एआई की रेस में कंपनियां जल्दबाजी में कई गलत फैसले ले रही हैं. इसका ताजा सबूत मेटा के रुप में सामने आया है. कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने ये मान लिया कि अपनी कंपनी के वर्कफोर्स को एआई ट्रांसफॉर्मेशन की जल्दबाजी में उनसे बड़ी गलतियां हुईं हैं. रॉयटर्स की खबर के अनुसार जुकरबर्ग ने कहा, 'बड़े बदलावों को देखते हुए हमसे गलतियां हुई हैं. ऐसे में कंपनी का पूरा फोकस अब स्टेबिलिटी पर है."
क्या है पूरा मामला?
मई में कंपनी ने एआई तकनीक पर मजबूती और 7 हजार कर्मचारियों के ट्रांसफर के लिए बड़े पैमाने पर ले ऑफ किया था. वर्कफोर्स में से 10 फीसदी यानी करीब 8 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इसके बाद ही कंपनी ने 7 हजार अपने कर्मचारियों को रातों रात एआई से जुड़े प्रोजेक्ट्स में शिफ्ट कर दिया था.
जुकरबर्ग ने मेमो में बताया कि नई जिम्मेदारियां देने का मकसद यही था कि अगर इन बदलावों के बाद कोई डिपार्टमेंट ठीक से काम नहीं कर पाता है तो कर्मचारी को वापस से पुरानी जिम्मेदारी पर भेजा जा सके. इस बड़े फेरबदल की वजह से कंपनी के अंदर अनिश्चितता का माहौल बन गया था, जिसे दूर करने के लिए अब मार्क को खुद सामने आना पड़ा है.
क्या आईं दिक्कतें?
कंपनी का मैनेजर और कर्मचारी की संख्या वाला दांव उलटा पड़ गया. इस एआई ट्रांसफॉर्मेशन का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट कमपनी के मैनेजमेंट स्ट्रक्चर पर पड़ा. एआई टीमों में काम करने वाले कर्मचारियों और मैनेजर्स के बीच का रेश्यो पूरी तरह से बिगड़ गया. रिपोर्ट के अनुसार मेटा की नई अप्लाइड एआई इंजीनियरिंग टीम में 50 कर्मचारियों पर सिर्फ 1 मैनेजर था. इस वजह से शिकायतें होने लगीं कि काम की निगरानी करना और गाइडेंस मिलना नामुमकिन हो रहा है. मार्क के अनुसार अब इस गलती को सुधारकर टीमों के आकार को बढ़ाया जाएगा.
कर्मचारियों को मिली राहत भरी खबर
इस मेमो के जरिए मार्क ने अपने कर्मचारियों को एक राहत भरी खबर दी. मार्क ने साफ कहा कि इस साल अब कंपनी में कोई बड़ी छंटनी नहीं होगी. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है. ऐसे में पक्का कुछ भी नहीं कहा जा सकता. कुल मिलाकर मार्क जुकरबर्ग ने ये कबूला कि एआई का रास्ता जितना मजबूत दिखता है, टेक कंपनियों के लिए इसे अपनाना इतना ही मुश्किल भरा हो सकता है.
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