेंड मिलेगा, उसे आपकी कुल आय में जोड़ा जाएगा और उसी के अनुसार टैक्स लगेगा.

ELSS में टैक्स सेविंग का फायदा

अगर आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (Equity Linked Savings Scheme) अच्छा विकल्प हो सकता है. इसमें निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है. इससे आपकी टैक्सेबल आय कम हो जाती है और टैक्स का बोझ घट सकता है. साथ ही इसमें लॉक इन पीरियड होने के कारण लंबे समय में अच्छा रिटर्न भी मिल सकता है.

परेशानी से बचने के लिए सही प्लानिंग जरूरी

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न पर ध्यान देना सही नहीं है. टैक्स की पूरी जानकारी होना भी जरूरी है. अगर आप समय, फंड और टैक्स नियमों को समझकर निवेश करते हैं, तो आप ज्यादा पैसा बचा सकते हैं. इसलिए हर निवेशक को सलाह दी जाती है कि निवेश से पहले टैक्स प्लान जरूर करें और जरूरत हो तो फाइनेंशियल एक्सपर्ट की मदद लें.
 

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