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होर्मुज संकट से यूरोप के सबसे बड़े रॉटरडैम पोर्ट पर असर, घटने लगी कच्चे तेल के टैंकरों की आवाजाही, NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट

होर्मुज संकट का असर यूरोप के सबसे बड़े रॉटरडैम पोर्ट पर दिखने लगा है. कच्चे तेल के टैंकरों की संख्या घटी, जानिए भारत और यूरोप की तेल सप्लाई पर इसका क्या असर पड़ रहा है.

होर्मुज संकट से यूरोप के सबसे बड़े रॉटरडैम पोर्ट पर असर, घटने लगी कच्चे तेल के टैंकरों की आवाजाही, NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट
Rotterdam Port Ground Report: होर्मुज संकट के साए में कच्चे तेल की सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा.
NDTV इंडिया

मध्यपूर्व एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के तेल बाजार के साथ-साथ यूरोप की तेल सप्लाई पर भी दिखने लगा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही में आ रही रुकावट ने यूरोप की चिंता बढ़ा दी है. इसका असर नीदरलैंड के हेग में स्थित यूरोप के सबसे बड़े 'रॉटरडैम पोर्ट' तक पहुंच गया है. यहां आने वाले कच्चे तेल से भरे टैंकरों की संख्या में कमी आई है. NDTV की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए यूरोप के इस अहम बंदरगाह पर होर्मुज संकट का कितना असर पड़ रहा है.

कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब

पेट्रोलियम मंत्रालय की संस्था पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 29 अक्टूबर 2026 को कच्चे तेल (इंडियन बास्केट) की कीमत 114.6 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई थी.

वहीं, अक्टूबर महीने में अब तक कच्चे तेल (इंडियन बास्केट) की औसत कीमत 119.96 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. इससे पहले अगस्त 2026 में इसकी औसत कीमत 90.19 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, जो सितंबर 2026 में बढ़कर 116.09 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई थी.

क्या है कच्चे तेल की इंडियन बास्केट?

कच्चे तेल की 'इंडियन बास्केट' में वे ग्रेड शामिल होते हैं, जिन्हें भारतीय रिफाइनरियां हर महीने आयात करती हैं. इसमें 'स्वीट ग्रेड' (ब्रेंट डेटेड) और 'सोर ग्रेड' (ओमान और दुबई का औसत) कच्चे तेल का मिश्रण होता है.

होर्मुज संकट से यूरोप की तेल और गैस सप्लाई पर असर

इस संकट का असर सिर्फ भारत की तेल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोपीय देशों पर भी इसका साया मंडरा रहा है. मध्यपूर्व एशिया में जारी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही में लगातार बाधा आ रही है.आने वाले सर्दियों के मौसम से पहले यूरोप में तेल और गैस की सप्लाई पर इसका असर पड़ने लगा है. होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित होने की वजह से नीदरलैंड्स की राजधानी 'दी हेग' में स्थित यूरोप के सबसे बड़े 'रॉटरडैम पोर्ट' पर पहुंचने वाले कच्चे तेल से भरे टैंकरों की संख्या घट गई है.

रॉटरडैम पोर्ट पर आने वाले तेल टैंकरों की संख्या घटी

रॉटरडैम पोर्ट में तैनात अधिकारियों ने NDTV को बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के कारण इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यूरोपीय बंदरगाह पर पहुंचने वाले कच्चे तेल के टैंकरों की संख्या में कमी आई है.

रॉटरडैम पोर्ट के एक अधिकारी ने NDTV को बताया कि यूरोप के इस सबसे बड़े बंदरगाह पर आने वाले कुल शिप कार्गो (माल) में से 49% हिस्सा तेल टैंकरों का होता है. ऐसे में तेल टैंकरों की आवाजाही में कमी यूरोप की ऊर्जा सप्लाई के लिहाज से अहम है.

यूरोप अपनी जरूरत का करीब 97% कच्चा तेल करता है आयात

यूरोपीय परिषद के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) अपनी जरूरत का लगभग सारा कच्चा तेल आयात करता है. साल 2024 में यह आंकड़ा करीब 97% था. यूरोपीय संघ में खपत होने वाली ऊर्जा में तेल की बड़ी हिस्सेदारी है.ऐसे में होर्मुज में जारी संकट और तेल टैंकरों की आवाजाही में रुकावट यूरोप की ऊर्जा सप्लाई के लिए चिंता का विषय बन गई है.

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